अब ड्राइविंग के तरीके से तय होगा इंश्योरेंस प्रीमियम, आने वाला है नया नियम

अब ड्राइविंग के तरीके से तय होगा इंश्योरेंस प्रीमियम, आने वाला है नया नियम
नए नियम को लागू करने के लिए इंश्योरेंस रेग्युलेटर IRDA ने नौ सदस्यों की कमेटी गठित कर दी है ताकि इस फ्रेमवर्क को लागू किया जा सके.

नए नियम को लागू करने के लिए इंश्योरेंस रेग्युलेटर IRDA ने नौ सदस्यों की कमेटी गठित कर दी है ताकि इस फ्रेमवर्क को लागू किया जा सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 9, 2019, 11:36 AM IST
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अब आपके वाहन चलाने के तरीके पर निर्भर करेगा कि इंश्योरेंस कंपनी आप पर कितना प्रीमियम लगाएगी. इसके लिए इंश्योरेंस रेग्युलेटर IRDA ने नौ सदस्यों की कमेटी गठित की है ताकि इस फ्रेमवर्क को लागू किया जा सके. कमेटी से दो महीने के भीतर रिपोर्ट सबमिट करने को कहा गया है.

गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी की सिफारिशों के बाद इस कमेटी का गठन हुआ है. यह कमेटी दिल्ली में ट्रैफिक नियमों की जांच कर रही थी. सूत्रों के अनुसार आईआरडीए पैनल से कहा गया है कि वह ऐसे नियम लेकर आए जिससे तुरंत पायलेट प्रोजेक्ट को लागू किया जा सके.

इसके बारे में कई वर्षों से चर्चा हो रही थी, लेकिन यह पहली बार है जब इस तरह का कदम उठाया गया है. हालांकि पश्चिमी देशों में इसे लागू किया जा चुका है. पूरी दुनिया में यह बात साबित हो चुकी है कि 70 फीसदी दुर्घटनाएं ड्राइवरों के गलत तरीके से वाहन चलाने के कारण होती है.



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पैनल से कहा गया है कि वह राज्यों में लागू इस वक्त के ट्रैफिक नियमों का मूल्यांकन करे और उसमें सुधार के लिए अपेक्षित सुझाव दे. यह पैनल डेटा जुटाएगा ताकि इस दिशा में उचित कदम उठाया जा सके. यह पैनल डेटा जुटाकर वाहन के ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की पूरी हिस्ट्री को इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया (IIBI) को ट्रांसफर करेगा.

इस वक्त इंश्योरेंस प्रीमियम इस बात पर निर्भर करता है कि आपका वाहन कौन सा है और उसकी क्षमता कितनी है. 2017-18 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक कुल कलेक्ट किए गए गैर-लाइफ इंश्योरेंस का 30 फीसदी है.

सरकारी सूत्रों के अनुसार इंश्योरेंस कंपनियों को सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बड़ी भूमिका निभानी पड़ेगी. सरकार ने इंश्योरेंस कंपनियों के ज़रिए मुआवज़े की राशि को दुर्घटना में मौत होने पर 10 लाख और गंभीर चोट आने पर 5 लाख कर दिया है. ऐसी स्थिति में अगर दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी तो कुल दिया जाने वाला मुआवज़ा भी कम हो जाएगा.

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