हाइपरलूप में पहली बार इंसान ने किया ट्रैवल, जानिए कैसा रहा उनका अनुभव

Photo: Twitter/ @virginhyperloop
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वर्जिन हाइपरलूप (Virgin Hyperloop) ने इंसानों के साथ हाइपरलूप की टेस्टिंग की है. यह दुनिया की पहली टेस्टिंग है. टेस्टिंग के दौरान हाइपरलूप की स्पीड 160 किलोमीटर रही.

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  • Last Updated: November 9, 2020, 1:52 PM IST
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नई दिल्ली. अरबपति रिचर्ड ब्रैन्सन (Richard Branson) की वर्जिन हाइपरलूप (Virgin Hyperloop) की पहली मानव टेस्टिंग पूरी हो चुकी है. बीते रविवार को पहली बार ऐसा हुआ कि हाइपरलूप में दो इंसानों ने 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा की. इसके साथ ही वर्जिन हाइपरलूप इस टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग करने वाली दुनिया की इकलौती कंपनी बन गई है. इस टेस्टिंग में जिन दो लोगों ने हिस्सा लिया है, वो कंपनी के सीटीओ जोश गिगल (Josh Geigel) और पैसेंजर एक्सपिरिएंस निदेशक सारा लुचियान (Sara Luchian) हैं.

400 मानवरहित टेस्टिंग करने के बाद हुई ये टेस्टिंग
इस हाइपरलूप की टेस्टिंग अमेरिका के नेवादा (Nevada, USA) प्रांत में वर्जिन हाइपरलूप के डेवलप टेस्ट ट्रैक (DevLoop Test Track) पर हुई. यह 5 मीटर लंबी और 3.3 मीटर चौड़ी है. कंपनी का दावा है कि इस टेस्टिंग के पहले भी उसने इस ट्रैक पर करीब 400 से ज्यादा टेस्टिंग की हैं. इसके बाद इंसानों के लिए इस टेस्टिंग को करने का फैसला लिया गया.

टेस्टिंग के लिए दोनों इंसानों को एक पॉड में बिठाया गया. फिर इस पॉड को ट्रैक पर लाया गया. इसकी रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई. यह पॉड 28 सीटर एक्सपी-2 पेगसस (XP-2 Pegasus) का छोटा वर्जन है. भविष्य में कंपनी इसे ही लॉन्च करने की योजना बना रही है.
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क्या होता है हाइपरलूप?
हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन का एक नया तरीका है. माना जा रहा है कि अब तक मौजूद सभी ट्रांसपोर्टेशन के तरीकों से तेज होगा. इस तकनीक की सबसे खास बात है कि पर्यावरण पर इसका खास प्रभाव भी नहीं पड़ेगा. वर्जिन हाइपरलूप को साल 2014 में पहली बार शुरू किया गया था.

इलॉन मस्क के 'अल्फा पेपर' में इसे पांचवें ट्रांसपोर्टेशन मोड (5th Mode of Transportation) का नाम दिया गया है. इसके जरिए इंसान व कार्गो, दोनों के ट्रांसपोर्टेशन की तैयारी है. माना जा रहा है कि साल 2040 तक पूरी दुनिया में कार, ट्रक और यहां तक की प्लेन्स की संख्या दोगुनी हो जाएगी. ऐसे में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है.
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