आप भी सेकंड हैंड कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो जान लीजिये क्या है फायदे और नुकसान

सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले इस खबर को जरूर पढ़ें.

सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले इस खबर को जरूर पढ़ें.

सेकंड हैंड कार लेना एक बेहतर सौदा हो सकता है. कार सीखते वक़्त उसमे हुए डेंट,स्क्रैच और छोटे एक्सीडेंट की वजह से हुए नुक्सान से आपको उतना दुःख नहीं होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2021, 2:34 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय ग्राहकों में नई और सेकंड हैंड कार को खरीदने का चलन काफी समय से है. जो ग्राहक अपने बजट के अनुसार नई कार नहीं ले सकते वो पुरानी सेकंड हैंड कार ले लेते हैं. अक्सर ग्राहक सेकंड हैंड कार खरीदते वक़्त हिचकिचाते हैं और सही से कार का चुनाव नहीं कर पाते. ग्राहक को सेकंड हैंड कार समझदारी और परख के साथ लेनी चाहिए क्यूंकि इसे लेने में फायदे के साथ नुक्सान का भी सामना भी करना पड़ सकता है. आईये आपको बतातें हैं ऐसे ही कुछ फायदे और नुक्सान के बारे में.

फायदे

अगर आपको ड्राइविंग नहीं आती और आप कार सीख रहे हैं तो सेकंड हैंड कार लेना एक बेहतर सौदा हो सकता है. कार सीखते वक़्त उसमे हुए डेंट,स्क्रैच और छोटे एक्सीडेंट की वजह से हुए नुक्सान से आपको उतना दुःख नहीं होगा. अगर आप सेकंड हैंड कार का चुनाव करते हैं तो इसमें आपके पैसे की बचत के साथ साथ आपको कार की resale वैल्यू भी अच्छी मिलती है. अक्सर ये देखा गया है की किसी नई कार की कीमत बहुत जल्दी ही कम होने लगती है, जो कई बार 60 प्रतिशत से भी कम हो जाती है.

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जबकि सेकंड हैंड कार्स में ऐसा देखने को नहीं मिलता. सेकंड हैंड कार यूज़र कार को अच्छे दाम में दुबारा बेच सकते हैं. सेकडं हैंड कार की कीमत समय के अनुसार बनी रहती है. सेकंड हैंड कार लेते वक़्त कई बार कार की अच्छी डील आपको मिल जाती है. साथ ही सेकडं हैंड कार में इन्शुरन्स की रकम भी कम देनी पड़ती है और कार लेते वक़्त लगने वाले रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स औरअन्य आरटीओ टैक्स से भी राहत मिलती है.

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नुकसान



पुरानी कार लेते वक़्त अगर आप कार को लोन पर लेते हैं तो नई कार के मुकाबले पुरानी कार पर ज्यादा EMI देनी पड़ती है. नई कार में जीरो पर्सेंट लोन्स और फाइनेंस जैसे विकल्प मिल जाते हैं जबकि सेकंड हैंड कार में इस तरह की अच्छी स्कीम नहीं मिलती. अक्सर देखने में आता है की ग्राहक सेकंड हैंड कार लेते वक़्त कार के इंजन, ट्रांसमिशन या और भी अन्य जरूरी पार्ट्स सही से चेक नहीं करते और बाद में बार बार कार को रिपेयर करते रहते हैं. ऐसा करने से आपका खर्च बढ़ जाता है जो आपको नुक्सान में डाल सकता है.
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