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Bhojpuri Special: पहिले लालू जी के भाषण मशहूर रहे, अब ट्वीट से उड़इले बाड़ें गरदा!

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लालू जी (Lalu Prasad Yadav) पs चाहे जेतना बिपत आइल होखे लेकिन उनकर अंदाज नइखे बदलल। सजायाफ्ता भइला से अब भाषण त संभव नइखे लेकिन ट्वीट में उहे गंवई अंदाज कायम बा।

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 1:11 PM IST
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‘भोजपुरिया माटी मंच’ के परिचर्चा में वक्ता-श्रोता लोग जुट गइल रहे। परिचर्चा के बिषय रहे, लालू यादव के भाषा में भोजपुरी कहाउत। परिचर्चा के शुरुआत बांके बिहारी जी कइले। बांके जी कहले, लालू जी के राजनीतिक उठान में उनकर भाषण कला के बहुत बड़ जोगदान बा। उनका भाषण में भोजपुरी मुहाबरा के अइसन इस्तेमाल होत रहे कि सुने वला मंत्रमुग्ध हो जाए। अबहीं लालू जी पs चाहे जेतना बिपत आइल होखे लेकिन उनकर अंदाज नइखे बदलल। सजायाफ्ता भइला से अब भाषण त संभव नइखे लेकिन ट्वीट में उहे गंवई अंदाज कायम बा।

ठोको ताली- बजाओ गाल
बांके बिहारी जी आपन बात आगा बढ़वले, जइसे दाल-भात-सब्जी में चटनी खाना के सवाद बढ़ा देला वइसहीं बोले-लिखे में मुहाबरा भाषा के चटकदार बना देला। पहिले लालू जी के भाषण हिट रहे अब ट्वीट हिट बा। काल्हे बिहार में बिधि-बेवस्था पs लालू जी ट्वीट कइले रहन, ठोको ताली- बजाओ गाल। मतलब हालत खराब बा लेकिन तबहुओं ताली बाज रहल बा अउर डिंग हंका रहल बा। जदयू एकर जबाब मुहाबरे में देलस, रसरी जर गइल लेकिन अइंठन ना गइल। राजनीत में एक दोसरा के बखिया अधेड़ल कवनो नया बात नइखे। राजनीति के बात तs हरमेसा होत रहेला लेकिन आज के परिचर्चा में हमनी के लालू जी के भाषा में भोजपुरी के महत्व पs राय-बिचार करब जा।

छप्पर पs फूस ना, ड्योढ़ी पs नाच
लखनलाल जी परिचर्चा के आगा बढ़वले। लखनलाल जी कहले, भोजपुरी के लोकप्रिय बनावे में लालू जी के भी बहुत अहम जोगदान बा। उनकर संसद में भाषण सुन के दक्षिण भारत के अंग्रेजी बोले वला लेग भी जान गइले कि भोजपुरी कवन बाषा हs। लालू जी के चलते गैरभोजपुरी भाषी लोग भी भोजपुरी समझे अउर बोले लगले। 14 अगस्त 2020 के गोपालगंज में एगो पुल के सम्पर्क पथ बाढ़ में बह गइल रहे। एह खबर के बाद इल्जाम लागल कि हड़बड़ी में पुल के उद्घाटन कर दिहल गइल रहे। जइसहीं ई खबर अखबार में छपल, लालू जी ट्वीट कइले- छप्पर पs फूस ना, ड्योढ़ी पs नाच। (मतलब, क्षमता है नहीं लेकिन दिखावा से बाज नहीं आ रहे।) लालू जी के भाषा में हास्य के रस अधिका बा।



मछरी उतराये आप लेकिन छान रहे...
एकरा बाद भोजपुरी लेखक रजनीकांत जी आपन बिचार रखनी। रजनीकांत जी कहले, अन्ना हजारे के आंदोलन, भ्रष्टाचार के खिलाफ हल्लाबोल रहे। ई गैरराजनीतिक आंदोलन रहे। लेकिन जब अन्ना के चेला अरविंद केजरीवाल ई आंदोलन के लोकप्रियता के फैदा उठा के राजनीति करे लगले तs लालू जी ओकर जबाब भोजपुरी कहाउते से देले रहन। लालू जी लोकसभा में अपना भाषण में कहले रहन, देहात के तलाब में जब मछली रहती है तब ऊ गरीब लोग से जल्दी नहीं पकड़ाती है। एकरा बाद हजार आदिमी तलाब में घुस कर कादो-कादो करते हैं। कादो घिंचोड़ होने से बोआरी मछरी उपरे छतरा जाती है। तब ताकतवर लोग जाल लगा के मछरी छान के घर ले आता है। मेहनत करने वला देखते रह जाता है। तब लालू जी कहवात कहले, मछरी उतराये आप अउर छान रहे अन्ना हजारे के लोग। लालू जी आगा कहले, ऊ (अरविंद केजरीवाल) कहते थे कि भ्रष्टाचार मिटाना है। लेकिन अब तो लोग कह रहे हैं- दुनिया में आये हैं तो कुछ काम करिये और चंदा के पइसा से जलपान करिये।

जेने देखे चुरा-दही ओने मारे हुलकी
‘भोजपुरिया माटी मंच’ के सचिव गोरखनाथ परिचर्चा में नया रंग भरले। गोरखनाथ कहले, लालू जी के भाषा के सिंगार रहे कहाउत। केहू के कवनो जबाब देवे के होत रहे तs खट से कहाउत कह देस। शब्द भले कम लेकिन असर बहुत जादा। 2014 में रामविलास पासवान यूपीए छोड़ के एनडीए में आ गइल रहन। 2013 ले रामविलास जी, लालूजी के साथे ही रहन। एही बीच लालू जी के सबसे भरोसा वला सहजोगी रामकृपाल जादव भी भाजपा में शामिल हो गइले। तब लालू जी ट्वीट कइले- भोजपुरी में एक कहवात है, एगो छौंड़ी बुलकी, जेने देखे दही-चूरा ओने मारे हुलकी। (मतलब जिधर फायदा दिखा उधर हो लिये) लालू जी को भोजपुरी कहाउत कहे के अनगिनत उदाहरण बा।
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