Bhojpuri: कहवां भेंटाई करोनवा के माई, केहू ओकर पता तनी दीत बताई

केतने लोग त एही से काम चला लेता कि थरेसर के गर्दा से छींक आवत बा. कवनो जांच कहीं नइखे होखत. ढेर केहू करता त गियानी मोर पर मिसिर जी के डगदरी (डाक्टरी) में जाता. मिसिर जी सर्दी, बोखार आ खोंखी के गोटी लिख दे तानी. ढेर लोग त ठीको हो जाता. ए मलिकार, मिसिर जी त गांवहीं रह गइले अबले, ऊ डाकदरी कब पढ़ले?

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गोड़ लागतानी मलिकार ! ए मलिकार, करोना, करोना, करोना रोज सूनत अब माथा पाक गइल बा. पहिले ई शहरे के बेमारी बतावल जात रहल हा. अब त गांव-जवार ले ई धमकि आइल बा. अपना पिछवरिया के घरवा वाला जलेसर भाई के छोटका के करोना लील गइल. बेचारा के उमिरे अबहीं केतना रहल हा. दूइए बरिस पहिले त ओकर बियाह भइल रहे. इहे कहीं कि अबहीं कवनो नान्ह-बार ना रहल हा. बेचारी ओकर जनाना फेंकर-फेंकर रोअत रहुवे त करेजा फाट जात रहे.

बूझ जाईं मलिकार कि कवनो घर नइखे, जहवां केहू छींकत, खांसत भा बोखरिआइल नइखे. जेकरे से पूछीं, ऊ इहे कहत बा कि तनी मिजाज बोखरिया गइल बा भा सरदिया गइल बा.

केतने लोग त एही से काम चला लेता कि थरेसर के गर्दा से छींक आवत बा. कवनो जांच कहीं नइखे होखत. ढेर केहू करता त गियानी मोर पर मिसिर जी के डगदरी (डाक्टरी) में जाता. मिसिर जी सर्दी, बोखार आ खोंखी के गोटी लिख दे तानी. ढेर लोग त ठीको हो जाता. ए मलिकार, मिसिर जी त गांवहीं रह गइले अबले, ऊ डाकदरी कब पढ़ले? एही लोग के नू झोरा छाप डागदर (डाक्टर) कहल जाला. हमरा त बुझाता कि अइसनका डागदरवा ना रहिते सन त केतने लोग सेंतिहे में खरचा हो जाइत. छाकाटोला में कवनो बंगाली चानसी डागदर आइल बा. पहिले ऊ घाव चीरे-फारे के काम करत रहल हा. बतावत बा लोग कि अब उहो करोना के दवाई करत बा. हमरा त मन करता मलिकार- कहवां भेंटाई करोनवा के माई, केहू ओकर पता तनी दीत बताई. हम ओकरा माइए से जाके फरिया अइतीं.

रउरा त जनबे करीले मलिकार कि आपन पड़ोसिया पांड़े बाबा के दुआर पर रोज भोरे-भोरे खबर कागज (अखबार) पढ़े वाला के जुटान होत रहल हा. रउरा देखले होखब बिजुरिया बाबा के. उहां के रोज पांड़े बाबा के दुआर पर भोरहीं आ जात रहनी हां. खबर कागज मांग के पढ़ेब. दस दिन से बिजुरिया बाबा के आवाजाही ना होत रहल हा. काल्ह पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि उहो परलोक चल गइले. जवार में त केतने आदमी गुजर गइले, आवाजाही बंद भइला से जल्दी मालूमो नइखे नू होत. पांड़े बाबा काल्ह रखेदन के समझावत रहुवीं कि मुंह पर जाब बान्ह के घर से निकलल करअ. रखेदन रोज दूध लेके आवे ले. का दूनी नाम मुंह जाबी के पांड़े बाबा बतावत रहुवीं. हं, इयाद आइल- मास (मलिकाइन मास्क के मास लिखले बाड़ी).
पांड़े बाबा खबर कागज आवते चाट जाई ले. फेर केहू कुछ पूछेला भा कवनो जरूरी खबर रहेला त बतावत-समझावत रहीले. रउरा त जनबे करीले मलिकार कि हम दोगहा के दुआरी से बहरी आज ले डेग ना धइनी. दोगहा में भोरे उठ के बइठ जाई ले आ पांड़े बाबा के बतिया धेयान से सुनीले. इसकुलवो बंद बाड़ी सन. एह से लड़िकन के कवनो काम त बा ना. उहो देर ले सूते ले सन. हमहूं ना जगाईं. पांड़े बाबा कह देले बानी कि लड़िका लोग आपन दुआर छोड़ के कतहूं ना जाई. एह से ऊ दुआरे पर खेले ले सन.

