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Bhojpuri Spl: आधुनिक भोजपुरी सिनेमा के महाखलनायक बाड़न अवधेश मिश्रा अउर संजय पाण्डेय

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भोजपुरी सिनेमा के आधुनिक युग के खलनायिकी के समझे खातिर हम एह दौर के कुछ स्थापित आ लोकप्रिय विलेन से उनका सफर आ किरदार पर विस्तार से बातचीत कइनी. आज बात एह दौर के दू गो महा खलनायक अवधेश मिश्रा अउर संजय पाण्डेय के. जे अपना अदायगी से दिल जीत ले लें.

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भोजपुरी सिनेमा के आधुनिक दौर मे कलाकार बदल गइलें, नया हीरो अउरी नया खलनायक आ गइलें, तकनीक बदल गइल, शूटिंग के पैटर्न भी बदल गइल, लेकिन कहानियन के ढर्रा कुछ खास ना बदलल. भोजपुरी के अधिकांश फिलिम अभियो कमोबेश हिंदी के कुल फिलिम के साथे साउथ के फिलिम से प्रेरित लागेला. हालांकि बीच-बीच में कई गो प्रयोग भइल अउर ओह मे सफलता भी मिलल. कहानी आ किरदार मे नयापन से खलनायक के भी नया स्पेस आ नया चेहरा मिलल. भोजपुरी सिनेमा के आधुनिक युग (2000-2021) के खलनायिकी के समझे खातिर हम एह दौर के कुछ स्थापित आ लोकप्रिय विलेन से उनका सफर आ किरदार पर विस्तार से बातचीत कइनी. आज बात एह दौर के दू गो महा खलनायक अवधेश मिश्रा अउर संजय पाण्डेय के..

अवधेश मिश्रा
अवधेश मिश्रा भोजपुरी खलनायकी के दुनिया के बेताज बादशाह हउवें. अवधेश मिश्रा के भोजपुरी में एंटी हीरो के अस्मिता अउरी उचित मेहनताना खातिर आवाज़ उठावे अउरी संघर्ष करे खातिर जानल जाला. अवधेश मिश्रा के जनम सीतामढ़ी बिहार के सुतियारा गाँव में भइल. फिल्म में अभिनय के शौक लागल त पहिले थियेटर ज्वाइन कइलें, फेर मुम्बई आपन किस्मत आजमावे आ गइलें. हिंदी सिनेमा खातिर संघर्ष कइलें अउरी जब ओने बात ना बनल त उभरत भोजपुरी फिलिम उद्योग में काम करे आ गइलें. 2005 में ‘दुल्हन अइसन चाहीं’ से शुरुआत कइलें अउरी अभी ले कुल 300 फिलिम कर चुकल बाडें. बातचीत के दौरान बतवले कि उ फिलिम के सलेक्शन बहुत सोच-विचार के करेलन. बकौल अवधेश मिश्रा, हम भोजपुरी में जब काम कइल शुरु कइनीं तब हमरा महसूस भइल कि भोजपुरी फिल्मन में खलनायक के उ कद नइखे जवन दोसर फिल्म उद्योग में बा.

हमनी के मेहनताना काफी कम मिलत रहे अउरी ट्रीटमेंट भी कुछ खास ना होखे. हम फेर ई मुद्दा खातिर संघर्ष करे शुरु कइनी, आवाज उठावे लगनी. हमार कुछ साथी कलाकार लोग भी सपोर्ट में आइल. आज संतोष के साथ कह सकेनी कि हम इंडस्ट्री में खलनायकन के भी अच्छा जगह दिलवावे में कामयाब भइनी. अवधेश मिश्रा के कुछ बेहतरीन किरदार अउरी नीमन प्रदर्शन वाला फिलिम के बात कइल जाव त रविकिशन के साथे ‘सुहाग’ आ ‘लागल रहा राजा जी’ में उ लल्लन सिंह के यादगार चरित्र निभवले रहले. निरहुआ के फिलिम ‘प्रेम के रोग भइल’ में उनकर ध्रुपद सिंह के किरदार एतना मशहूर भइल रहे कि उ इंडस्ट्री में एह फिलिम के बाद ही स्थापित हो गइलें.

