नपुंसकता और सगोत्रीय विवाह में ये है संबंध, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा

सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक के थंगराज ने अपने अध्ययन में पता लगाया है कि सगोत्रीय विवाह से ऐसे लड़के के जन्म की आशंका बढ़ जाती है, जो पैदाइशी नपुंसक हो. धर्मग्रंथों में भी इसकी विस्तार से व्याख्या की गई है.

Sanjay Tiwari
Updated: July 17, 2019, 3:47 PM IST
नपुंसकता और सगोत्रीय विवाह में ये है संबंध, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा
सगोत्रीय विवाह पर वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा
Sanjay Tiwari
Sanjay Tiwari
Updated: July 17, 2019, 3:47 PM IST
अगर आप शादी के बारे में सोच रहे हैं, तो समान गोत्र में शादी करने से आपको बचना चाहिए. क्योंकि नजदीकी रिश्तेदार या समान गोत्र में शादी करने से होने वाला बेटा नपुंसक पैदा हो सकता है. सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक के थंगराज ने अपने अध्ययन में पता लगाया है कि सगोत्रीय विवाह से ऐसे लड़के के जन्म की आशंका बढ़ जाती है, जो पैदाइशी नपुंसक हो. धर्मग्रंथों में भी इसकी विस्तार से व्याख्या की गई है.

जीन्स में गड़बड़ी पैदा करते हैं सगोत्रीय विवाह
दुनिया में हर सातवां शादीशुदा जोड़ा नपुंसकता का शिकार है. नपुंसकता की कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें से एक है जीन्स में गड़बड़ी होना. जीन्स में गड़बड़ी आने की एक वजह सगोत्रीय विवाह या छोटे जातीय समूह के अंदर होने वाले विवाह हो सकते है. सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के डायरेक्टर राकेश कुमार मिश्रा ने बताया, ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक भारत में 8 करोड़ से ज्यादा लोग जेनेटिक बीमारियों से ग्रसित हैं. ऐसी बीमारियों से पीड़ित संतान की उत्पत्ति के कई कारण हैं. सगोत्रीय विवाह उनमें एक बड़ा कारण है’.

सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मोलिक्यूलर बायोलॉजी के वैज्ञानिकों का खुलासा, big disclosures by scientists of ccmb
सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वैज्ञानिकों का खुलासा


धर्मग्रंथों में उल्लेख
सगोत्रीय विवाह होने पर नपुंसक संतान पैदा होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है. हिंदू धर्मशास्त्रों में सगोत्रीय विवाह या सपिंड विवाह को वर्जित माना गया है. ऋग्वेद के 10वें मंडल के 10वें सूक्त में जुड़वां भाई बहन यम और यमी की बातचीत का जिक्र आता है. यमी अपने सगे भाई यम से विवाह कर संतान पैदा करने की इच्छा जाहिर करती है. लेकिन यम यह कहते हुए इनकार कर देते हैं कि ऐसा विवाह प्राकृतिक नियमों के खिलाफ है, और ऐसा करना पाप की श्रेणी में आता है.

क्या होते हैं सगोत्र विवाह
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पाणिनी ने अष्टाध्यायी में बताया है कि एक व्यक्ति के पोते पड़पोते समेत जितनी भी संतान होगी, वो एक ही गोत्र की कही जाएंगी. धर्मग्रंथों के मुताबिक सगोत्र विवाह से शारीरिक व्याधि, अल्पायु, कम बुद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी और विकलांगता जैसी समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है.

क्या है इसका वैज्ञानिक आधार
सीसीएमबी के वैज्ञानिक के थंगराज ने 973 नपुंसक लोगों का अध्ययन करने पर पाया कि उनमें से 29 फीसदी से ज्यादा पुरुषों को जेनेटिक डिसॉर्डर की वजह से नपुंसकता आई है. अध्ययन में पता चला है कि  ऐसे पुरुषों के Y क्रोमोजोम में शुक्राणु पैदा करने के लिए जिम्मेदार जीन ही मौजूद नहीं था. इसे अजूसपर्मिया फैक्टर कहते हैं.

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First published: July 17, 2019, 3:14 PM IST
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