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जानिए क्या है टायर फ्यूल एफिशिएंसी रेटिंग, कैसे करेगी काम?

टायर फ्यूल एफिशेंसी रेटिंग

टायर फ्यूल एफिशेंसी रेटिंग

ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी ने टायरों के लिए स्टार लेबलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया है. इसके तहत टायरों को उनके रोलिंग रेसिस्टेट परफोर्मेंस के आधार पर एक स्टार स्कोर दिया जाएगा.

नई दिल्ली. ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी ने टायरों के लिए स्टार लेबलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया है. इसके तहत आपको AC और रेफ्रिजरेटर की तरह अब टायरों पर रेटिंग दिखाई देगी. टायर पर रेटिंग इसके रोलिंग रेसिस्टेंट और इसकी फ्यूल एफिशेंसी पॉटेन्शल को इंडिकेट करती है. दिसंबर में शुरू की गई इस योजना के तहत मिशेलिन ने हाल ही में यात्री कार टायर कैटेगरी में भारत की पहली 5-स्टार रेटिंग हासिल की है.

बता दें कि एक 5 स्‍टार टायर अपने से कम स्टार वाले टायर की तुलना में 9.5% कम ईंधन की खपत करता है, जिससे ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन भी कम होता है, जो वैश्विक ताप का एक महत्वपूर्ण कारण है. जब आप 5-स्‍टार से कम रेटिंग वाले टायर की जगह 5-स्‍टार टायर लेते हैं, तब औसतन 750 किलोग्राम Co2 का कम उत्‍सर्जन होगा. चूंकि दुनियाभर में ईंधन के दाम अस्थिर रहते हैं, इसलिये उपभोक्‍ता 5-स्टार रेटेड टायर को चुनकर अच्‍छा-खासा पैसा भी बचा सकते हैं.

क्या है रेटिंग सिस्टम और कैसे करता है?
भारत में बेचे जाने वाले सभी टायर ब्रांड जो रेग्यूलेटरी स्टेंडर्ड को पूरा करते हैं, वह रेटिंग लेबल के लिए आवेदन कर सकते हैं. टेस्टिंग के बाद मॉडलों को उनके रोलिंग रेसिस्टेट परफोर्मेंस के आधार पर एक स्टार स्कोर मिलेगा. यह लेबल घरेलू एप्लायंस पर लगाए जाने वाले लेबल की तरह होगा. टायरों को परफोर्मेंस के आधार पर रोलिंग रेसिस्टेंट कोअफिशन्ट आधार पर स्टार रेटिंग दी जाएगी.

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टायर के साइडवॉल पर चिपकाया जाएगा लेबल
एक लॉअर रोलिंग रेसिस्टेंट कोअफिशन्ट एक हाई स्टार रेटिंग को आकर्षित करेगा, जो ईंधन बचत और कम उत्सर्जन को बढ़ाएगा. लेबल पर टायर के चलने के पैटर्न, ब्रांड, मॉडल, वर्ष, साइज और क्लास जैसी अन्य जानकारी भी दी जाएगी और इसे टायर के साइडवॉल पर चिपकाया जाएगा. सिस्टम इस साल के अंत तक लागू है और यह फ्यूल एफिशेंएसी ब्यूरो के वॉलन्टरी एप्लायंस कैटेगरी के अंतर्गत आता है. हालांकि, समय के साथ इसे अनिवार्य बनाने की उम्मीद है.

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क्या है नियम
नए नियमों के अनुसार भारत में बिकने वाले सभी टायरों को प्रदर्शन और सुरक्षा के महत्वपूर्ण मानकों जैसे रोलिंग रेसिस्‍टेन्‍स और वेट ग्रिप को पूरा करना होगा, जब यह रेगुलेशन अनिवार्य हो जाएगा, तब ट्रक, बस और पैसेंजर कार टायरों के सभी घरेलू और विदेशी निर्माताओं और आयातकों को भारत में बेचे जाने वाले टायरों पर BEE स्‍टार लेबल लगाना होगा.

Tags: Car, Tyre Bursts

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