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Bhojpuri: संकल्प के मंच भी ह बलिया के ददरी मेला

Bhojpuri: संकल्प के मंच भी ह बलिया के ददरी मेला

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बलिया में ददरी मेला एह घरी चलि रहल बा..रोजाना सबेरे बलिया आवे वाली सड़कन पर बाइक, जीप आ बस से लोग लगातार आ रहल बा आ ददरी मेला के रूख कइ रहल बा...गांव-देहाति के लोगन खातिर एह मेला के खास अहमियत बा.

जहवां गांव देहाति के लोग दिने-दिने एह मेला के माजा उठावल चाहेला, उहवें बलिया शहर के लोगन खातिर ई मेला किरिन डूबला के बाद जवान होला..छोटी सरजू नदी के उत्तरी किनारा करीब चार-पांच किलोमीटर लंबा एह मेला के रंग बिजुली के रोशनी में अलगे रूप बिखेरेला.

एह मेला के राति रोजाना कवनो ना कवनो आयोजन से भी गुलजार होले. इहवां के मंच पर एक राति मुशायरा त एक राति कवि सम्मेलन खातिर रिजर्व बा. एह आयोजनन में दूर-दूर तक के लोग सांझहि जुटि जाला आ जगहि घेरि लेला.. एह मंच के राष्ट्रीयो महत्व बा, ई कमे लोगन के पता बा. एही मंच पर साल 1884 में भारतेंदु हरिश्चंद्र आपन बहुते मसहूर निबंध ‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ के पढ़ले रहले. ई निबंध बनारस से ओहघरी प्रकाशित होखे वाली मसहूर पत्रिका ‘हरिश्चंद्र चंद्रिका’ के दिसंबर 1884 के अंक में छपल रहे.

यादि करीं 1884 के दौर के. 1857 के पहिलका स्वाधीनता संग्राम भले कामयाब ना भइल रहे, बाकिर ओकर असर भारत में लउके लागल रहे. भारत मे नवचेचना जागल सुरू हो गइल रहे. अंग्रेज सरकार अंग्रेजी के पढ़ाई-लिखाई में जोड़ि देले रहले. वामपंथी इतिहासकार लोगन के नजरिए में अंग्रेजी शिक्षा सुरू भइला से देश में नया तरह के जागरण आइल सुरू हो गइल रहे. एकर असर जीवन के हर क्षेत्र में लउके लागल रहे. भारत के लेके लोगन में नया तरह के सोच विकसित होखे लागल रहे. इतिहासकार ओकरा के नवजागरण कहले बाड़ें. बाकिर ओह घरी संगठित रूप से लोगन के पाता लागे लागल रहे कि भारत काहें गुलाम बा, कहवां-कहवां ओह में कमी बा.

भारत में सुरू भइल एह नवचेतना के चलते लोगन के सोच में बदलाव आवे लागल रहे..भारतेंदु के एह निबंध के महत्व समझे खातिर ओह घरी के राजनीतिक माहौल पर भी धियान देबे के परी. भारतेंदु 1884 में ई निबंध बलिया में बंचले आ एकरा ठीक एक साल बाद 1885 में बंबई में कांग्रेस के स्थापना होता. ई बात आउर बा कि बाद में एही कांग्रेस के गांधीजी आजादी के आंदोलन के प्रमुख जरिया बना दिहले, बाकिर कांग्रेस के संस्थापक ए ओ ह्यूम साहेब के मंसा कुछु आउरे रहे. उनुकर मंसा रहे कि कांग्रेस के बहाने भारत में पढ़ल-लिखल लोगन के आगे कइ के अंग्रेजन के सहयोगी एगो नागरिक तंत्र के निर्माण कईल जाउ.

