भोजपुरी विशेष: भोजपुरी माई के मूरति के मिले मान्यता

जगजीवन बाबू के मुताबिक हिंदी के गंगा जइसन विराट रूप देबे वाली गंगोत्री भोजपुरिए ह. उनकर कहनाम रहे कि हिंदी के विकास खातिर भोजपुरी के विकास जरूरी बा. भोजपुरी से प्रेम करे वाला लोग ए भासा के माई नियर मानेला आ उ लोग बकायदा बनारस में एगो मूरती भी बना लेले बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2020, 2:00 AM IST
  • Share this:
“ठनल बा जुद्ध, बंधल बा समा-समा
एक ओर झूठ अउर मूरख का सेना
दुसरका ओर सचाई अउर समानता के...
बईठइहे सिंहासन पे भोजपुरी माई के जीत
जीत के ई ठनल जुद्ध, जीत के ई ठनल जुद्ध”

इ कविता उनइस सौ बारह में इन्नू मतलब इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय में भोजपुरी भाषा, साहित्य अउर संस्कृति केंद्र के संयोजक शत्रुघ्न कुमार लिखले रहले. तब उ ए बात पर बड़ा खुश रहले कि पहिली बार तब के गृहमंत्री पी चिदम्बरम सतरह मई के दिने संसद में एगो बयान देले रहले. उ कहले- ''हम रउआ सबके भावना के समझतानी'' आ चिदम्बरम जी इहो बात जोड़ले कि मानसून सत्र में भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल कइ लिहल जाइ. ठेठ तमिल अउप अंगरेजी बोले वाला चिदम्बरम के मुंह से इ बाति सुनि के भोजपुरिया लोग के खुश होखल जायजे रहले. अइसे इ खुशी अभी अधूरे रहि गइल बा.  कारन इ बा कि भोजपुरी के ओकर जगह दियावे खातिर लड़ाई आजुओ अभी चलते बा.



अइसन बात नइखे कि भोजपुरी के खातिर लड़ाई नया हवे.  एकरा के समझे खातिर पनरह मई, उनइस सौ छिहतर के पटना में भइल अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के दूसरका अधिवेशन के देखे के चाही.  इ बारबार कहल जाला कि भोजपुरी अइसन भाषा के बढ़वला से हिंदी कमजोर होई.  पटना के अधिवेशेन में तब के केंद्र में मंत्री अउर बाद में देश के उप परधानमंत्री बाबू जगजीवन राम भी कहले रहले- ''हम बराबर इ सोचलीं कि जब गंगा जी निकललीं गंगोत्री से त छोट रूप रहे आ बाद में विराट हो गईल.  हिंदी के गंगा के विराट आशक्त रूप देवे के क्षमता भोजपुरिये में बा.  हिंदी के उन्नत्ति खातिर भोजपुरी के उन्नत्ति जरूरी बा.''

भोजपुरी भाषा में पढ़ें: बिहार चुनाव में बबाल करी मनोज वाजपेयी के भोजपुरिया रैप

जगजीवन बाबू के पहिले आ बाद में संसद तक में भोजपुरी के आवाज उठावल गईल.  साहित्यकार अऊर भोजपुरिया लोग त बोलते रहेला.  जौहर शफियाबादी भी लिखत बाड़े कि हक के लड़ाई जब ले बतावल ना जाई, लोग कइसे समझी.  भोजपुरी के इ गजल में अउरियो ढेर बात कहल गइल बा.  बाकिर खास बात इहे बा कि अपना बोली-भाषा खातिर लड़ाई बराबर जिंदा रखल जरूरी बा-

लड़ाई हक के बा अपना, जतावल भी जरूरी बा
बतावल भी जरूरी बा, बुझावल भी जरूरी बा.
कबो ई साँप बहिरा ना सुनी कवनो मधुर भाषा
कड़क छिंउकी आ पैना से जगावल भी जरूरी बा.
खड़ा तुफान में होके बचावे के पड़ी टोपी
घड़ी भर माथ के अपना झुकावल भी जरूरी बा
सही अक्षर के खातिर मश्क करहीं के पड़ी बाबू
बनावल भी जरूरी बा, मिटावल भी जरूरी बा.
बतावल बा इहे दर्शन से दर्शन जिन्दगानी के
उगावे खातिर अपना के, डूबावल भी जरूरी बा.
कबो जौहर ना देखस कोरा सपना दिन में कवनो
एही से आज उनका के घटावल भी जरूरी बा.

