होम /न्यूज /bhojpuri-news /

Bhojpuri में पढ़ें- धनि हे बलिया जे पांचि साल पहिलहीं आजाद भइल

Bhojpuri में पढ़ें- धनि हे बलिया जे पांचि साल पहिलहीं आजाद भइल

.

.

आजादी के लड़ाई अउर ओहमें बलिया के भागीदारी पर जे भी पढ़त होई, चित्तू पाण्डेय के नाम जरूर जानत होई. साल 1942 के अगस्त क्रांति में बलिया तुरंते आजाद होखे पर उतारू हो गइल रहे अउर अपना के आजाद करा भी लिहलस. तब 19 अगस्त के मजबूर होके अंग्रेज प्रशासन के जेल के फाटक खोले के पड़ल. चित्तू पाण्डेय अउर उनकर साथी लोग रिहा भइले.

अधिक पढ़ें ...

ओह दिने टाउन हॉल के मैदान में ठेठ भोजपुरी में चित्तू पाण्डेय के भाषण किताबिन में जगह-जगह दर्ज बा. पाण्डेय जी कहले रहले- ‘‘रउआ सभे जवन कुछ कइलीं, एतना बड़ आन्दोलन चलवलीं, ओकरा खातिर हम रउरा सभ के हिरदय से बधार्इ दे तानी. हम त रउरा सभ के सेवक हर्इं, अपना ओरी से जेल से छूटे खातिर हम कवनो जतन ना कइनी हां. हमरा त इहो ना मालूम की र्इ रिहार्इ का होला. बाकिर र्इ साफे लउकत बा, कि र्इ रउरा सभ के ताकत, रउरा दबाव आ रउरा एतना जोरदार आन्दोलन कइला से इ कुल्हि भइल ह. इ सब रउरे बिजय बा. हमार एमें कुछु नइखे. ए आन्दोलन के रउरे नेता बानी, हम ना. जइसन रउरा रार्इ देइब, उहे होर्इ. इहां सुराज आजु भइल. एकर माने गांधी जी के रामराज हो गर्इल, रउरा सभे अपना र्इहां जाइके सब “शान्ति राखीं. सभके रच्छा करीं सभें. र्इहां से जवन सनेस जाइ ओकरा मोताबिक काम करीं सभे.’’

गुस्सा में रहे लोग
अलगा बात बा कि एह भाषण के बाद भी लोग शांत ना भइल. गरम दल के कार्यकर्ता तय कइल लोग कि जहां कब्जा होखे से रहि गइल बा, ओकरो के छोड़ल ठीक नइखे. फेरि त बच्चा लाल, उमाशंकर सोनार, सरयू प्रसाद, विश्वनाथ प्रसाद, हीरा पंसारी,रामचन्द्र प्रसाद, राम अशीष, नन्द किशोर इंजीनियर, शिव पूजन राम, नागेश्वर राय, प्रसिद्ध नारायण सिंह, मुख्तार, जमुना राय, सुदेश्वर सिंह भीड़ के संगे जाइके शहर में जापलिनगंज पुलिस चोकी के फूंकि देहले. धनी अहीर, बेनी अहीर, “याम अहीर, रामनाथ प्रसाद अउर श्रीकांत पाण्डेय अइसन लोग जापलिनगंज पुलिस चौकी पहुंचल अउर ओही के फूंकि दिहल गइल. उहां से एगो सिपाही लाल मुहम्मद के दोनाली बन्दूक हाथ लागि गइल. शहर के चौकी पर कब्जा के बाद भीड़ रेलवे स्टेशन पर आके कुल्हि कागज-पत्तर के नाश कइ देहलसि. एकरा पहिले 12 तारीख से छात्र-नौवजवानन पर अत्याचार करे वाला अफसरन के तलाश शुरू भईल. डिप्टी कलेक्टर मोहम्मद ओबैस के परिवार के बहरा निकालि के बंगला के कुल्हि सामान बर्बाद कइ दिहल गइल. मोहम्मद ओबैस के भीड़ दंड दे, ओकरा पहिले नगीना चौबे के दया आ गइल. एह पर ओबैस के कान पकड़ि के उठक बइटकि कराके छोड़ि दिहल लोग. कमिश्नर के इहां जाये खातिर डिप्टी कलक्टर के गाड़ी देबे वाला रायबहादुर काशीनाथ मिश्र के मकान के तहस नहस हो गइल. बंदी में जे दोकानि ना बंद कइले रहे, ओकरो इहां बहुते हंगामा मचल.