अंग्रेजन के मंसा के मोताबिक सुरू में भले ही कांग्रेस आगे बढ़लि होई, बाकिर बाद में ऊ नया तरह के राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रतीक बनि के उभरल. ओह के पीछे भारतेंदु जइसन लोगन के विचारन के बहुते महत्व बा. एह हिसाब से कहल जा सकेला कि देस के जगावे में बलिया के ददरी मेला के मंचों के खास सहयोग बा. बलिया में जब भारतेंदु आपन ई निबंध सुनवले रहले, तब अपार जनसमूह उमड़ि परल रहे. लोग ओह के रस लेके के सुनले रहे.

ई संजोग कहल जाई कि कुछु आउर, बलिया के पौराणिक ददरी मेला के मंच से भारतेंदु हरिश्चंद्र देश के मानस बदले वाला भाषण दिहले आ ऊ बलिया 1922 में आजादी के आंदोलन में छलकि-छलकि के आगे बढ़े लागल. एतना कि एही बलिया के एगो किशोर वेलेजली के कविता ‘हाऊ मेनी माइल्स टू मास्को’ के ओतने वर्ण आ छंद में बयालिस के आंदोलन में सुनावे के हिमाकत देखावे से पीछा न रहलसि. ई लइका के नाम रहे रामसिंहासन सहाय, जवन बाद में मधुर उपनाम से बचवन के खूब कविता-कहानी रचलसि. रामसिंहासन सहाय मधुर के ऊ कविता के अनुवाद रहे, ‘मास्को अब कितनी दूर’. भारतेन्दु जी के बलिया में एह भाषण दिहला के करीब 27 साल पहिले बलिये के लाल मंगल पांडे बैरिकपुर छावनी में स्वाधीनता के पहिलकी क्रांति के सूत्रपात कइए देले रहले, बाकिर ई क्रांतिकारी धरती 1942 में अइसन क्रांति कइलसि कि नया इतिहासे बनि गइल, देस के आजादी से पहिले बलिया के आजादी के इतिहास..

अब तनीं भारतेंदु जी के ओह निबंधों पर धियान दिहल जाउ…एह निबंध में भारत के जगावे खातिर भारतेंदु जी लिखले बाड़े,..ई भारत के दुर्भाग्य बा कि इहवां के लोग बहुते आलसी बा. एही वजहि से हमनीं के उन्नति नइखीं कइ पावतानीं जा. हमनी के पिछड़ापन के ईहे बड़ वजहि बा.

आपना एह निबंध में भारतेंदु भारतीय लोगन के रेलगाड़ी के डब्बा नियर बतावत कहले बाड़े कि जइसे रेलगाड़ी में निमन से निमन फर्स्ट, सेकंड आ थर्ड क्लास के डब्बा लागल रहेले स, बाकिर ऊहो इंजन के कमी के चलते एके जगहि पर खड़ा रहेले से, उहनि में गति ना हो पावेला, ओइसीं भारत के लोग बा. ऊ विद्वान बा, ताकतवर बा, बाकिर जब ले उहन लोगन के इंजन रूपी बढ़िया नेतृत्व ना मिलेला, ऊ लोग कुछु ना कइ पावेला लोग.

आपना एह निबंध के जरिए भारतेंदु जी ना सिर्फ ओह घरी मजबूत नेतृत्व के जरूरत पर जोर देले बाड़े, बाकिर लोगन के ताकत आ विद्वत्ता के भी यादि दियवले बाड़े.जानकार लोगन के कहनाम बा कि भारत के चेतना जगावे में एह निबंध के भूमिका भारतीय इतिहास के प्रस्थान बिंदु नियर बा. बलिया के गर्व बा कि अइसन जुगांतराकारी निबंध बलिया के पौराणिक ददरी मेला के मंच पर पढ़ल गइल रहे, जवन लोगन के चर्चा के विषय बनल…

देस के इतिहास में अइसन-अइसन तमाम घटनन के योगदान बा. उहनिं के हमनीं के भुलात जा तानीं जा…जरूरत बा कि ओह के इतिहास के धूरि भरल किताबिन से बहरी निकालीं जा आ ओह से नया भारत बनावे खातिर संकल्प लिहीं जा..

(उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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