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अब 'ई-वे बिल' से अलग-अलग ट्रांजिट पास की नहीं होगी ज़रुरत

भाषा
Updated: January 14, 2018, 4:16 PM IST
अब 'ई-वे बिल' से अलग-अलग ट्रांजिट पास की नहीं होगी ज़रुरत
31 जनवरी तक की अवधि सभी हितधारकों के लिए परीक्षण अवधि के रूप में उपयोग की जाएगी.
भाषा
Updated: January 14, 2018, 4:16 PM IST
जीएसटी नेटवर्क ने कहा कि फरवरी महीने से ट्रांसपोर्टरों को एक राज्य से दूसरे राज्य में माल लाने और ले जाने के लिए अलग-अलग मार्ग परमिट (ट्रांजिट पास) की जरुरत नहीं होगी बल्कि ई-वे बिल(इलेक्ट्रॉनिक बिल) पूरे देश में मान्य होंगे.

माल और सेवा कर (जीएसटी) के तहत 50,000 रुपये से ज्यादा के माल को एक राज्य के अंदर 10 किलोमीटर से ज़्यादा दूर या एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजने के लिए जीएसटीएन नेटवर्क से इलेक्ट्रानिक परमिट (ई-वे बिल) की जरुरत होगी. जीएसटी एक जुलाई 2017 से लागू है.

जीएसटीएन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) प्रकाश कुमार ने कहा कि ई-वे बिल के लिए करदाताओं और ट्रांसपोर्टरों को किसी कर कार्यालय या फिर चेक पोस्ट पर जाने की जरुरत नहीं क्योंकि उसे खुद नेटवर्क से प्राप्त कर सकते हैं. नए सिस्टम के ज़रिए से पोर्टल, मोबाइल ऐप, मैसेज और ऑफलाइन टूल के ज़रिए ई-वे बिल हासिल करने की सुविधा होगी.

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जीएसटीएन ने बयान में कहा कि ई-वे बिल सिस्टम चार राज्यों- कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड और केरल में शुरू हो चुकी है. ये राज्य कुल मिला कर प्रतिदिन करीब 1.4 लाख ई-वे बिल उत्पन्न कर रहे हैं. शेष राज्य अगले दो हफ्ते इसमें शामिल हो जाएंगे.

31 जनवरी तक की अवधि सभी हितधारकों के लिए परीक्षण अवधि के रूप में उपयोग की जाएगी. इसमें कहा गया है कि ई-वे बिल प्राप्त करने वाले ट्रांसपोर्टरों को ‘ईवेबिल डॉट एनआईसी डॉट इन’ पर जाना होगा और जीएसटीइन देकर खुद को रेजिस्टर करना होगा. जो ट्रांसपोर्टर जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं है उन्हें बिल उत्पन्न करने के लिए पैन या आधार देकर ई-वे बिल सिस्टम के तहत खुद का नामांकन करना होगा.

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