जानिए क्यों BS6 गाड़ियों की जगह BS4 खरीदना है फायदेमंद

चूंकि, 1 अप्रैल 2020 से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इमिशन के नॉर्म्स को सख्ती के साथ लागू करने को कहा है इसलिए लोगों में एक भ्रम की स्थिति है कि क्या अभी रुककर अगले साल सीधे बीएस-6 (BS-6) कार खरीदी जाए या कि अभी बीएस-4 (BS-4) कार खरीदना ठीक होगा?

News18.com
Updated: September 2, 2019, 12:19 PM IST
जानिए क्यों BS6 गाड़ियों की जगह BS4 खरीदना है फायदेमंद
कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि बीएस-6 के आने की वजह से भी लोग गाड़ियां खरीदने से हिचक रहे हैं
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Updated: September 2, 2019, 12:19 PM IST
(अजित गर्ग)

इंडियन ऑटो इंडस्ट्री (Indian Auto Industry) पिछले 19 सालों के सबसे खराब दौर से गुजर रही है. मार्केट में मंदी (The recession) और ब्याज की उच्च दरों को इसका एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. लेकिन कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि बीएस-6 के आने की वजह से भी लोग गाड़ियां खरीदने से हिचक रहे हैं. खासकर कार खरीदारों में जो अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है उसको लेकर भी पिछले 6 महीने में कार की सेल में गिरावट आई है. चूंकि, 1 अप्रैल 2020 से सुप्रीम कोर्ट ने इमिशन के नॉर्म्स को सख्ती के साथ लागू करने को कहा है इसलिए लोगों में एक भ्रम की स्थिति है कि क्या अभी रुककर अगले साल सीधे बीएस-6 कार खरीदी जाए या कि अभी बीएस-4 कार खरीदना ठीक होगा? तो हम इसी का विश्लेषण करके आपको बता रहे हैं कि कार खरीदने का यह सही समय है या नहीं.

1 अप्रैल 2020 के बाद क्या होगी बीएस-4 कारों की स्थिति-
एक सबसे बड़ा भ्रम लोगों के मन में यह है कि क्या 1 अप्रैल 2020 के बाद बीएस-4 कारें सड़कों पर चल सकेंगी. तो इसका जवाब है 'हां'. यह ऐसा ही है कि जैसे बीएस-4 लागू होने के बाद भी बीएस-3 कारें सड़कों पर चल रही थीं. फिर हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा भी की है, कि मार्च 2020 तक खरीदे गए सभी बीएस-4 वाहन अपने रजिस्ट्रेशन पीरियड तक वैलिड होंगे और सड़कों पर चल सकेंगे.

बीएस-6 वाहनों की कीमत है ज्यादा-
कहा जाता है कि जब भी नई तकनीक आती है तो वह महंगी होती है. ऐसा माना जा रहा है कि बीएस-6 डीज़ल वाहनों की कीमत बीएस-4 की तुलना में एक से डेढ़ लाख ज्यादा होगी. इसी तरह बीएस-4 पेट्रोल कारों की कीमत भी 20 से 50 हज़ार तक ज्यादा हो सकती है. हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई होगी इस पर अभी कुछ भी कहना मुश्किल होगा क्योंकि अभी जितने भी बीएस-6 वाहल लॉन्च हो रहे हैं वे बहुत ज्यादा महंगे नहीं है. उदाहरण के तौर पर हुंडई की ग्रैंड आई10 नियोस बीएस-6 4.99 लाख रुपये में मिल रही है.

बीएस-6 फ्यूल का बीएस-4 वाहन पर क्या असर होगा-
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कुछ लोगों को इस बात की शंका है कि बीएस-6 वाहन के फ्यूल को बीएल-4 के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. लेकिन ऐसा नहीं है. बीएस-4 वाहन के लिए बीएस-6 फ्यूल का प्रयोग करने से इंजन पर असर तो पड़ेगा लेकिन यह बहुत मामूली होगा.

दरअसल, बीएस-4 की तुलना में बीएस-6 फ्यूल में सल्फर की मात्रा कम होगी. बीएस-4 में सल्फर की मात्रा 50ppm होती है जबकि बीएस-6 मे यह 10ppm होगी. चूंकि सल्फर डीज़ल कारों को स्मूथली चलाने के लिए जरूरी होता है इसलिए अगर आप बीएस-4 कार में बीएस-6 फ्यूल का इस्तेमाल करते हैं तो लंबी दूरी की यात्रा में थोड़ी परेशानी हो सकती है.

मिल रही है बड़ी छूट-
मार्केट में स्लोडाउन और पुराने स्टॉक की वजह से कंपनियां बीएस-4 गाड़ियों पर भारी छूट व डिस्काउंट दे रही हैं. इसलिए ऐसे समय में बीएस-4 गाड़ियां खरीदना काफी अच्छा हो सकता है. क्योंकि इसे सड़कों पर चलाने में न तो लीगल समस्या आने वाली है और न ही तकनीकी.

बीएस-6 की फ्यूल की कीमत होगी ज्यादा-
बता दें कि बीएस-6 फ्यूल महंगा होगा और इसकी ऐफिसिएंसी भी कम होगी. यानी कि एक लीटर बीएस-6 फ्यूल में कार कम दूरी तक ही जा सकेगी.

महंगी होंगी बीएस-6 डीज़ल कारें-
चूंकि बीएस-6 डीज़ल वाहनों की लागत बीएस-4 डीज़ल वाहनों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है इसलिए मारुति सुज़ुकी और रेनॉ जैसी कंपनियों ने कुछ दिन पहले इन्हें बंद करने की घोषणा की थी. तो उसका इंतज़ार करने के बजाय बीएस-4 कारें खरीद लेना बेहतर होगा.

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First published: September 2, 2019, 11:54 AM IST
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