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गूगल मैप ने किया गुमराह, जाना था उदयपुर और पहुंचा दिया कीचड़ से भरे खेत में!

उनकी कार दोपहर करीब 1 बजे कीचड़ में फंस गई और इसे शाम 6 बजे तक ही निकाला जा सका

उनकी कार दोपहर करीब 1 बजे कीचड़ में फंस गई और इसे शाम 6 बजे तक ही निकाला जा सका

गूगल मैप को लेकर अक्सर लोगों ने यह कहा है कि आमतौर पर शहरी क्षेत्रों में मैप सटीक लोकेशन पर पहुंचा देता है लेकिन बात यदि ग्रामीण क्षेत्रों की हो तो यह राइडर को बीच में ही छोड़ देता है.

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    नई दिल्ली. दुनिया भर में कई लोग किसी जगह पहुंचने के लिए गूगल मैप का इस्तेमाल और भरोसा करते हैं. देखा यह गया है कि आमतौर पर शहरी क्षेत्रों में मैप सटीक लोकेशन पर पहुंचा देता है लेकिन बात यदि ग्रामीण क्षेत्रों की हो या उन रास्तों की जो इतने लोकप्रिय नहीं. यह राइडर को बीच में ही छोड़ देता है. हाल ही में एक घटना में, राजस्थान के उदयपुर जा रहे पर्यटकों का एक समूह गूगल मैप्स द्वारा गुमराह किए जाने के बाद एक कीचड़ से भरे गांव के एक रास्ते में फंस गया था.

    कार्टोक में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी और उत्तराखंड के पर्यटक ग्रैंड आई10 में यात्रा कर रहे थे, जो एक भी लेन विकसित नहीं होने के चलते कीचड़ में फंस गए. घटना राजस्थान के मेनार के एक गांव की है. समूह नवानिया राजमार्ग पर था जब ऐप ने उन्हें एक वैकल्पिक मार्ग दिखाया. जैसा कि अपेक्षित था, समूह ने वैकल्पिक मार्ग चुना लेकिन वो जहां जाकर खत्म हुआ वहां कीचड़ भरा हुआ था. रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि शुरुआत में सड़क काफी ठीक थी, लेकिन जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते गए और खराब होती गई.

    उस सड़क पर ट्रैक्टर भी बुरी तरह फंस चुका था 
    सड़क इतनी भयानक थी कि कार फिसल रही थी क्योंकि टायरों को घर्षण नहीं मिल रहा था. आखिरकार, यह बस एक लेन की सड़क के कीचड़ वाले इलाके में फंस गई. जिस सड़क पर वे फंस गए, वह इतनी भयानक स्थिति में थी कि इलाके के स्थानीय लोग भी बारिश के समय इसका इस्तेमाल नहीं करते थे. एक ट्रैक्टर जितना बड़ा एक वाहन भी अतीत में उस सड़क पर फंस गया था. कार के फंसने के बाद पर्यटकों ने ट्रैक्टर और रस्सियों के साथ बचाव में आए अपने दोस्तों को बुलाया.

    6 घंटे की मशक्कत के बाद निकल पाई कार
    वे जिस इलाके में फंसे थे, वह इतना सुनसान था कि ट्रैक्टर को मौके पर ले जाने के लिए यात्रियों को दो किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी. उनकी कार दोपहर करीब 1 बजे कीचड़ में फंस गई और इसे शाम 6 बजे तक ही निकाला जा सका. कार रेस्क्यू को पूरा करने में ट्रैक्टर को लगभग दो घंटे लगे.

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