दिल्ली की सड़कों पर अक्टूबर से दौड़ने लगेंगी इलेक्ट्रिक बसें, 300 बसों का ऑर्डर हुआ जारी

केजरीवाल सरकार ने डीटीसी के बेड़े में 300 लो फ्लोर इलेक्ट्रिक एसी बसों को शामिल करने की मंजूरी दे दी.

केजरीवाल सरकार ने डीटीसी के बेड़े में 300 लो फ्लोर इलेक्ट्रिक एसी बसों को शामिल करने की मंजूरी दे दी.

Electric Buses: केजरीवाल सरकार ने डीटीसी (DTC) के बेड़े में 300 लो फ्लोर इलेक्ट्रिक एसी बसों (300 Low Floor Electric Buses) को शामिल करने की मंजूरी दे दी. 118 बसों की पहली खेप अक्टूबर 2021 में आएगी और नवंबर में 100 बसें आएंगी, जबकि दिसंबर में 60 और बसें आ जाएंगी और शेष 20 बसें जनवरी 2022 तक मिलने की संभावना है.

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  • Last Updated: March 26, 2021, 8:35 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) ने शुक्रवार को डीटीसी (DTC) के बेड़े में 300 लो फ्लोर इलेक्ट्रिक एसी बसों (300 Low Floor Electric Buses) को शामिल करने की मंजूरी दे दी. 118 बसों की पहली खेप अक्टूबर 2021 में आएगी और नवंबर में 100 बसें आएंगी, जबकि दिसंबर में 60 और बसें आ जाएंगी और शेष 20 बसें जनवरी 2022 तक मिलने की संभावना है. सीएम अरविंद केजरीवाल के नेतृत्ववाली दिल्ली कैबिनेट ने शुक्रवार को इलेक्ट्रिक वातानुकूलित 300 लो फ्लोर बसों को दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. नई लो फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें स्टेट ऑफ द आर्ट सुविधाओं जैसे रियल-टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, सीसीटीवी, पैनिक बटन, जीपीएस से लैस होंगी. साथ ही विकलांग यात्रियों की सुविधाओं का भी इन बसों में खास ध्यान रखा गया है.

300 इलेक्ट्रिक बसें पहली बार डीटीसी के बेडे में शामिल होगा

बता दें कि यह भारत सरकार की ‘फास्ट एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया (फेम) फेज-2’ योजना का हिस्सा है. दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि केजरीवाल सरकार टिकाऊ और अत्याधुनिक सुविधाओं को सुनिश्चित करने और गैर-प्रदूषणकारी इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने के लिए कई उपाय कर रहे हैं. वास्तव में इलेक्ट्रिक बसों को पहली बार दिल्ली में डीटीसी के बेडे में शामिल किया जा रहा है और यह किसी भी राज्य सरकार या राज्य परिवहन उपक्रम द्वारा इलेक्ट्रिक बसों की सबसे बड़ी तैनाती है. जल्द ही हमारे पास दिल्ली की सड़कों पर चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें होंगी.

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डीटीसी द्वारा अक्टूबर 2019 में जारी पहले टेंडर को सही नहीं पाया गया था.

तीन बार जारी हुआ टेंडर

डीटीसी द्वारा अक्टूबर 2019 में जारी पहले टेंडर को सही नहीं पाया गया था, इसलिए प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी. जून 2020 में जारी दूसरे टेंडर को भी रद्द कर दिया गया था, क्योंकि दरें प्रतिस्पर्धी नहीं पाई गई थीं. तीसरी बार दिसंबर 2020 में टेंडर जारी गया था, जिसे सही और प्रतिस्पर्धी पाया गया था.

किस कंपनी ने कितनी बोली लगाई



बता दें कि अभी तक डीटीसी केवल अपने स्वामित्व वाली बसों का संचालन करता रहा है. बिजली से चलने वाली बसों को पहली बार डीटीसी के बेड़े में शामिल किया जा रहा है. एक साथ डीटीसी द्वारा 300 इलेक्ट्रिक बसों को बेड़े में शामिल करना किसी भी राज्य सरकार या राज्य परिवहन उपक्रम (एसटीयू) द्वारा इलेक्ट्रिक बसों की सबसे बड़ी संख्या है. सबसे कम बोली लगाने वाले मेसर्स जेबीएम हैं, जिसकी बोली 68.58 रुपए प्रति किमी है. दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी मेसर्स टाटा मोटर्स है, जिसने मेसर्स जेबीएम द्वारा दी गई दर से मिलान करने पर सहमति जताई है. टेंडर की शर्तों के अनुसार मेसर्स जेबीएम 200 बसों का संचालन करेगी, जबकि 100 बसों का संचालन मेसर्स टाटा मोटर्स द्वारा किया जाएगा.

बिहार में इलेक्ट्रिक बस सेवा
एक बार पूरा चार्ज होने के बाद बसों का कम से कम 140 किमी तक संचालन हो सकेगा. (फाइल फोटो)


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एक बार चार्ज होने पर इतने किलोमीटर चलेगा

एक बार पूरा चार्ज होने के बाद बसों का कम से कम 140 किमी तक संचालन हो सकेगा. ऑपरेटर चालक प्रदान करेगा और डीटीसी बसों में अपना कंडक्टर तैनात करेगा. ऑपरेटर 10 साल तक बसों या बैटरी के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा. आपरेटर समय पर बैटरी बदलने के लिए बाध्य होगा, जो समान्य रूप से 5 साल बाद बदली जाती है. इन बसों के संचालन के लिए बिजली की खपत का खर्च डीटीसी द्वारा वास्तविक बसों पर 14 किलोवाट/किमी तक वहन किया जाएगा. हालांकि, 14 किलोवाट प्रति किमी से अधिक की दक्षता के लिए बिजली की अधिक खपत की राशि वार्षिक खपत के आधार पर ऑपरेटर से वसूल की जाएगी.
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