Home /News /bhojpuri-news /

Bhojpuri: बनारस 'साढ़े तीन हवेली' क भी शहर!

Bhojpuri: बनारस 'साढ़े तीन हवेली' क भी शहर!

.

.

बनारस अउर साढे़ तीन हवेली! इ बात केहूं के भी अचरज में डालि सकयला. लेकिन इहय अचरज बनारस क असली रज हौ, राज हौ. इ रज अउर राज क आजतक केव थाह नाहीं लगाइ पइलस. लोग अचरज के साथे आवयलन, माथे पर रज लगावयलन, वापस लउटि जालन. इहय बनारस हौ. जवन भी कल्पना में आइ जाय, समझि ल उ बनारस में साकार हौ. बनारस हलांकि साकार अउर निरंकार दूनों क शहर हौ. अपने हिसाब से जे जवन चुनि लेय. बनारस अपने आप में ब्रह्मांड हौ.

अधिक पढ़ें ...

दुनिया क एक सबसे पुराना शहर बनारस ’साढे़ तीन हवेली क शहर’ भी कहाला, इ अपने आप में एक रहस्य हौ. जहां गंगा क चौरासी घाट, हजारन मंदिर, असंख्य इमारत, अनगिनत गली, कई महल-महाल अउर किला मौजूद होय, उहां साढ़े तीन हवेली क एतना रुतबा! खास बात इ कि गिनती भले साढ़े तीन हौ, लेकिन हवेली चार हइन. इ कवन गणित हौ, आजतक पता नाहीं चलि पइलस. बस आपन-आपन कयास हौ. इ साढे़ तीन हवेली क का खासियत हौ, एकरे बारे आगे विस्तार से चर्चा होई. पहिले इ जानब जरूरी बा कि हवेली केके कहल जाला, हवेली का खासियत का होला.

हवेली क मतलब अइसन भवन से होला, जवने में हर तरह क सुविधा मौजूद होय. जिनगी के कवनो गतिविधि बदे बहरे न निकलय के पड़य. इहां इ बात जानब जरूरी हौ कि हवेली क विचार बहुत पुराना हौ, एह से आज के तारीख में जरूरी सुविधा से तुलना नाही कयल जाइ सकत. हवेली के भीतर कई ठे कमरा, अंगना, बरामदा के अलावा पशु अउर घोड़न बदे अस्तबल, कुंआ, दीवानखाना, तहखाना अउर हवादार झरोखा मौजूद रहयं. बनारस में अइसन कई ठे पुरानी हवेली आज भी मौजूद हइन. एहमें देवकीनंदन क हवेली, कंगन वाली हवेली, काठ वाली हवेली, कश्मीरीमल क हवेली, भदैनी हवेली, विश्वंभरदास क हवेली, पांडे हवेली शामिल हइन. पांडे हवेली के नाम से त एक ठे पूरा महल्ला हौ. लेकिन बनारस के साढे तीन हवेली में एकर जिकर नाहीं हौ. जवन चार हवेली साढ़े तीन गिनल जालिन, उ देवकीनंदन क हवेली, कंगन वाली हवेली, काठ वाली हवेली अउर कश्मीरीमल क हवेली हौ. चार के साढ़े तीन काहे गिनल गयल, चार में आधी कवन हौ, बाकी हवेलिन के हवेली काहे नाहीं मानल गयल, एकर जवाब आजतक खाटी से खाटी बनारसी ठलुआ भी नाहीं देइ पइले हयन. बहरहाल, अब साढे़ तीन हवेली पर आवा.

बनारस में देवकीनंदन क हवेली सबसे प्रमुख हौ. रामापुरा महल्ला में मौजूद इ हवेली कवनो डेढ़ सौ साल पहिले प्रयाग के आनापुर क जमींदार बाबू देवकीनंदन सिंह बनवउले रहलन. अंगरेज ओन्हय रामापुरा महल्ला क जिम्मेदारी सौंपलन त उ काशी आइ के रामापुरा में रहय लगलन. एही दौरान उ हवेली क निर्माण करइलन. दस बिगहा जमीनी पर पथरे से बनल इ हवेली विशुद्ध रूप से भारतीय स्थापत्य कला क नमूना हौ. हवेली क मुख्य दरवाजा बहुत बड़ा हौ अउर ओहपर बहुत सुंदर कलाकारी कयल गयल हौ. पांच तल्ला वाली हवेली में कई बरामदा अउर अंगना हयन. हर मंजिल पर चारों ओरी हवादार अउर रोशनीदार कमरा हयन. बतावल जाला कि ओह समय इंग्लैंड से तीन लिफ्ट भारत आयल रहल. एक लिफ्ट काशी में लगावय क योजना रहल. देवकीनंदन उ लिफ्ट अपने हवेली में लगवावय चाहत रहलन. कवनो कारण से लिफ्ट नाहीं मिलि पइलस. एकर ओन्हय एतना दुख भयल कि हवेली बनले के बाद उ कभौ एहमे रहय नाहीं अइलन. इ हवेली उपेक्षित हौ, लेकिन खंडहर एकरे बुलंदी क अहसास आज भी करावयला.