19 अगस्त के छिटपुट घटना त नमूना रहे. एकरा पहिले 12-13 से 18 अगस्त तक जिला भर में थाना-कचहरी पर कब्जा कइके ओकरा पर तिरंगा लहरा दिहल गईल. जहां पुलिस के सिपाही अउर चौकीदार मिलले, उनकर वर्दी-टोपी छीनि के लोग जरा दिहल. इहे ना भइल, जिलाभर में रेल लाइन काटि दिहल गइल अउर सड़क-पुल भी लोग एसे नष्ट कइ दिहले कि अंग्रेजी फौज-सिपाही पहुंचि ना पावे.

विद्यार्थी लोग शुरू कइले रहे
अब देखल जाउ कि बलिया के इ क्रांति असहिं ना भइल रहे. आठ अगस्त के बंबई (अब मुंबई) के गवालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) से गांधीजी ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ अउर ‘करो या मरो’ के नारा दिहले रहनीं. अपना भाषण में बापू के कहनाम रहे कि हर भारतीय आपन भाग्य विधाता खुदे मानि के चले. बलिया के लोग एकर अर्थ अपना तरीका से लगा लिहले. खबर रेडियो के जरिए नौ अगस्त के मिलल रहे. सबेरे 10 अगस्त के भोरे में लालटेन लेके शहर में घूमि घूमि के बंदी के घोषणा भइल. ओह दिने छात्र जुलूस भी निकलल. अगिला दिन के जुलूस अउर बंदी पहिले से भी भारी रहे. शाम होते रामअनंत पाण्डेय के गिरफ्तार कइ लिहल गइल. फेर 12 अगस्त के त विद्यार्थी लोगन पर लाठी चार्ज भी भइल. एहसे आंदोलन बहुते भड़क गइल. सांच पूछीं त बलिया में पहिले से संगठन रहे, बाकिर नेता लोग अगस्त क्रांति के घोषणा से पहिलवे पकड़ा गइल. ओहमे चित्तू पाण्डेय भी रहले. ध्यान दिहल जाउ कि सरकारी रिकॉर्ड भी मानत बा कि बलिया में 42 के क्रांति छात्रन के देन रहे. ‘नकल कानफिडेन्सल डायरी बलिया कोतवाली’ (29 नवंबर,1942) में लिखाइल बा-“अरज है कि मुख्तसरन इन वाकयात की कैफियत यह है कि इस जिले में कांग्रेसी सरगरमी अव्वलन 10 अगस्त,1942 ई. से लड़कों के जुलूस से शुरू हुई.”

हर कोना में हंगामा
एहि बीचे एगो खास बात ई भइल कि 12 अगस्त के विद्यार्थिन पर लाठी चार्ज के बाद संयोग से 13 अगस्त के बिल्थरारोड के पास डंबर बाबा की परती पर मेला लागल रहे. उहां एगो सभा में अगिला दिने रेलवे स्टेशन पर धावा बोले के फैसला भइल. तब 13 अउर 14 अगस्त के राति लगभग एक बजे आवे वाली ट्रेन सुबह आठ बजे पहुंचलि. एक दिन पहिले सभा कइ चुकल बीएचयू के पारसनाथ मिश्र, उमादत्त सिंह, केदारनाथ सिंह अइसन युवा नेता लोगन के ललकारे लागल. तब त लोग कुछ ना कइले बाकिर बाद में लवटि के ट्रेन के आगे रेलवे लाइन काटि दिहल गइल. लोग पीछे ट्रेन में लादल चीनी अउर शीरा लूटि लेगइल. ओह दिने इहो भइल कि ट्रेन में आवे वाला कुछ विद्यार्थी लोकल लोगनि के खूब ललकरले कि चारों ओर रेलवे लाइन फूंका गइल बा. इहवां के लोग कायर बा का?

