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कार और बाइक के लिए भी अब देना होगा नॉमिनी! जानिए नए नियम के बारे में

मृत्यु जैसी स्थिति के बाद नॉमिनी को इसकी सूचना स्थानीय आरटीओ में 30 दिन के अंदर देनी होगी

अब तक यह प्रक्रिया बेहद परेशान करने वाली थी क्योंकि परिवार के सदस्य को कानूनी उत्तराधिकारी के नाम पर स्वामित्व ट्रांसफर करवाना पड़ता है जिसके लिए कई कार्यालयों में चक्कर भी लगाने पड़ते थे.

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    नई दिल्ली. जिस तरह से इंश्योरेंस पॉलिसी (Insurance policy) या बैंक में खातों (Bank account) में नॉमिनी (Nominee) का नाम देना अनिवार्य होता है जिससे व्यक्ति की मौत (Death) के बाद उसके परिजनों को पैसा ट्रांसफर किया जा सके ठीक उसी तरह आने वाले दिनों में कार और बाइक के रजिस्ट्रेशन (Vehicle Registration) के समय भी नॉमिनी का उल्लेख करना अनिवार्य होने वाला है. सड़क और परिवहन मंत्रालय ने (The Ministry of Road Transport and Highways) ने इसके लिए हाल ही में केंद्रीय मोटर अधिनियम 1989 (Central Motor Vehicles Rules, 1989.)में बदलाव किए है. जिसके बाद अब वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में अपनी नॉमिनी जोड़ने होना जिससे व्यक्ति की मौत के बाद ओनरशिप ट्रांसफर (owner Transfer) में वाहन नॉमिनी के नाम किया जा सके. अब तक यह प्रक्रिया बेहद परेशान करने वाली थी क्योंकि परिवार के सदस्य को कानूनी उत्तराधिकारी के नाम पर स्वामित्व ट्रांसफर करवाना पड़ता है जिसके लिए कई कार्यालयों में चक्कर भी लगाने पड़ते थे.


    वाहन स्वामी को नॉमिनी के बारे में साफ करना होगा जब वो कार खरीदे या फिर कार खरीद चुका हो तो उस स्थिति में इसके बाद में. इसके लिए उसे नॉमिनी के नाम के साथ उसकी पहचान के दस्तावेज भी लगाने होंगे. जिसके बाद मृत्यु जैसी स्थिति के बाद नॉमिनी को इसकी सूचना स्थानीय आरटीओ में 30 दिन के अंदर देनी होगी. नॉमिनी को इसके साथ फॉर्म 31 भी मौत के तीन महीने के अंदर देना होगा जिससे वाहन की ओनरशिप उनके नाम पर हो सके. 


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    हटाया भी जा सकता है नॉमिनी


    ऐसा नहीं है कि आप जिस व्यक्ति को नॉमिनी बना रहे है वह हमेशा के लिए ही नॉमिनी रहेगा. आप चाहे तो किसी विशेष स्थिति में मसलन यदि आपने हसबैंड या वाइफ को नॉमिनी बनाया है और दोनों का तलाक हो रहा है या हो गया है तो आप इस स्थिति में नॉमिनी हटा या बदल सकते है. ठीक इसी तरह यदि संपत्ति में बंटवारा हो रहा तब भी लेकिन तब नहीं जब आप वाहन को बेच रहे हो.  


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    यदि कार लोन पर हो तो, तब क्या 


    यदि जिस व्यक्ति की मौत हुई है और उसने वाहन लोन पर लिया हो तो ऐसी स्थिति में उसे लोन ली गई बैंक या संस्था को लोन चुकाना होगा, उसके बाद ही वाहन उसके नाम पर ट्रांसफर हो सकेगा. क्योंकि इसके बाद ही बैंक एनओसी यानि नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी करेगी जो आरटीओ में ओनरशिप ट्रांसफर के लिए जरूरी होगा. 

    Published by:Amit Deshmukh
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