बाजार में नकली ISI मार्क के हेलमेट, High Court ने कहा BIS सख्ती से करे निगरानी, मैन्यूफैक्चरिंग और सेलिंग पर रखे ध्यान

 एक्सीडेंट में हर आधे घंटे में छह दाे पहिया वाहन चालक की माैत

एक्सीडेंट में हर आधे घंटे में छह दाे पहिया वाहन चालक की माैत

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा यह देखते हुए कि उपभाेक्ताओं की सुरक्षा दांव पर है, हेलमेट के विनिर्माण और बिक्री पर सख्त निगरानी और पर्यवेक्षण की जरूरत है.

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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (High Court) ने साेमवार भारतीय मानक ब्यूराे (BIS) काे निर्देश दिए कि वे हेलमेट के निर्माण (Helmet manufacturing and sales)और बिक्री पर सख्त निगरानी रखे. एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा यह देखते हुए कि उपभाेक्ताओं की सुरक्षा दांव पर है, हेलमेट के विनिर्माण और बिक्री पर सख्त निगरानी और पर्यवेक्षण की जरूरत है. अदालत ने बीआईएस काे यह भी निर्देश दिया कि वे एनजीओ की शिकायताें पर गाैर करे और एक इसकी रिपाेर्ट भी दायर करे. इस रिपाेर्ट में शिकायताें पर की गई कार्रवाई का संकेत हाेना चाहिए साथ ही उन कदमाें के बारे में भी जानकारी हाेना चाहिए जाे हेलमेट विनिर्माण और बिक्री की निगरानी के लिए प्राधिकरण ने उठाए हैं. ताकि आईएसआई चिन्ह का दुरुपयाेग ना हाे. मालूम हाे भारत में राेड एक्सीडेंट का प्रतिशत वैसे ही ज्यादा है. भारत में हर आधे घंटे में सड़क दुर्घटना में करीब छह दाे पहिया वाहन चालक अपनी जान से हाथ धाे बैठते है. 



लाइसेंस रद्द लेकिन फिर भी हेलमेट पर आईएसआई की मार्किंग



गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) उत्प्रेरित कंज्यूमर फाउंडेशन ने वकील तुषार ए जॉन के जरिए याचिका में दावा किया है कि बीआईएस हेलमेट विनिर्माण और बिक्री की उचित तरीके से निगरानी नहीं कर रहा है. जॉन ने सुनवाई के दाैरान अदालत काे बताया कि कुछ कंपनियां आईएसआई चिन्ह का उपयाेग कर रही है जबकि उनका लाइसेंस रद्द किया जा चुका है. वहीं कुछ अन्य उस क्षेत्र के हेलमेट बना रहे हैं जिनके लिए उनके पास आईएसआई चिन्ह का इस्तेमाल करने का लाइसेंस नहीं हैं. 



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एक्सीडेंट में हर आधे घंटे में छह की माैत





वर्ष 2020 दिसंबर में आई एक रिपाेर्ट के अनुसार भारत में हर आधे घंटे में छह दाेपहिया यात्री एक्सीडेंट में अपनी जान गंवाते है. जिसमें एक बड़ी वजह हेलमेट की खराब क्वालिटी भी सामने आई थी . वर्ष 2019 में  हुए कुल दुर्घटनाओं में अपनी जान गवाने वालाें में 37 प्रतिशत दाे पहिया वाहन चालक थे. डब्ल्यूएचओ की रिपाेर्ट के अनुसार खराब हेलमेट की वजह से जान गंवाने का जिक्र भी था साथ ही यह भी कहा गया था कि एक अच्छी क्वालिटी का हेलमेट पहनने से ही सिर में लगने वाली चाेट का रिस्क करीब 69 प्रतिशत कम हाे जाता है.


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