पांड़े बाबा दू दिन पहिले बतावत रहुवीं कि गंगा जी में सैकड़न लाश मुअल मछरी अइसन उतराइल बा. केहू कहता कि ई जोगी (योगी) बाबा के ऊपी (यूपी) से आइल बा, त केहू कहता कि अपने इहां के लाश हई सन. उहां के कहत रहुवीं कि करोना बेमारी से केहू मुअत बा त घर के लोग के लाश दीहल नइखे जात. सरकार ओह लाश के जरावत भा दफनावत बिया. सरकारी आदमी पइसा बंचावे-चोरावे खातिर ले जाके गंगा जी में फेंक आवत बाड़े. बताई मलिकार, ई त लाश से पइसा कमा तारे सन. एकनी के ना मुइहें सन का?

पांड़े बाबा इहो कहत रहुवीं कि जमनिया वाला फूफा फोन पर एगो नया बात बतवले बाड़े. ओने गांव में बेमारी भइला पर केहू अस्पताल में त इलाज करावत नइखे. मर गइला के बाद एह डर से कि घर भर के करोना के जांच होखे लागी, लोग चुपचाप ले जाके गंगा जी के रेत में गाड़ देता. जब बरखा भइल हा त उहे लशिया बह के बक्सर का ओर गइल बा. का जाने कवन बात सांच बा, बाकिर एह बात के त तकलीफ जरूर होता मलिकार कि मुअला पर केहू कान्हा लगावे भा फूंके-तापे नइखे जात. एही के कहल जाला लाश के गंजन.



ए मलिकार, अपना बिहार में एह घरी दू गो बात के खूब चर्चा होता. काल्ह त पांड़े बाबा के दुआर पर जेतना लो जूटल रहुवे, ओह लोगन के हां-हांव सुन के त हमरा पहिले बुझउवे कि मार-पीट हो जाई. कवनो पप्पू जादो बाड़े. उनके बतकही चलत रहुवे. केहू कहत रहुवे कि पप्पू जादो एह करोना के टाइम में घूम-घूम के लोग के मदद करत रहले हां. सरकार उनकरा के जेल भेज दिहलस. ई नीमन काम ना भइल. ओही में केहू कहत रहुवे कि ई बात सबका समझ में ना आई कि काहें उनका के जेल में भेजल गइल. हम कान पात के सुने-समझे के कोशिश कउवीं त बुझौउवे कि लालू जादो के बेटा लोग नइखे चाहत कि दोसर कवनो जादो आगे बढ़े. एही से लालू जादो के पाटी उनका जेल गइला के बारे में कुछऊ नइखे बोलत.

दोसरका बतकही शहबुआ (सीवान के भूत पूर्व सांसद शहाबुद्दीन) के होता. रोजे एक बेर ओकर बात होइए जाला. सुने में आइल कि उहो करोने से मुअल. ओकर बेटा कवनो असमिया साहेब (ओसामा साहेब) बा. कवन नेता असमिया साहेब से मिले अइले, एही के बतकही होता. लालू के बड़का बेटा अमला फैला लेके भेंट करे पहुंचल रहुवन. एकरा पहिले कई जने अउर नेता लोग मिले गइल. पप्पू जादो भी गइल रहले. नीमन काम के चर्चा कहीं नइखे होखत मलिकार. खाली अइसने लोग के अब बतकही होता.

गांव-जवार के बाकी हाल ठीक बा. हम त कहीं ना निकलीं. देवता लोग से गोहरावत रहीले- हे काली माई, बरम बाबा आ पीर बाबा, सभका के नीरोग राखेब लोगिन. करोना ओरा जाई त सभकरा स्थान पर जाके हम पूजा करेब आ परसादी चढ़ायेब. रउरो अब उमिर भइल मलिकार. आपन धेयान राखेब. कहीं निकले के कोशिश जनि करेब. बेसी जरूरी होखे त मुंह जाबी पहिर के निकलेब. लवट के सगरी कपड़ा कपड़ा धोवे वाला पाउडर में गोत देब. लगले नहा लेब. थोड़ा लिखना, बेसी समझना.

राउरे- मलिकाइन

(लेखक ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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