मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- वाहनों में एल्कोहल सेंसिंग सिस्टम ​अनिवार्य करे सरकार

नशे में धूत होकर ड्रइविंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे सरकार
नशे में धूत होकर ड्रइविंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे सरकार

मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा है कि वो ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों को वाहनों में 'एल्कोहल सेन्सिंग इ​ग्निशन इंटरलॉकिंग'​ सिस्टम को इंस्टॉल करना अनिवार्य करे.

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  • Last Updated: March 14, 2020, 3:39 PM IST
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नई दिल्ली. मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा है कि वो ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों को वाहनों में 'एल्कोहल सेन्सिंग इ​ग्निशन इंटरलॉकिंग'​ सिस्टम को इंस्टॉल करना अनिवार्य करे. इस खास सिस्टम को वाहनों में इंस्टॉल करने के बाद अगर ड्राइवर शराब के नशे में होगा तो वाहन स्टार्ट ही नहीं होगा.

मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव करे सरकार
मद्रास हाईकोर्ट में दो जज की बेंच ने यह बात की है. जस्टिस एन किरुकरन और अब्दुल कुद्धोस ने कहा कि नशे में वाहन चलाने पर रोकभाम लगाने के लिए ऐसे कदम उठाने जरूरी हैं. इसके लिए सरकार को भारतीय दंड संहिता और मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन करे. दोनों जजों के बेंच ने कहा, 'हर दिन इससे कई लोगों की जान जाती है.'

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राज्य सरकार करे सख्त कार्रवाई


दरअसल, कोर्ट में एक दायर किया गया था जिसमें एक्सीडेंट की वजह एक व्यक्ति ने हर्जाने की मांग की थी. इस व्यक्ति को एक्सीडेंट में चोट लगने की वजह से पैरालिसिस हो गया था. कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वो नशे में धूत होकर वाहन चालने वाले लोगों पर सख्ती से कार्रवाई करे. अगर जरूरत पड़े तो उन्हें गिरफ्तार करके उनकी वाहन को भी जब्त करें और उनका ड्राइविंग लाइसें भी जब्त करे.

दोनों जजों ने यह भी कहा शराब की आसान उपलब्धता ने भी नशे में धूत होकर वाहन चलाने के मामले में बढ़ते जा रहे हैं.

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कोर्ट अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता
कोर्ट ने कहा कि जहां हर रोज इस तरह से एक्सीडेंट होने की वजह से कई लोगों की जान जाती है, वहां कोर्ट इस तरह मूक दर्शक नहीं बन सकता है. इस तरह की परिस्थिति को देखते हुए अगर कोर्ट अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ता है तो यह आम लोगों के साथ अन्याय होगा.

कोर्ट में इस बात पर को भी विशेष तौर पर रेखांकित किया कि तमिलानाडु में 6.8 करोड़ लोगों में 70 लाख लोग हर रोज शराब का सेवन करते हैं. राज्य की कुल कमाई में ​यह हिस्सा 35 फीसदी है.

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