ईवी ही नहीं, सेल भी बनाएगी ओला, देश में पहली बार ऐसा होगा

लीथियम आयन बैटरी का खर्च ई-स्कूटर की कुल लागत का 35-40 प्रतिशत होता है.

लीथियम आयन बैटरी का खर्च ई-स्कूटर की कुल लागत का 35-40 प्रतिशत होता है.

ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) सेल विनिर्माण फैक्ट्री स्थापित करने की योजना बना रही है. अगर ऐसा होता है तो वह पहली भारतीय कंपनी होगी. अभी सेल का आयात होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 6:30 PM IST
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नई दिल्ली. देश में सस्ती इलेक्ट्रिक गाड़िया (EV, ईवी) का विनिर्माण (Manufacturing) करने के लिए कई कंपनियां कोशिश कर रही हैं. इन्हीं में से एक ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) अपनी लीथियम आयन बैटरी (Lithium Ion Batteries)  के लिए सेल विनिर्माण फैक्ट्री स्थापित करने की योजना बना रही है. अगर ऐसा होता है तो वह पहली भारतीय कंपनी होगी. अभी बैटरी के लिए सभी सेल का आयात होता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक लीथियम आयन बैटरी का खर्च ई-स्कूटर की कुल लागत का 35-40 प्रतिशत होगा और बैटरी में सेल की लागत करीब 70 प्रतिशत होती है. लिहाजा, ओला बैटरियों का विनिर्माण बेंगलूरु में प्रस्तावित आगामी एकीकृत संयंत्र में करेगी. बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक शुरुआत में ओला लीथियम आयन बैटरी के लिए सेल का आयात दक्षिण कोरिया से करेगी, जिसका इस्तेमाल उसके जल्द आने वाले ई-स्कूटर मेंं होगा. ओला इलेक्ट्रिक नेतृत्त्व टीम के एक वरिष्ठ सदस्य ने बिजनेस स्टैंडर्ड इस फैसले की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, 'हां, हम सेल का उत्पादन करेंगे. बैटरियों का विनिर्माण हमारी प्रस्तावित इन हाउस फैक्टरी में होगा.

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चीन, जापान और दक्षिण कोरिया का है राज
वैश्विक सेल उत्पादन में दक्षिण कोरिया, चीन और जापान की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत है. सेल बनाने वाली प्रमुख कंपनियों में एलजी केमिकल्स, पैनासोनिक, बीवाईडी, सैमसंग व अन्य शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर बैटरियां भी बनाती हैं. तमाम कंपनियां लीथियम आयन बैटरियां असेंबल करती हैं, जिनमें स्कूटर बनाने वाली एथर एनर्जी और सुजूकी, तोशिबा और देंत्सू का संयुक्त उपक्रम शामिल हैं. अन्य कंपनियों में एक्साइड, सन मोबिलिटी, एक्सीकॉम और ओकाया प्रमुख हैं.

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महिंद्रा ऐंड महिंद्रा भी कर चुकी है ऐलान



सेल बनाने के क्षेत्र में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने घोषणा की थी कि वह भारतीय बाजार के लिए खास सेल बनाने के लिए एलजी केमिकल्स के साथ समझौता कर रही है. गौरतलब है कि भारत में सेल का विनिर्माण सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रमुख हिस्सा है. संभावित सेल विनिर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए पहले ही उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) की घोषणा की जा चुकी है. सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की उल्लेखनीय बचत होगी और साथ ही इससे बैटरी की कीमत कम होगी.

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24 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है कंपनी

कंपनी संयंत्र स्थापित करने मेंं 2,400 करोड़ रुपए निवेश कर रही है. पहले चरण में (जून 2021) वह 20 लाख दोपहिया बनाने की क्षमता तैयार करेगी. अगले साल से यह आंकड़ा बढ़ाकर 1 लाख किया जाएगा.
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