Bhojpuri Spl: गजबे के टेस्टी होला लिट्टी-चोखा, लेकिन जानीं एकर जनम क कहानी

बिहार के मशहूर खाना ह लिट्टी-चोखा. ठाठ से लोग एकरा के खाला.

बिहार के मशहूर खाना ह लिट्टी-चोखा. ठाठ से लोग एकरा के खाला.

इ नायाब लिट्टी-चोखा (Litti-Chokha) पैदा कइसे भयल एकरे बारे में कम लोगन के पता हौ। त बता दीं कि लिट्टी-चोखा क कहानी बाबा विश्वनाथ क नगरी काशी अउर भगवान राम से जुड़ल हौ।

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  • Last Updated: January 29, 2021, 5:35 PM IST
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लिट्टी-चोखा क नाम लेतय मुंहे में पानी आइ जाला। जे खइले होई उ जानत होई। जे न खइले होय, उ एक बार खाइके देखि लेय। लिट्टी-चोखा आज पूरे देश अउर देश से बहरे भी उत्तर भारतीय थाली क खास व्यंजन बनि गयल हौ। चोखा क त उ रुतबा हौ कि एकर उपमा तक देवय जाए लगल हौ। कवनों चीजी के अगर चोखा क उपमा देइ देहल गयल त समझिल उ काम एकदम परफेक्ट हौ। लेकिन इ नायाब चोखा पैदा कइसे भयल एकरे बारे में कम लोगन के पता हौ। त लिट्टी-चोखा क कहानी बाबा विश्वनाथ क नगरी काशी अउर भगवान राम से जुड़ल हौ।

लंका क राजा रावण क बध कइले के नाते भगवान राम के ब्रह्महत्या क दोष लगि गयल रहल। राम जब धरमपत्नी सीता अउर भाई लक्षिमन के साथ अयोध्या लौटलन तब गुरु वशिष्ठ ओन्हय ब्रह्महत्या के दोष से छुटकारा पावय बदे काशी यात्रा क सुझाव देहलन। भगवान राम काशी क यात्रा कइलन अउर काशी में पांच ठे शिवलिंग स्थापित कइलन, बाबा भोलेनाथ क पूजा-अर्चना कइलन, तब जाइके ओन्हय ब्रह्महत्या के दोष से छुटकारा मिलल।

हलांकि ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति बदे भगवान राम लंका से लौटत समय समुद्र तट पर ही यानी तमिलनाडु के रामनाथपुरम में एक शिवलिंग स्थापित कइके शिव क पूजा-अर्चना कइले रहलन, लेकिन गुरु वशिष्ठ के अनुसार, काशी यात्रा के बिना ब्रह्मदोष से मुक्ति संभव नाही रहल। रामनाथपुरम में राम के हाथे स्थापित शिवलिंग आज रामेश्वरम नाम से बड़ा तीर्थ बनि गयल हौ अउर उहां स्थापित शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंग में शामिल हौ। लेकिन काशी में भगवान राम के हाथे स्थापित पांचों शिवलिंग भी रामेश्वर के नाम से जानल जालन। एहमें से दुइ रामेश्वर मंदिर खास हयन -एक मंदिर बनारस शहर में रामकुंड पर स्थित हौ अउर दूसर शहर से बहरे पंचकोशी यात्रा के रस्ते में मौजूद हौ। बाकी तीन रामेश्वर शिवलिंग मीरघाट, हनुमानघाट, अउर लक्सा महल्ला में स्थापित हयन। लिट्टी-चोखा क कहानी पंचकोसी यात्रा के रस्ते में मौजूद रामेश्वर धाम से जुड़ल हौ।

भगवान राम अपने 84 कोस के काशी यात्रा के दौरान कर्दमेश्वर, भीमचंडी के बाद पंचकोसी यात्रा के तीसरे पड़ाव पर जंसा थाना क्षेत्र में वरुणा नदी के तट पर मौजूद रामेश्वर धाम पहुंचल रहलन। राती के इहां विश्राम कइलन अउर सबेरे उठि के वरुणा में स्नान कइले के बाद वरुणा नदी से ही एक मुट्ठी रेत लेइके शिवलिंग बनउलन अउर ओकर स्थापना कइके तर्पण कइलन। तर्पण कइले के बाद आग जराइके अहरा पर लिट्टी अउर भंटा क चोखा बनउलन। भगवान शिव के ओही क नैवेद्य चढ़उलन अउर प्रसाद के रूप में लिट्टी-चोखा ग्रहण कइके आपन व्रत तोड़लन। भगवान राम रावण क बध कइले के बाद से ही अन्न क त्याग कइ देहले रहलन। बस एही ठिअन से लिट्टी-चोखा क परंपरा शुरू भयल, जवन आज हर केहूं क पसंदीदा व्यंजन बनि गयल हौ।
रामेश्वर मंदिर के नाते एह इलाके क नाम रामेश्वर पड़ि गयल हौ। आज भी रामेश्वर धाम पर अगहन महीना में कृष्ण पक्ष के छठी के दिना लोटा-भंटा क विशाल मेला लगयला। खासतौर से उत्तर प्रदेश अउर बिहार से लाखन क संख्या में लोग इहां हर साल मेला में पहुंचयलन अउर पूरी भक्ती के साथ रामेश्वर महादेव क जलाभिषेक कइके पूजा-अर्चना करयलन। मान्यता हौ कि जे भी ओह दिना इहां आइके वरुणा में नहाइके लिट्टी-चोखा बनाइके भगवान शिव के भोग लगाइके प्रसाद ग्रहण करयला, रामेश्वर महादेव ओकर कुल मनोकामना पूरा कइ देलन। काशी महात्म्य में लिखल हौ -