पूरा फिल्म खलनायक के इर्द-गिर्द ही गढ़ल गइल रहे. ‘ज्वालामंडी’ में उ एगो चुनौतीपूर्ण रोल कइलें. उनकर रोल ज्वालाबाई नाम के हिजड़ा के रहल जे सॉफ्ट लउकेला लेकिन अंदर से खल स्वभाव के बा. अवधेश मिश्रा अपना किरदारन में अलग-अलग प्रयोग कइला खातिर जानल जाले. उ हिंदी के ‘एक विलेन’ से प्रेरित होके विलेन फिल्म बनवले जवना में उनकर मुख्य भूमिका रहल. ओही जे रविकिशन के फिल्म धुरंधर में उनकर किरदार एगो व्यवहारिक नजरिया वाला रहल जे देखे में त एकदम शरीफ बुझाला बाकिर भीतर से बहुत करिया बा. पवन सिंह के साथ लुटेरे में बरगद सिंह के उनकर किरदार याद कइल जाये वाला बा. अवधेश मिश्रा सकारात्मक चरित्र भी निभवले बाड़न जेकरा में खेसारीलाल यादव के साथे मेहंदी लगा के रखना आउर ज़िला चंपारण के नाम विशेष रूप से लिहल जा सकेला.

संजय पाण्डेय
संजय पाण्डेय आजमगढ़ के कम्हरिया गाँव के रहे वाला हउवें. उ शुरुआती दिनन में थिएटर कइलें अउरी फेर फिलिम में आ गइलें. उनकर पहिला फिल्म ‘कहिया डोली लेके अइबा’ 2004 में आइल रहल जेकर डायरेक्टर राजकुमार आर पाण्डेय रहलें. ई दूनो जाना के डेब्यू फिल्म रहल. बकौल संजय पाण्डेय हमनी के सिनेमा अउरी कहानी दूनो ही पीछे चलेला त उनकर किरदार अउरी खलनायकी कइसे आगे रह सकेला. हमरा शिकायत लेखको लोग से भी बा उ आपन कहानी में चरित्र के निर्माण करबे ना करेलें. खाली चरित्रन के नाम दे देलें अउरी फिलिम में उनके काम दे देलें. मुश्किल से 5% स्क्रिप्ट ही अभी ले हमरा के अइसन मिलल बा जेकरा में पहिले से ही कैरेक्टाराईज़ेशन कइल गइल रहे नाही त अधिकतर हमारा किरदारन में हम खुद मेहनत करके ओकरा के अलग शेड दिहले बानी. जइसे कभी अपना चरित्र के हकला बना देनी, लंगड़ बना देनी, ओकरा के कवनो तकिया कलाम दे देनी, ओकर मैनेरिज्म के बदल देनी. हमरा फिल्म में ज़्यादातर किरदारन के नाम अउरी डायलाग ही मिलेला बाकी के काम हम करेनी.

संजय आगे बतावेलें कि उनकर कुछ यादगार चरित्र भी बा जेकरा के लोग काफी सरहलस. ‘राजा बाबू’ फिलिम में नागिन के रोल में जे नागिन के धुन सुनते ही नागिन डांस करे लागेला, ‘औलाद’ में एगो साइको के रोल अउरी ‘पटना से पाकिस्तान’ में पहिले खलासी के रोल जे बाद में विधायक बन जाला. ‘दीवाना’ फिलिम में भी निभावल गइल उनकर रोल अलग रहल. संजय पाण्डेय कहेलें कि हम हमेशा आपन किरदारन में कोशिश कइलें बानी कि उ एक दूसरा के रिपीट ना लागें अउरी कवनो हिंदी आ दूसर भाषा के फिल्म के किरदार से प्रेरित ना होखे. ‘निरहुआ हिन्दुस्तानी 2’ में हमार रोल काफी पसंद कइल गइल.

ओकरा में हम एगो कॉमिक अउरी जरे-कुढ़े वाला चाचा के रोल कइलें रहनी, जे हमेशा आपन बड़का भाई के घर तबाह कइल चाहेला. ‘रानी चली ससुराल’ में हमार रिटायर्ड पहलवान के रोल काफी सुन्दर बनल बा जेकर चेला लड़की के चक्कर में बर्बाद हो जाला. ‘सपूत’ फिलिम में भी हमार बढ़िया किरदार बा. ‘दिलदार सावरिया’ में हमार विजय सिंह के रोल काफी अच्छा बा अउरी एकरा में हम अंडरप्ले कइले रहनी. लोग हमरा के लाउड एक्टर समझे लागल त एह फिलिम से हम आपन ओह छवि के तोड़ देहनी. आधुनिक दौर में सबसे अधिक नाम, दाम आ काम पावे वाला ई दोनों कलाकार अधिकांश फिलिम में अभिनय के मामला में अपना हीरो लोग पर भारी पड़ल बाड़न बाकिर मेहनताना हमेशा हलुके आ बहुते हलुक रहल बा. मतलब इहाँ पइसा कलाकारी के ना, हीरोबाजी के मिलेला.
( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के जानकार हैं. )

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