ऑटो इंडस्ट्री के आंकड़ों पर राजीव बजाज का बड़ा बयान कहा- संकट में रिटेल सेल, ऑटो सेक्टर का अभी भी मदद की जरूरत

ऑटो इंडस्ट्री के आंकड़ों पर राजीव बजाज का बड़ा बयान कहा- संकट में रिटेल सेल
ऑटो इंडस्ट्री के आंकड़ों पर राजीव बजाज का बड़ा बयान कहा- संकट में रिटेल सेल

फेस्टिव सीजन के कारण वाहनों की बिक्री बढ़ी है. जिसके बाद ये कहा जा रहा है कि लॉकडाउन के बाद अब इकॉनोमिक रिवाइवल शुरू हो गया है. वहीं इस बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि ऑटोमोबाइल्स की सेल को पटरी पर लौटने में अभी इंतजार करना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 8:35 PM IST
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नई दिल्ली. फेस्टिव सीजन के कारण वाहनों की बिक्री बढ़ी है. जिसके बाद ये कहा जा रहा है कि लॉकडाउन के बाद अब इकॉनोमिक रिवाइवल शुरू हो गया है. वहीं इस बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि ऑटोमोबाइल्स की सेल को पटरी पर लौटने में अभी इंतजार करना होगा. राजीव बजाज ने कहा कि अप्रैल-जून में नाम मात्र वाहनों की बिक्री हुई. खासकर टू-व्हीलर की बिक्री नहीं हुई. अब धीरे-धीरे टू-व्हीलर की मांग बढ़ रही है. लेकिन अभी के हालात को पिछले साल से तुलना नहीं कर सकते. जुलाई से अगले साल के मार्च के तक आंकड़े को देखना होगा, तब तस्वीर साफ हो पाएगी.

फेस्टिव सीजन के महीने से पूरे साल की तुलना नहीं की जा सकती
उन्होंने कहा कि अभी फेस्टिव सीजन हैं और कुछ लोग टू-व्हीलर खरीद रहे हैं. इनमें से कुछ लोग ऐसे होते हैं जो फेस्टिव सीजन में खरीदारी का इंतजार महीनों से करते हैं. ऐसे में फेस्टिव सीजन के महीने से पूरे साल की तुलना नहीं की जा सकती है, अभी हमें इंतजार करना होगा. बजाज ऑटो के एमडी की मानें तो कोरोना संकट की वजह टू-व्हीलर इंडस्ट्रीज पर गहरा असर पड़ा है. लेकिन उस हिसाब से सरकारी मदद नहीं मिल पाई. उन्होंने कहा कि इस महामारी की चपेट में पूरी दुनिया आई है.

टू-व्हीलर इंडस्ट्रीज को फिर से खड़ा करने की कोशिश
उन्होंने कहा कि टू-व्हीलर इंडस्ट्रीज को फिर से खड़ा करने की कोशिश की जा रही है. क्योंकि लॉकडाउन में सप्लाई चेन बाधित हुआ, उसके बाद चीन के साथ विवाद का कारोबार पर असर दिखा. क्योंकि टू-व्हीलर के टायर्स चीन से मंगाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऑटो इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा टू-व्हीलर की बिक्री पर ही असर पड़ा है. ग्रामीण इलाकों में डिमांड बढ़ी है, ये कहना अभी जल्दबाजी होगी. जब हम पिछले साल के आंकड़ों को देखते हैं तो साफ पता चलता है कि रिटेल बिक्री अभी भी संकट में है.
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