ऑटो सेक्टर को Budget 2020 से हैं ये 5 बड़ी उम्मीदें, क्या सीतारमण पेश करेंगी ‘फील गुड’ बजट

ऑटो सेक्टर को Budget 2020 से हैं ये 5 बड़ी उम्मीदें, क्या सीतारमण पेश करेंगी ‘फील गुड’ बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज पेश करेंगी बजट

ऑटो सेक्टर (auto sector) की मांग है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) को और किफायती बनाने के लिए बजट (Budget 2020) में इस पर लगने वाले जीएसटी को और कम किया जाए

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2020, 8:47 PM IST
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ऑटो सेक्टर के लिए पिछला कुछ समय काफी खराब रहा है और गाड़ियों की बिक्री घटनी से इस इंडस्ट्री की रफ्तार भी धीमी पड़ी है. ऐसे में इस सेक्टर को बूस्ट देने के लिए इंडस्ट्री से जुड़े सभी लोगों की नजरें अब यूनियन बजट 2020 पर टिकी हुईं हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना दूसरा बजट पेश करने जा रही है. बताया जा रहा है कि गाड़ियों की मांग बढ़ाने, जीएसटी की दरें कम करने से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रोत्साहन तक, सरकार बजट में ऑटो सेक्टर के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकती हैं. आइए जानते हैं इस बार के बजट से आखिर ऑटो सेक्टर को हैं क्या उम्मीदें...

- GST रेट्स में कटौती: ऑटो सेक्टर की इस समय की सबसे बड़ी मांग गाड़ियों पर लगने वाले जीएसटी रेट को कम करने की है. इंडस्ट्री चाहती है कि सरकार वाहनों पर लगने वाली जीएसटी दरें 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करे. वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के अध्यक्ष राजन वढ़ेरा का कहना है कि बीएस-6 (BS-6) मानकों वाले वाहनों की लागत अधिक होने से मांग प्रभावित हो सकती है. इसीलिए हम सरकार से बीएस-6 मानक वाले वाहनों पर जीएसटी एक अप्रैल से 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का आग्रह करते हैं.





- इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर कम हो जीएसटी: इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर लोगों में बढ़ती रुचि को देखते हुए ज्यादातर ऑटो कंपनियों अब इस सेगमेंट में एंट्री मार रही हैं. लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमत ज्यादा होने के देश के आम जन चाह कर भी इन्हें खरीदने के बारे में सोच नहीं पा रहे हैं. ऐसे में ऑटो सेक्टर की मांग है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को और किफायती बनाने के लिए बजट में इन पर लगने वाले जीएसटी को और कम किया जाए. काइनेटिक ग्रीन की सीईओ सुलज्जा फिरोडिया ने कहा है कि पांच फीसदी की बजाए इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जीरो फीसदी जीएसटी लगाने से ये गाड़ियां ज्यादा किफायती होंगी.



- कबाड़ नीति: इस मामले को लेकर सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (SIAM) की ओर से कहा गया है कि हमने वित्त मंत्रालय से प्रोत्साहन आधारित कबाड़ नीति की घोषणा पर विचार करने का आग्रह किया है. सियाम के अध्यक्ष राजन वढ़ेरा ने एक बयान में कहा, 'हमने वित्त मंत्रालय से प्रोत्साहन आधारित कबाड़ नीति की घोषणा पर विचार करने का आग्रह किया है. साथ ही सियाम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को राज्यों द्वारा खरीदी जाने वाली पेट्रोल-डीजल बसों के लिए बजट आबंटन बढ़ाने का भी सुझाव दिया है.

- LPG गाड़ियों पर कम GST: ऑटो एलपीजी उद्योग ने जीएसटी में कटौती की मांग की है. इंडियन आटो एलपीजी कोलिशन (IAC) के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने कहा कि सरकार को ऑटो एलपीजी को भी सीएनजी जैसे स्वच्छ ईंधन के समान मानना चाहिए और उसे वित्तीय प्रोत्साहन देना चाहिए. गुप्ता का कहना है कि हमने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और जीएसटी परिषद के सदस्यों को पत्र लिखकर ऑटो एलपीजी पर जीएसटी की दर को 18 से घटाकर पांच प्रतिशत करने का आग्रह किया है. एलपीजी भी सीएनजी की तरह स्वच्छ ईंधन की श्रेणी में आता है. यह डीजल और पेट्रोल की तुलना में सस्ता पड़ता है. एलपीजी का सिलेंडर सीएनजी से हल्का होता है और इसे भरने में भी पेट्रोल-डीजल जितना ही समय लगता है.



- वाहनों के कल-पुर्जों पर लगे 18% जीएसटी: वाहन कल-पुर्जे विनिर्माताओं के संगठन एसीएमए ने आगामी बजट में सभी वाहन कलपुर्जों पर समान रूप से 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का आग्रह किया है. एसीएमए के मुताबिक फिलहाल वाहनों के करीब 60 प्रतिशत कल-पुर्जों पर 18 प्रतिशत की दर से कर लगता है. वहीं उच्च मूल्य के उपकरणों पर 28 प्रतिशत की दर से शुल्क लगाया जाता है. ऑटोमोटिव कंपोनेन्ट मैनुफैक्चरर्स एसोसएिशन ऑफ इंडिया (एसीएमए) ने सरकार से अनुसंधान एवं विकास और स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास के लिये कोष गठित करने का भी अनुरोध किया है.
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