ओडिशा के बाद बंगाल में मिला दुर्लभ प्रजाति का पीले रंग का कछुआ, सब हुए हैरान

यह नरम कोशिकाओं वाला भारतीय कछुआ है.
यह नरम कोशिकाओं वाला भारतीय कछुआ है.

Yellow Turtle rescued from Pond: बर्द्धमान विश्व विद्यालय में जीव विज्ञान विभाग (Department of Zoology) के प्रोफ़ेसर गौतम चंद्र का कहना था कि यह कछुए की दुर्लभ प्रजाति है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 11:13 AM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) के बर्द्धमान में एक तालाब में पीला कछुआ (Yellow turtle) मिला है. इसे 'फ़्लैपशेल कछुआ' माना जाता है जो दुर्लभ प्रजाति का है. इस साल में यह दूसरी बार है जब पीला कछुआ मिला है. इससे पहले ओडिशा में बालासोर ज़िले के सुजानपुर गांव में लोगों ने ऐसे ही एक दुर्लभ पीले कछुए को पकड़ा था और उसे ज़िला वन अधिकारियों को सौंप दिया था.

कई लोगों का यह भी मानना है कि इस कछुए को अवर्णता (Albinism) की बीमारी है जिसकी वजह से किसी प्राणी में मेलानिन की कमी हो जाती है. रंग में इस तरह का बदलाव जीन में आने वाली कुछ स्थाई गड़बड़ी या जन्मजात गड़बड़ी के कारण भी होता है जो टाइरोसीन कणिकाओं (Tyrosine pigment) के कारण होता है. यह कछुआ अल्बिनो है. इस कछुए का शरीर और ऊपरी शेल पीला है. आंखों की पुतली को छोड़कर कछुए का सब कुछ पीला है.

Yellow Turtle
फोटो साभारः ट्विटर




नरम कोशिकाओं वाला भारतीय कछुआ
बर्द्धमान सोसायटी फ़ॉर ऐनिमल वेल्फ़ेर के सदस्य अर्नब दास ने बताया कि कछुए के शरीर पर कई जगह घाव है और उसे इलाज की ज़रूरत है. यह नरम कोशिकाओं वाला भारतीय कछुआ है. यह मादा है और इसकी उम्र लगभग डेढ़ साल है. शारीरिक गड़बड़ियों की वजह से इसका रंग पीला पड़ गया है. हालांकि, यह बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का कछुआ है. इस साल के शुरू में इसी तरह का एक कछुआ ओडिशा में मिला था. कुछ लोगों ने दावा किया कि इसी तरह का कछुआ पश्चिम बंगाल के काकद्वीप में खेतों से भी मिला था.

म्यांमार और पाकिस्तान में पाया जाता है इस तरह का कछुआ
बर्द्धमान विश्व विद्यालय में जीव विज्ञान विभाग (Department of Zoology) के प्रोफ़ेसर गौतम चंद्र का कहना था कि यह कछुए की दुर्लभ प्रजाति है. इस तरह का कछुआ म्यांमार, पाकिस्तान और दूसरे देशों में पाया जाता है. अल्बिनो एक तरह का त्वचा रोग़ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कछुआ पहले सफ़ेद रंग का था और इसके बाद यह पीला हो गया.
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