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  • BUSINESS OF FAKE CAR INSURANCE IS INCREASING AT A RAPID PACE FRAUDULENT TURNOVER OF 113 CRORES IN 3 YEARS CHECK YOUR INSURANCE IN THIS WAY

तेजी से बढ़ रहा है फर्जी कार इंश्योरेंस का धंधा, 3 साल में 113 करोड़ का फर्जीवाड़ा, ऐसे चेक करें अपना Insurance

वाहनों के फर्जी इंश्योरेंस से रहे सावधान.

fake car insurance: IRDAI ने वाहन बीमा में चल रहे इस फर्जीवाड़े से बचने के लिए कुछ दिशा निर्देश भी जारी किए है. जिनका ध्यान रखकर लोग इस तरह की धोखाधड़ी से बच सकते है.

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    नई दिल्ली. बरेली में रहने वाली अनुराधा सिंह (परिवर्तित नाम) ने पिछले साल फोन पर आए एक कॉल के बाद अपनी कार का बीमा करवाया. जिस कंपनी ने उन्हें कार इंश्योरेंस का ऑफ़र किया उसके रेट मार्केट से कम थे. जिसके चलते उन्होंने बीमा करवा लिया. उनकी पॉलिसी भी सही समय पर उनके घर आ गई. अनुराधा के होश उस वक़्त उड़ गए जब उनकी कार का एक्सीडेंट हुआ और उन्होंने कार कंपनी में कार देकर इंश्योरेंस पॉलिसी दी. जहां उन्हें पता चला कि यह कंपनी फ़र्ज़ी है. अनुराधा ने कंपनी और उस एजेंट को काफ़ी फोन किए लेकर नंबर ही बदल चुका था. इस तरह की फर्जीवाड़े का शिकार होने वाली अनुराधा पहली शख़्स नहीं है. बल्कि दिन ब दिन ऐसी धोखाधड़ी के शिकार होने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है.

    भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा केंद्र सरकार को दी गई जानकारी के अनुसार पिछले तीन सालों में ऐसी तीन कंपनियों का पता चला है. जिसने ढाई हजार से ज्यादा वाहनों का नकली बीमा करवाया. जानकार बताते है यह तो वह मामले है जो सामने आ गए. जबकि अभी भी कई फर्जी कंपनियां इस तरह के काम कर रही है. सवाल यह है कि वाहन की बीमा पॉलिसी असली है या नकली इसका पता कैसे लगाया जा सकता है. जिससे इस तरह की धोखाधड़ी आपके साथ ना हो. हमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और कैसे यह फर्जीवाड़ा चल रहा है आइए जानते है.

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    तीन साल में तीन गुना बढ़े केस- भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा वित्त मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट में वाहनों की बीमा पॉलिसी में चल रहे फर्जीवाड़े के बारे में बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 से लेकर 2019 तक IRDAI को मिली शिकायत के बाद की गई जांच में ऐसी तीन कंपनियों के बारे में बता चला. जिसने बड़ी संख्या में वाहनों के फर्जी बीमा पॉलिसी बनाई. कंपनियों ने तीन साल में ही करीब 2500 से ज्याादा लोगों से 113.09 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया है. 2017 में जहां इन कंपनियों ने 33.74 करोड़ रुपये की 498 फर्जी पॉलिसी की. तो वहीं 2018 में 25.70 करोड़ की 823 पॉलिसियां की गई. वहीं वर्ष 2019 में यह आकड़ा 1192 फर्जी पॉलिसियों तक पहुंचा जिसमें कंपनियों ने 53.64 करोड़ रुपये की चपत आम लोगों को लगाई.

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    पॉलिसी के नाम पर ऐसे देते है झांसा- एक निजी इंश्योरेंस कंपनी में काम करने वाले अमजद अली के अनुसार फर्जी बीमा कंपनियां वाहन के कम प्रीमियम में बीमा करने का दावा करती है. जिसके चक्कर में लोग फंस जाते है. ज्यादातर मामलों में लोग मिलने वाली पॉलिसी के दस्तावेज भी अच्छे से चेक नहीं करते. इसके साथ ही नामी कंपनियों के नाम पर बीमा करवाने वाले फ़र्ज़ी एजेंट भी मार्केट में है. जो सीधे कैश लेकर भी कुछ घंटों में पॉलिसी देने का दावा करते है. ऐसे मामलों में ज़्यादातर दो पहिया वाहन चालक फंस जाते है. क्योंकि बीमा ख़त्म होने पर चैकिंग के दौरान चालान बनने के डर से वह जल्द से जल्द अपने वाहन का बीमा करवाना चाहते है.

    ऐसे करे पता पॉलिसी असली है या नक़ली- IRDAI ने वाहन बीमा में चल रहे इस फर्जीवाड़े से बचने के लिए कुछ दिशा निर्देश भी जारी किए है. जिनका ध्यान रखकर लोग इस तरह की धोखाधड़ी से बच सकते है. IRDAI द्वारा www. Policyholder.gov.in नाम से वेबसाइट भी शुरू की गई है. जहां आप जानकारी लेकर धोखाधड़ी से बच सकते है. आप जिस भी बीमा कंपनी से वाहन का इंश्योरेंस करवा रहे हो. उसका IRDAI में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य होता है. ऐसे में सबसे पहले आप बीमा कंपनी का नाम IRDAI की वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते है कि उक्त नाम की कोई कंपनी है भी या नहीं. यदि नहीं है तो गलती से बीमा न करवाएं. IRDAI द्वारा हर बीमा कंपनी को एक यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर (UID) दिया जाता है. जो आपकी बीमा पॉलिसी में भी रहता है. यदि आपकी पॉलिसी में UID नहीं है तो इसका मतलब वह पॉलिसी नकली है. इसकी शिकायत आप पुलिस के साथ IRDAI को भी कर सकते है.