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आखिर सफेद रंग का ही क्यों होता है आसमान में उड़ने वाला प्लेन

News18Hindi
Updated: October 21, 2019, 4:33 PM IST
आखिर सफेद रंग का ही क्यों होता है आसमान में उड़ने वाला प्लेन
सफेद रंग सस्ता भी पड़ता है और दुर्घटना को भी कम करने में मदद मिलती है.

एरोप्लेन के सफेद रंग के होने के पीछे कई वजह है. इससे न सिर्फ सुरक्षा बढ़ती बल्कि लागत भी कम होती है.

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  • Last Updated: October 21, 2019, 4:33 PM IST
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हम अक्सर आसमान में प्लेन को उड़ते हुए देखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि अधिकतर प्लेन सफेद रंग के ही क्यों होते हैं. सफेद रंग की कारें भी पूरी दुनिया में काफी संख्या में बिकती हैं इसकी एक बड़ी वजह है कि इसकी रीसेल वैल्यू भी काफी होती है. लेकिन एयरोप्लेन के सफेद होने की वजह कुछ और ही है. तो हम आपको बताते हैं कि आखिर इसकी क्या वजह है-

गर्मी को कम करता है-
प्लेन का रंग सफेद होने के पीछे एक बड़ी वजह सूर्य की रोशनी है. दरअसल, सफेद रंग सूर्य की रोशनी को अवशोषित नहीं करता बल्कि यह उससे टकराकर वापस लौट जाती है. जिसकी वजह से प्लेन के अंदर का केबिन ज्यादा गर्म नहीं होता. इससे प्लेन को ठंडा रखने के लिए ज्यादा ईंधन खर्च नहीं होता.

कम लागत-

इसका दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि दूसरे रंग के पेन्ट की तुलना में सफेद रंग सस्ता पड़ता है. सिंगल आइल वाले औसत साइज़ के एयरबस ए320 को या बोइंग 737 को पेन्ट करने के लिए 65 गैलन या 245 लीटर पेन्ट की ज़रूरत होती है. इसके अलावा प्लेन के ग्लासी कलर को बनाए रखने के लिए भी मेन्टेनेन्स करनी पड़ती है ताकि एयरोडायनमिक्स बना रहे. इसलिए इन सब कारणों से सफेद रंग सस्ता पड़ता है.

चिड़ियां कम टकराती हैं-
हालांकि, यह सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन स्टडीज़ से पता लगा है कि सफेद रंग के पेन्ट की वजह से चिड़ियां एरोप्लेन से कम टकराती हैं. बता दें कि किसी भी प्लेन के लिए चिड़ियों का टकराना बड़ा खतरा होता है जिससे सैकड़ों यात्रियों को जान खतरे में पड़ सकती है. स्टडी में पता चला है कि पंखों वाली चिड़िया नीले या लाल रंगों की तुलना में सफेद रंग को जल्दी पहचान लेती हैं.
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दुर्घटना को कम करने में मदद-
सबसे ज्यादा एयर दुर्घटनाएं टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान ही होती है. पायलेट के लिए भी यह संभव नहीं हो पाता है कि वह पूरे प्लेन को एक साथ देख सके. इसी वजह से टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान एयर होस्टेस यात्रियों को विंडो फ्लैप खोलने को कहती है. इसके पीछे वजह यह है कि प्लेन में अगर कोई क्रैक या स्पार्क वगैरह होगा तो सफेद परत पर तुरंत दिख जाएगा.

रीसेल वैल्यू-
आमतौर पर एयरलाइन इंडस्ट्री लीज़ मॉडल पर चलती है. एयरलाइन कैरियर्स एयरबस या बोइंग जैसी कंपनियों से प्लेन को खरीदने का काम आमतौर पर कम ही करती हैं. लेकिन ऐसा देखा गया है कि सफेद रंग के प्लेन को खरीदे जाने की संभावनाएं काफी होती हैं.

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First published: October 21, 2019, 4:31 PM IST
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