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Vehicle Scrappage Policy : आपके पुराने वाहन पर कैसे होगा स्क्रैपिंग पॉलिसी का असर? जानिए यहां सब कुछ

देश में लागू होने वाली है स्क्रैपिंग पॉलिसी.

Scraping Policy को सरकार स्वैच्छिक आधार पर लागू करने जा रही है. इस पॉलिसी के हिसाब से पुराने और अनफिट वाहनों को चरणबद्ध तरीके से फेस आउट किया जाएगा. आपको बता दें यदि आपका वाहन 15 से 20 साल पुराना है तो आपको हर 6 महीने पर वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा.

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    नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में पुराने वाहनों के लिए Scrappage Policy की घोषणा की है. इसका सीधा असर पुराने वाहन के स्वामियों पर पड़ने वाला है. वहीं Scrappage Policy की घोषणा के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, अगले 15 दिनों के भीतर स्क्रेपेज पॉलिसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा. ऐसे में जिन लोगों के पास पुराने वाहन हैं उनके मन में कई सवाल उठ रहे हैं. इसलिए हम आपकी सभी शंकाओं को खत्म करने के लिए Scrappage Policy की डिटेल बताने जा रहे है. जिससे आपके मन में कोई सवाल बाकी न रह जाए.  आइए जानते है Scrappage Policy के बारे में...

    पहले जानें क्या है नई स्क्रैपिंग पॉलिसी- इस पॉलिसी को सरकार स्वैच्छिक आधार पर लागू करने जा रही है. इस पॉलिसी के हिसाब से पुराने और अनफिट वाहनों को चरणबद्ध तरीके से फेस आउट किया जाएगा. आपको बता दें यदि आपका वाहन 15 से 20 साल पुराना है तो आपको हर 6 महीने पर वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा.

    किन वाहनों को लेना होगा फिटनेस सर्टिफिकेट- इस स्क्रैपिंग पॉलिसी के तहत देश में चलने वाले वाहनों को एक तय समय के अनुसार फिटनेस टेस्ट करवाना होगा. इसके अनुसार पर्सनल व्हीकल्स को 20 साल के बाद और कमर्शियल व्हीकल्स को 15 साल के बाद फिटनेस टेस्ट कराना होगा. पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट ऑटोमेटेड सेंटर्स में किया जाएगा, जिसका निर्माण सरकार जल्द ही करेगी. इन सेंटर्स पर वाहनों का फिटनेस टेस्ट होगा जहां उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाएगा. इसके साथ ही यदि आपका वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल होता है तो आपको अपने वाहन को कबाड़ में भेजना होगा. रिपोर्ट्स के अनुसार फिटनेस टेस्ट के लिए तकरीबन 40,000 रुपये तक का खर्च आएगा, जो कि रोड टैक्स और ग्रीन टैक्स के अलावा होगा.

    ग्रीन टैक्स को समझिए- यदि आपका वाहन 8 साल से ज्यादा पुराना है तो सरकार आपसे ग्रीन टैक्स वसूल सकती है. ये टैक्स वाहन के फिटनेस सर्टिफिकेट के रेनुअल के समय रोड टैक्स के 10 से 25 प्रतिशत की दर से लिया जा सकता है. आपको बता दें अभी इस प्रस्ताव को परिवहन मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद राज्यों के पास परामर्श के लिए भेजा जाएगा. जिसके बाद ही सरकार इसकी दरों पर फैसला करेगी. वहीं सरकार ने साफ किया है कि ग्रीन टैक्स से हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक, सीएनजी, इथेनॉल और एलपीजी वाहन पूरी तरह मुक्त रहेंगे.

    50 हजार नौकरियों के सृजन का दावा- सरकार का दावा है कि इस नई स्क्रैपिंग पॉलिसी को लागू किए जाने के बाद देश में नए वाहनों की बिक्री में इजाफा होगा. इसके साथ ही देश का ऑटोमोबाइल कारोबार 4.5 लाख करोड़ से बढ़कर 6 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा. इस पॉलिसी से 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा और तकरीबन 50 हजार नई नौकरियों के सृजन का दावा सरकार द्वारा किया जा रहा है.

    प्रदूषण पर लगेगी लगाम- एक रिपोर्ट के अनुसार इस समय देश में तकरीबन 1 करोड़ ऐसे वाहन हैं जो पुराने हो चुके हैं और ज्यादा प्रदूषण फैला रहे हैं. यह पुराने वाहन तकरीबन 10 से 12 गुना ज्यादा प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं. यह गाड़ियां यदि सड़कों से हट जाती हैं तो 25 से 30 फीसदी तक प्रदूषण कम हो जाएगा. आईआईटी के अध्ययन के मुताबिक 70 प्रतिशत वाहनों के चलते प्रदूषण होता है और पुराने वाहन सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण करते हैं, इसलिए इन्हें स्क्रैप में भेजना उचित होगा.

    गाड़ी को स्क्रैप में भेजने पर मिलेगा इंसेंटिव- 1 अप्रैल, 2022 से लागू होने वाली इस नीति के साथ सरकार प्रोत्साहन राशि यानी कि इंसेंटिव भी देने का प्रावधान कर रही है. हालांकि यह वाहनों की उम्र और स्थिति पर निर्भर करेगा कि, किस वाहन के लिए कितना इंसेंटिव दिया जाएगा. फिलहाल वाहनों के लिए दिए जाने वाले इंसेंटिव के बारे में सरकार विचार कर रही है और जल्द ही इसके बारे में मंत्रालय द्वारा घोषणा की जाएगी. वहीं Scrappage Policy पर सरकार नई गाइडलाइंन जारी करने वाली है. जिसमें इन नियमों के अलावा कुछ और नियम जुड़ सकते है. इसके साथ ही इन नियमों में भी बदलाव हो सकता है.
    Published by:Kanhaiya Pachauri
    First published: