कार स्टार्ट करते ही डैशबोर्ड पर दिखाई दें ये तीन वॉर्निंग लाइट्स, तो बिल्कुल भी न चालाए गाड़ी

कार के डैशबोर्ड पर वॉर्निंग लाइट्स जले तो साधावान हो जाइए.

कार कंपनियां यूजर्स की सहूलियत के लिए कार के डैशबोर्ड पर वॉर्निंग लाइट्स (Warning Lights) देने लग गई है. इन लाइट्स के जलने का मतलब होता है कि आपकी कार में कही कोई कमी है. लेकिन कई बार यूजर्स (Users) इन वॉर्निंग लाइट्स को नजरअंदाज करके ड्राइव (Drive) पर निकल जाते है. जिसके बाद यूजर्स को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है.

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    नई दिल्ली. कार कंपनियां यूजर्स की सहूलियत के लिए कार के डैशबोर्ड पर वॉर्निंग लाइट्स देने लग गई है. इन लाइट्स के जलने का मतलब होता है कि आपकी कार में कही कोई कमी है. लेकिन कई बार यूजर्स इन वॉर्निंग लाइट्स को नजरअंदाज करके ड्राइव पर निकल जाते है. जिसके बाद यूजर्स को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है. आइए जानते है इन वॉर्निंग लाइट्स के बारे में जिससे आपको कभी परेशानी का सामना न करना पड़ें...

    डैशबोर्ड पर होती है तीन तरह की लाइट्स
    कार के डैशबोर्ड पर आमतौर पर तीन तरह की लाइट्स ग्रीन, ऑरेंज और रेड होती है. इन तीनों की लाइट्स का मतलब अलग-अलग होता है. ग्रीन लाइट का मतलब होता है कि आपकी कार में कोई सेंसर एक्टिवेट है. इस कंडीशन में आप कार ड्राइव कर सकते हैं. ऑरेंज लाइट का मतलब होता है कि आपकी कार के टायर में प्रेशर कम है. इस स्थिति में आप कार ड्राइव कर सकते है. इसके अलावा रेड लाइट जलने का मतलब होता है कि आपकी कार के एयरबैग और ब्रेक्स में कोई कमी है. आप इस दौरान कार चला सकते है लेकिन आपको सावधानी रखनी होगी.

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    इंजन-ऑयल प्रेशर कम होने पर ये लाइट जलेगी
    यह लाइट दो तरह की होती है, येलो और रेड. अगर येलो लाइट ऑन हो तो समझ जाइए की इंजन में ऑयल का लेवल कम है. इस स्थिति में गाड़ी चलाई जा सकती है, यह तब जलती है जब ऑयल मिनिमम लेवल पर आ जाता है. इस कंडीशन में जल्द से जल्द ऑयल टॉप-अप करवा लें. रेड लाइट लगातार जले, तो इस कंडीशन में गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है. इसलिए जब भी रेड लाइट आपके डैशबोर्ड पर दिखाई दे तो तुरंत गाड़ी बंद करे दें. क्योंकि अगर गाड़ी 15 मिनट तक भी चलती रही तो इंजन सीज हो सकता है. छोटी सी लापरवाही आपका बड़ा नुकसान कर सकती है. अगर लाइट ब्लिंक कर रही है, और RPM बढ़ाने पर बंद हो जा रही है, तो इस कंडीशन में गाड़ी चला कर वर्कशॉप/घर तक लेकर जा सकते हैं. लेकिन लगातार जले तो गाड़ी बंद कर देना ही समझदारी है.

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    कूलेंट टेंपरेचर कम होने पर जलेगी ये लाइट
    इसमें तीन तरह की लाइट होती है-ग्रीन,येलो और रेड. ग्रीन यानी कूलिंग सिस्टम ओके है और इंजन कूल है, इसमें कंडीशन में भी गाड़ी चला सकते हैं. येलो यानी कूलेंट का लेवल कम है, इसे जल्द-से-जल्द टॉपअप कराने की जरूरत है, हालांकि इसे कंडीशन में भी गाड़ी चलाई जा सकती है. लेकिन यदि लाइट रेड जले, तो इस कंडीशन में गाड़ी चलाना भारी पड़ सकता है. रेड लाइट जलने पर यदि गाड़ी चला रहे, तो 15 मिनट के अंदर इंजन सीज हो सकता है या हेड गैस किट फट सकती है. इस कंडीशन में गाड़ी खड़ी कर आधे घंटे इंतजार करने के बाद सावधानी से कूलेंट का ढक्कन खोलें और कूलेंट टॉप-अप करें, उसके नीचे चेक करें कि कही लीकेज तो नहीं है. अगर है तो तुरंत मैकेनिक से सलाह लें. इसलिए कूलेंट टेंपरेचर की रेड लाइट लगातार जले, तो बिल्कुल भी हल्के में न लें.
    बैटरी प्रॉब्लम पर जलेगी ये लाइट
    यह बैटरी-चार्जर अलर्ट लाइट होती है. अगर यह लाइट जले तो इंजन तो सीज नहीं होगा लेकिन आपको किसी भी जगह हैंग (अटक) जरूर हो सकते हैं. चलती गाड़ी में यदि यह लाइट दिखे, तो गाड़ी बंद न करें, चलने दें और ऐसे किसी स्थिर जगह जैसे ढाबा या वर्कशॉप पर पहुंचकर ही बंद करें, जहां सुरक्षित तरीके से रात भर गाड़ी खड़ी रह सके. इस लाइट के आने का मतलब है कि बैटरी चार्ज नहीं हो रही है और कार के अंदर लगे लगभग सभी सर्किट और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट में बैटरी से ही पावर पहुंचाती है. रेड लाइट आने का मतलब है कि बैटरी चार्ज नहीं हो रही है और जितनी पावर बैटरी में बची है उससे ज्यादा से ज्यादा 20 किमी. तक ही चला जा सकता है और इसके बाद आपका इंजन बंद हो जाएगा, इसलिए जल्द से जल्द किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की कोशिश करें. हो सके कि घर से निकलने से पहले ही चेक कर लें और यदि ये लाइट जलती दिखाई दे तो गाड़ी न चलाएं.

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