भोजपुरी भाषा के इ लड़ाई में ऊंच-नीच बहुते आइल बा.  अब त ई इतिहास बा कि एकरा खातिर लड़ाई आजादी के पहिलही शुरू हो गइल रहल.  अब समे के फेर रहे कि नया-नया आजादी अउर राष्ट्रपति जइसन पद पर राजेंदर बाबू यानी डॉ. राजेंद्र प्रसाद के होखला के हालि में भोजपुरी के लड़ाई ढेर मजबूत ना हो सकल.  लेकिन एगो बात बा कि एक हजार साल के इतिहास वाली एहि भाषा में उनइस सौ चउवन आवत-आवत फिलिमो बने लागलि रहे.

आजु हालि ई बा कि सोरह देशनि में करोड़ों लोग एहि भाषा के बोलेले.  एकरा बाद भी अपना देश में मैथि‍ली, बोडो, कोंकणी, डोगरी अइसनि भाषा के त संविधान के आठवीं अनुसूची में रखि लिहलि गईल बा, लेकिन भोजपुरी आजुओ अपना जगहि खातिर राह देखति बा.  रऊंवा सब जानि के हैरानि होखबि कि मैथि‍ली, बोडो, कोंकणी अऊर डोगरी बोले वाला लोग बहुते कम बा .  इकरा दोसरा ओरि पते बा कि भोजपुरी बाले के संख्या केतना बा.

भोजपुरी में पढ़ें: जरूरत बा, जरूरत बा, बहुते जरूरत बा एगो खांटी भोजपुरी टीवी सीरियल के!

अब एकरा संजोगे कहीं कि भोजपुरिया आवाज में देश के बहरा गईल लोग भी शामिल हो गईल बा.  के जानत रहे कि अठारह सौ तिहतर में जे पूरबिया लोग के ऊखि के खेती खातिर मजदूरी करे के ले गईल रहे, ओकरे नाती-पोता लोग भारत में भोजपुरी के लड़ाई के मजबूत बनाई.  एगो उदाहरन त मॉरिशस के परधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ बाड़े.  अब पता चलत बा कि ऊ बलिया में रसड़ा के लगे अठिलपुरा से गईल विदेशी यादव के वंशज हवुअन.  उनकरि पिताजी भी मॉरिशस के परधानमंत्री आ राष्ट्रपति रहि चुकल बाड़े.

प्रविंद जगन्नाथ के उदाहरऩ बात के आगे बढ़ावे खातिर रखल जात बा.  उ लगातारि दोसरका बारि परधानमंत्री भईल बाड़े.  दूइ हालि के परधानमंत्री बनला में उ कई हालि भारत अइले.  अभी एहि महिना के शुरू में हिमाचल के संगे उत्तरो परदेश में आइल रहले.  अभी पिछला साले जब बनारस में प्रवासी भारतीय लोगन के सम्मेलन भइल रहे, तबो उ धार्मिक स्थानन पर गइल रहले अउर प्रयाग कुंभ में पूजा भी कइले.

इ बतावल जरूरी बा कि काशी, माने बनारस के बड़ा लालपुर में जीवनदीप पब्लिक स्कूल में भोजपुरी माई के एगो मंदिर भी बनल बा.  एमे मॉरिशस के सहयोग मिलल बा.  मॉरिशस के राजदूत त इहो भरोसा देइ के गईल बाड़े कि जलदिये भोजपुरी माई के एक सौ आठ फुट के मूरति बनी.  इ बाबतपुर के लगे प्रवासी भवन में लागि सकेला.  जवन होखे, लागत बा कि दुनिया में कवनो भाषा के इ पहिली मूरति हवे.  जरूरी इ बा कि भाजपुरी के मूरति देश के संविधान से भी मान्यता पावे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज