इस राज्य में कार की रैक पर साइकिल ले जाने वालों पर अब लगेगा 5000 रुपए का जुर्माना, जानिए क्या है नियम?

इस राज्य में कार की रैक पर साइकिल ले जाने वालों पर अब लगेगा 5000 का जुर्माना
इस राज्य में कार की रैक पर साइकिल ले जाने वालों पर अब लगेगा 5000 का जुर्माना

कार के रैक पर साइकिल रखकर ले जाने वाले लोगों पर 5000 रूपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (RTO) से प्रोपर अनुमति के कागजात नहीं होने पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 2:34 PM IST
  • Share this:
बेंगलुरु. फिटनेस और खेल दोनों के लिए साइकिलिंग (Cycling) अच्छी चीज है. कोरोना वायरस महामारी में कई लोगों ने साइकिल चलाना अपनी आदतों में शामिल किया है. लोगों ने साइकिल को अपने दफ्तरों में लेकर जाना शुरू किया है, वहीँ कई लोग बेहतर शेप और फिटनेस के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. कई लोग साइकिलिंग ट्रैक और ऐसी ही जगहों पर साइकिल को अपनी कार के रैक पर लादकर ले जाते हैं लेकिन अब उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं है. बेंगलुरु में कुछ ऐसा ही हुआ है. कार के रैक पर साइकिल रखकर ले जाने वाले लोगों पर 5000 रूपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (RTO) से प्रोपर अनुमति के कागजात नहीं होने पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

बेंगलुरु के प्रशांत सुकुमारन को हाल ही में साइकिलिंग से लौटते हुए कार में साइकिल लाने के लिए जुर्माना भरना पड़ा था. बेंगलुरु के इलेक्ट्रोनिक सिटी में रहने वाले सुकुमारन अपने दस वर्षीय बेटे के साथ वीकेंड के दौरान कार पर दो साइकिल लादकर ट्रैक पर गए थे. वापसी के दौरान उन्हें पुलिस ने पकड़ा और जुर्माना भरने को कहा गया. पूछने पर बताया गया कि एक साइकिल लेकर जाने की अनुमति है लेकिन आप दो साइकिल लेकर जा रहे हैं.

ये भी पढ़ें:- दशहरा और दिवाली पर इन 5 गलतियों के कारण रद्द हो जाएगा आपका DL



बिना अनुमति के साइकिल कार पर लेकर जाने से 5000 रूपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. पिता-पुत्र अक्सर अवती पहाड़ियों की तरफ साइकिलिंग के लिए 50 किलोमीटर दूर जाते हैं और उनके पास साइकिलों को कार से लेकर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता.
बेंगलुरु के मेयर सत्य शंकरन भी एक साइकिलिस्ट रहे हैं, मामले का पता उन्हें चलने पर उन्होंने कहा कि यह हाल ही में हो रहा है कि लोगों को कार की रैक पर साइकिल लादकर लेकर जाने के लिए देना पड़ता है. हमने भी ऐसा किया है लेकिन हम पर कभी जुर्माना नहीं लगा.

उन्होंने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स एक्ट 1988 के सिक 52 (1) का हवाला देते हुए कहा कि अस्थायी या स्थायी लगाव को निर्दिष्ट नहीं किया गया है. आप इसे पत्र में लागू कर सकते हैं लेकिन भावना में लागू करना परिवर्तन नहीं है. उन्होंने बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारियों को अपने ट्वीट में टैग किया.

मामले के बारे में ADGP भास्कर राव ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जुर्माने के प्रावधान रेयर मामले में है, जहाँ साइकिल लादकर ले जाने से दूसरों को कोई खतरा हो. इसके बाद बहस छिड़ गई और कई साइकिलिस्ट इस फाइन से खुश नहीं थे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज