होम /न्यूज /ऑटो /Car Purchase: बेस या टॉप वेरिएंट, कौन सा खरीदना है फायदे का सौदा, जानें डिटेल रिपोर्ट

Car Purchase: बेस या टॉप वेरिएंट, कौन सा खरीदना है फायदे का सौदा, जानें डिटेल रिपोर्ट

टॉप वेरिएंट के मुकाबले बेस की कीमत कम होती है.image-canva

टॉप वेरिएंट के मुकाबले बेस की कीमत कम होती है.image-canva

एक ही कार के कई मॉडल उपलब्ध होने के कारण यह तय कर पाना काफी मुश्किल होता है कि आखिर इनमें से कौन फायदे का सौदा है. इनमे ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

बेस वेरिएंट खरीदने के बाद इसमें अलग से पैसे खर्च कर टॉप वेरिएंट बना सकते हैं.
बेस वेरिएंट की कीमत और फीचर्स हमेशा टॉप के मुकाबले कम होती है.
कंपनी इसके माध्यम से प्रत्येक वर्ग के बीच कार की पहुंच बनाने की कोशिश करती है.

अधिकतर वाहन निर्माता कंपनी किसी भी कार को अलग-अलग वेरिएंट के साथ लॉन्च करती है. देखने में सभी एक जैसे ही लगते हैं. लेकिन फीचर्स और कीमत के मामले में इन में काफी अंतर होता है. क्या आप भी बेस और टॉप वेरिएंट को देखने के बाद यह तय नहीं कर पाते कि आखिर इनमें से कौन फायदे का सौदा है. अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है. सभी वेरिएंट्स के बीच अंतर जानने के बाद आपको गाड़ी खरीदने में काफी आसानी होगी.

इसके साथ ही आप यह भी तय कर पाएंगे कि सभी मॉडलों में से कौन ज्यादा बेहतर है. आमतौर पर लोग टॉप वेरिएंट एक खरीदना चाहते हैं. लेकिन बहुत सारे मॉडल देखने के बाद उन्हें यह सुनिश्चित करना मुश्किल होता है कि कौन ज्यादा सही है. 

ये भी पढ़ेंः Automatic Transmission Car खरीदने का कर रहे हैं प्लान तो देखें 10 लाख रुपये से कम ये खास गाड़ियां

इसे कहते हैं बेस वेरिएंट
दरअसल कंपनी एक ही नाम से अलग-अलग कारें लॉन्च करती है. बेस वेरिएंट की कीमत टॉप के मुकाबले कम होती है. सिर्फ इतना ही नहीं अन्य के मुकाबले इनमें फीचर्स भी काफी कम देखने को मिलती है. ऐसा नहीं है कि इन फीचर्स की वजह से गाड़ी चलाने में दिक्कत होती है. लेकिन इसके बिना भी आप किसी भी गाड़ी को बहुत ही आसानी से चला पाते हैं. इसके पीछे की वजह सभी वर्ग के लोगों के बीच अपनी गाड़ी की पहुंच बना पाना है. अधिकतर लोग खरीदना तो टॉप मॉडल चाहते हैं. लेकिन बेस वेरिएंट खरीदने के बाद भी आप इसमें अलग से काम करवा कर टॉप वेरिएंट का मजा ले सकते हैं.

क्यों है बेस वेरिएंट फुल पैसा वसूल
बेस वेरिएंट खरीदना फुल पैसा वसूल है. इसके पीछे की भी कई वजह है. दरअसल आप किसी भी कार को खरीदने के बाद इसमें अलग से काम करवा कर टॉप वेरिएंट की तरह लुक दे सकते हैं. वहीं अगर फीचर्स की बात करें तो बेस वेरिएंट्स में कुछ फीचर्स की कमी देखने को जरूर मिलती है. लेकिन इसे आफ्टरमार्केट गाड़ी में लगवा कर लाखों रुपये बचा सकते हैं. इसे अलग से लगवाने में कंपनी के मुकाबले काफी कम पैसे खर्च करने पड़ते हैं. यानी बेस वेरिएंट खरीद कर भी टॉप वेरिएंट का मजा ले सकते हैं.

यह भी पढ़ें:Renault करने जा रही बड़ा धमाका, Safari और XUV को टक्कर देने के लिए आएगी 7 सीटर SUV

केवल टॉप वेरिएंट में ही मिलतें हैं ये फीचर्स
बेस वेरिएंट खरीदने के कई नुकसान भी हैं. आमतौर पर टॉप वेरिएंट कार में चार या छह एयरबैग देखने को मिल जाती है. वहीं बेस वेरिएंट में इसे केवल ड्राइवर और आगे बैठने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए ही एयर बैग्स दिए जाते हैं. इसे अलग से फिटिंग करवाने पर कई बार दुर्घटना होने की स्थिति में समय पर इसे काम नहीं करने के कारण जान भी जा सकती है. सिर्फ इतना ही नहीं टॉप मॉडल की तरह बेस वेरिएंट में डीआरएल, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, कीलेस एंट्री, डिफॉगर, और रियर वाइपर जैसे सुविधाएं नहीं मिलती है.

Tags: Auto News, Car, Car Bike News

टॉप स्टोरीज
अधिक पढ़ें