बलिया बहुते बड़ कीमत चुकवले रहे
फेर त कहां-कहां रेल लाइन कटाइल, सरकारी कचहरी पर कागज-पतर जराइके थाना-कचहरी पर झंडा लहरावल गइल, कहां कहां पोस्ट ऑफिस फुंकाइल अउर बीजगोदाम में लूट भइल, एकर कहानी खातिर कहीं भी जगह कम परी. एकर कीमत भी देखीं कि 12 से 18 अगस्त तक अउर 19 के बाद खासकर 23-24 अगस्त के पुलिस अउर फउज के गोलीबारी में कुल्हि 84 लोग मारा गइल. अकले बैरिया थाना के बहरा जवन स्तंभ बनल बा, तब के कहानी बतावत बा. तब 15 अगस्त के काइयां दरोगा क्रांतिकारी लोगन के थाना पर झंडा फहरावे देहलसि. बाद में अउरी पुलिस बोला के झंडवा निकालि दिहलसि. इ खबर लागते 18 अगस्त के दिने अगल-बगल के गांव के लोग एकट्ठा होखे लागल. ओहि में से कौशल किशोर नाम के नवजवान आगे बढ़ल अउर जल्दी से झंडा लेके छत के ओरि दउरले कि उनकरा के पुलिस गोली मारि दिहलसि. ओह दिन के गोलीबारी में 13 आदमी मौके पर मारा गइल. सात अउर लोगन के घायल होखला से अस्पताल तक जाके जान चलि गइल. अइसन गोलीबारी अउर अत्याचार के घटना दोसरा जगह भी भइल. बलिया शहर के गुदरी बाजार में सात लोगन के पुलिस के गोली से जान चलि गइल. रसड़ा में एगो स्थानीय व्यवसायी अंग्रेजन के साथे होखे धोखा से आंदोलन करे वाला लोगन के अपना हाता में बोलवलसि. उहवां गेट से पुलिस के गोलीबारी में चार लोग शहीद हो गइले. जिला के चरौंवा गांव में पुलिस अफसर कैप्टन मुर के गोली से आंदोलकारी लोगन के बचावे के खातिर मकतुलिया मालिन ओकरा पिस्तौल तनले हाथ पर करिखा पोताइल हड़िया अइसे दे मरली के कैप्टन मुर के हाथ से पिस्तौल फेंका गइल. खिसियाइल मुर बदला में मकतुलिया मालिन के जान ने लिहलसि.

बोलावे के पड़ल अंग्रेजी फउज
कहानी एतने नइखे. एक-एक, दूदू आदमी कइ जगहि मरइले. आठ अगस्त के दिने गांधी जी के आह्वान के बाद बलिया में 19 अगस्त तक कहानी के पहिला अध्याय हवे. जिला भरि के थाना-कचहरी पर कब्जा करत लोग जिला जेल पहुंचल. जनसमुद्र देखि के जिला कलेक्टर जे. निगम के होश उड़ि गइल. पहिले से गिरफ्तार जिला कांग्रेस अध्यक्ष चित्तू पाण्डेय, बालेश्वर सिंह, युसुफ कुरैशी अउर शिवपूजन सिंह के मनावे के कोशिश भइल. बाहर के दबाव में जेल के फाटक खोले के पड़ल. चित्तू पाण्डेय के ऐतिहासिक भाषण ओकरा बादे भइल रहे. कहानी के दोसर अध्याय ब्रिटिश सरकार के गवर्नर ‘जनरल’ हैलेट के बनारस के कमिश्नर नेदरसोल के बलिया के नया जिम्मेदारी देहले से शुरू भइल. नेदरसोल के नेतृत्व में 22-23 के राति बलूच फौज अउर स्थानीय पुलिस रेलवे लाइन ठीक करत बलिया पहुंचलि. ओने 24 अगस्त के बक्सर की ओर से जलमार्ग से मार्क स्मिथ के नेतृत्व में आजमगढ़ की ओर से कैप्टन मुर के संगे भी फउज आ गइल.

अकले उदाहरण बा बलिया
ओकरा पहिले पहिला अध्याय में जेल से बहरा अइला के बाद गांधीवादी नेता चित्तू पाण्डेय लोगन के साहस के प्रशंसा के साथ इहो समझवले कि अब आजादी हो गइल बा. लोग अपना-अपना घरे जाउ अउर शांति से अपना लोगन के रक्षा करे. बहुते लोग लवट गइल बाकिर कुछ लोग बकिया जगह कब्जा करे खातिर रुक गइले. तब 19-20 के विधिवत चित्तू पाण्डेय के हवाले कइके जिला कलेक्टर जे. निगम रवाना हो चुकल रहले. अंग्रेजी सरकार के ई कइसे बरदाश्त होखे. नेदरसोल अउर मार्कस्मिथ के फउज जगह-जगह अत्याचार करे लागल. एकरा बावजूद तब ब्रिटिश सरकार के बहुते झेंपे के पड़ल रहे. ब्रिटिश सरकार में भारत मामला के जवन मंत्री एमरी पहिले अगस्त क्रांति के शुरूए में हलका मानि के चलल रहले, बाद में ब्रिटिश पार्लियामेंट में विधिवत घोषणा कइले कि बलिया पर फेरू से कब्जा हो गइल बा. धनि बाड़े ऊ क्रांतिकारी जवन 1947 के पांचि साल पहिले बलिया के आजादी के संगे एगो संदेश दे देले रहले. इहां यादि कइल जरूरी बा कि 1942 में बंगाल के मिदनापुर में तामलूक अउर महाराष्ट्र में सतारा के कुछ हिस्सा त लंबा समय तक स्वाधीन रहे, बाकिर अंग्रेजी जिला प्रशासन के हटाके आपन राज बलिये में भइल रहे.

(डॉ. प्रभात ओझा स्वतंत्र पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर