आज हो रहा है राहु-केतु का गोचर, जानें कैसे हुई इनकी उत्पत्ति

राहु-केतु की दुर्बल स्थिति कुंडली में अनेक प्रकार के दोष और जीवन में परेशानियों की वजह बनती है.
राहु-केतु की दुर्बल स्थिति कुंडली में अनेक प्रकार के दोष और जीवन में परेशानियों की वजह बनती है.

कुंडली (Horoscope) में राहु (Rahu) की विशेष स्थिति में मौजूदगी इंसान को रंक से राजा बना सकती है. इसके साथ ही राहु इंसान की कुंडली में शुभ स्थान पर मौजूद रहकर जीवन में सकारात्मक परिणाम देता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 9:11 AM IST
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वैदिक ज्योतिष में राहु-केतु (Rahu-Ketu), इन दो ग्रहों को छाया ग्रह का दर्जा दिया गया है. बहुत से लोग राहु-केतु को अशुभ ग्रह भी मानते हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता है. आपको जानकर शायद हैरानी हो लेकिन, कुंडली (Horoscope) में राहु की विशेष स्थिति में मौजूदगी इंसान को रंक से राजा बना सकती है. इसके साथ ही राहु इंसान की कुंडली में शुभ स्थान पर मौजूद रहकर जीवन में सकारात्मक परिणाम देता है. ठीक उसी तरह लोग केतु के नाम से भी डर जाते हैं, लेकिन असलियत में केतु ग्रह की कुंडली के तीसरे छठे और ग्यारहवें भाव में मौजूदगी इंसान को उसके जीवन में आगे बढ़ाने का सामर्थ्य रखती है. शुभ प्रभाव के साथ यहां ये भी जानना जरूरी है कि इंसान की कुंडली में इन दो ग्रहों की दुर्बल स्थिति कुंडली में अनेक प्रकार के दोष और जीवन में परेशानियों की वजह बनती है. आइए आपको बताते हैं राहु-केतु ग्रह के बारे में कुछ जानने वाली बातें और साथ ही बात करते हैं 23-सितंबर को होने वाले इनके गोचर के बारे में.

राहु-केतु की उत्पत्ति
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत को पीने के लिए असुरों और देवताओं में जब युद्ध छिड़ गया था तब, भगवान विष्णु ने चालाकी दिखाई. उन्होंने असुरों और देवताओं को दो अलग-अलग पंक्तियों में बैठने को कहा. भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से जैसे ही असुर मोहित हुए, भगवान विष्णु ने अमृत देवताओं को पिलाना शुरू कर दिया. इसी बीच स्वर्भानु नाम का राक्षस देवताओं वाली पंक्ति में आकर बैठ गया और अमृत पीने लगा. इस बात की जानकारी जैसे ही भगवान विष्णु को लगी उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से राक्षस का सिर धड़ से अलग कर दिया. स्वर्भानु का कटा हुआ सिर ही राहु कहलाया और उसका धड़ केतु.

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राहु-केतु का इंसान के जीवन पर प्रभाव



-शुभ राहु का प्रभाव: कुंडली में बली राहु इंसान की किस्मत चमका कर इंसान को प्रखर बुद्धि का बनाता है. साथ ही ऐसे व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान में भी वृद्धि आती है.

-अशुभ/पीड़ित राहु का प्रभाव: पीड़ित राहु इंसान के अंदर बुरी आदतों की वजह बनता है. ऐसा व्यक्ति छल, कपट, चोरी और मांस-मदिरा का सेवन करने लगता है.

-शुभ केतु का प्रभाव: कुंडली में विशेष स्थिति में मौजूद केतु इंसान के जीवन में राजयोग का निर्माण करता है. इसके अलावा ऐसे व्यक्ति को पैर से जुड़ी कोई भी समस्या नहीं होती है.

-अशुभ/पीड़ित केतु का प्रभाव: पीड़ित केतु कुंडली में कालसर्प दोष जैसे दोषों का निर्माण करता है. ऐसे इंसान के जीवन में समस्याएं और बाधाएं निरंतर परेशान करती हैं.

-पीड़ित राहु-केतु के दुष्प्रभाव से बचने के लिए इंसान को राहु-केतु ग्रहों की शांति के उपाय करने की सलाह दी जाती है.

23 सितम्बर 2020 को सुबह 08 बजकर 20 मिनट पर राहु ग्रह मिथुन से वृषभ राशि में गोचर करेगा. ठीक इसी तरह 23 सितंबर की ही सुबह 08 बजकर 20 मिनट पर केतु धनु से वृश्चिक राशि में गोचर कर जाएगा. (साभार- Astrosage.com)
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