एक रात्रेय तू मध्येय प्रविशे छुछि मानसः,

वरुणा यासि तटे रम्ये सजाति परमां गतिम्।



यानी रामेश्वर में रात विश्राम करय अउर तामसी भोजन, जूता-चप्पल, तेल क पूरी तरह त्याग कइ देय, फिर सबेरे वरुणा में नहाइके अर्पण करय अउर देवस्थान पर सफेद तिल, बेल-पत्र, सफेद वस्त्र, चांदी-सोना अउर गंगा जल चढाइ के तर्पण करय अउर शिवलिंग क स्थापना करय त आदमी के परमगति यानी मोक्ष क प्राप्ति होइ जाला। श्लोक में लिट्टी-चोखा क स्पष्ट उल्लेख नाही हौ, लेकिन तामसी भोजन अउर तेल के बिना जवन भोजन बनि सकयला, उ लिट्टी-चोखा ही हौ। किवदंती हौ कि भगवान राम एही बदे इहां लिट्टी-चोखा बनउले रहलन। चूंकि इहां शिवलिंग स्थापित करय क परंपरा हौ, एह के नाते रामेश्वर धाम परिसर में तमाम ग्रह, देवता, राजा लोग आइके शिवलिंग स्थापित कइले हउअन, अउर उ तमाम शिवलिंग परिसर में आज भी मौजूद हयन। हर शिवलिंग क नाम स्थापित करय वालन के नाम पर पड़ल हौ। राजा नहुष क स्थापित नहुषेश्वर, पृथ्वी क स्थापित भूमिश्वर, भरत क स्थापित भरतेश्वर, लक्ष्मण के हाथे स्थापित लक्ष्मणेश्वर, शत्रुघ्न क स्थापित शत्रुघ्नेश्वर, अग्नि देव क स्थापित अग्निशेश्वर, सोम देव क स्थापित सोमेश्वर शिवलिंग इहां मौजूद हयन।

एकरे अलावा परिसर में दत्तात्रेय, राम, लक्ष्मण, जानकी, हनुमान, गणेश, नरसिंह, काल भैरव, सूर्य देव अउर साक्षी विनायक क मंदिर भी मौजूद हयन। इहां राधा-कृष्ण मंदिर, तुलजा माई, दुर्गा माई क भी भव्य प्रतिमा स्थापित हौ। धाम के बहरी हिस्सा में झारखंडेश्वर महादेव, शमशान घाट, रुद्राणी, तपोभूमि, उत्कलेश्वर महादेव, उदंड विनायक, अउर ईश्वरेश्वर महादेव क शिवलिंग भी स्थापित हौ। भगवान राम इहां जवने जगह शिवलिंग स्थापित कइले रहलन, ओही स्थान पर हनुमान अउर पूरी बानरी सेना विंध्य पहाड़ के पथरे से शिवलिंग बनाइके स्थापित कइले रहल। इ कुल शिवलिंग एक बरगद के विशाल पेड़ के नीचे मौजूद हयन अउर भक्तन के आस्था क केंद्र हयन। भगवान राम से जुड़ल आस्था क इ केंद्र अब लोक पर्व अउर आस्था क बड़ा केंद्र बनि गयल हौ।

भगवान राम जब काशी आयल रहलन, तब ओह समय इ नगरी सप्तपुरी में बंटल रहल अउर लक्सा इलाका अयोध्यापुरी क हिस्सा रहल। योग वशिष्ठ के वैराग्य प्रकरण के अनुसार रामेश्वर धाम जाए से पहिले भगवान राम रामकुंड पर शिवलिंग क स्थापना कइले रहलन। स्कंदपुराण में काशी खंड के तीर्थ रहस्य में भी रामकुंड क उल्लेख हौ। रामकुंड पर बाद में ललई छठ क मेला लगय लगल अउर काशी में इ मेला काफी परसिद्ध हौ। राम के इहां अइले के नाते ही अयोध्यापुरी राम-लक्षिमन दूनों भाइन के नाम से जानल जाए लगल -रामापुरा अउर लक्ष्मणपुरा। भगवान राम के साथे ओनकर दूनों लड़िका लव अउर कुश भी काशी आयल रहलन। इ दूनों भाइन के नाम पर भी दुइ मंदिरन क स्थापना भयल अउर दूनों मंदिर आज लवेश्वर महादेव अउर कुशेश्वर महादेव के नाम से जानल जालन। (लेखक सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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