दूसरकी कंगन वाली हवेली पंचगंगा घाटे के बगल में बनल हौ. इ हवेली भी पांच तल्ला क हौ. एकर निर्माण लगभग पांच सौ साल पहिल राजा मानसिंह करइले रहलन. पथरे से बनल इ हवेली में चार ठे बड़ा-बड़ा अंगना हयन, अउर चारों अंगना से लगल 20 ठे बड़ा-बड़ा बरामदा. बरामदा से लगल कुल 48 कमरा हयन. कमरा एह तरीके से बनल हयन कि हमेशा झर झर हवा बहयला अउर सूरुज बिसवय तक कुल कमरन में रोशनी रहयला. हवेली क खासियत इ हौ कि मुख्य दरवाजा के ओरी से देखा त इ एक तल्ला क देखाला, लेकिन गंगा घाटे के ओरी देखा त पांच तल्ला क. कुछ लोगन क कहना हौ कि एही खासियत के नाते एही हवेली के आधी मानल जाला. लेकिन एकरे पीछे कवनो प्रमाणिक तथ्य उपलब्ध नाहीं हौ. मानसिंह इ हवेली बाद में रामगोपाल गोस्वामी के दान कइ देहले रहलन. आज भी ओनकर वंशज हवेली में रहयलन. लेकिन एकर हालत भी अच्छी नाहीं हौ.

ग्वालियर क राजघराना चौखंभा सब्जी मंडी के बगल में एक ठे लकड़ी क हवेली बनवइलस. किवदंती हौ कि कवनो ज्योतिषी लकड़ी के घरे में काशी वास करय क राजा के सलाह देहले रहल. काठ वाली हवेली क मुख्य दरवाजा से लेइके भीतर कुल दीवार लकड़ी से बनावल गइल हौ. हवेली बनावय में बहुत समय लगल रहल, काहे से कि मूसे के बीली नियर पक्का महाल के गलिन में बड़ा-बड़ा लकड़ी पहुंचाइब कठिन काम रहल. लकड़ी क इ आलीशान हवेली पांच मंजिल क हौ. कुछ लोग काठ वाली हवेली के ही आधी मानयलन, काहें से कि इ अकार में छोटी हौ. इ हवेली देखय आज भी लोग पहुंचयलन. साढ़े तीन हवेली क आखिरी किरदार कश्मीरीमल क हवेली सिद्धेश्वरी महल्ला में मौजूद हौ. हवेली क निर्माण कश्मीरीमल नावे क एक ठे रईश 1774 ईस्वी के आसपास करइले रहलन. इ हवेली भी काफी बड़ी हौ अउर दुइ हिस्सा में हौ. हवेली क दीवानखाना, बरामदा, कमरा अउर तहखाना शानदार हयन. लेकिन सब उपेक्षा क शिकार.

इ बात सही हौ कि आज ऊंची अउर आधुनिक इमारत के युग में पुरानी हवेली प्रासंगिक नाहीं रहि गइल हइन. लेकिन काशी के बचावय के हवऽ त एकर पुरातनता हर हाल में बचावय के पड़ी. पुरानी चीजी के, पुराने ढांचा के खतम कइ के कवनो नई चीज जरूर बनि जाई, लेकिन फिर उ काशी न रहि जाई, जवने के देखय-जानय दुनिया भर क लोग इहां आवयलन. इ साढे़ तीन हवेली के ही नाहीं, बल्कि जेतना भी धरोहर हयन, सबके बचावय, सजावय अउर संवारय क जरूरत हौ. पुरानी धरोहर में ही असली बनारस हौ.
(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर