Bhojpuri Special: बनारस में सड़क से ज्यादा गलिन के महत्व बा, अनजान त भुलाइए जाई...

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बनारस में महत्व खाली गली क हौ, एह के नाते बनारसी सड़क क परवाह भी नाहीं करतन. बनारसिन बदे सड़क क जरूरत कभी-कभार जुलूस अउर बरात निकालय के समय पड़यला. जे बनारस के गलिन से अपरिचित हौ, अगर गलती से कवनो गली में घुसि गयल त समझि ल पूरा दिन चक्कर काटि के शाम तक ठेकाने पहुंचि जाय त धनभाग.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2021, 1:21 PM IST
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बनारस देश क अकेला शहर हौ, जहां सड़क क सौगुना गली हइन. बनारस में सड़क क सैर कइके बनारस पर अगर केव फैसला करी त उ बनारस अउर अपने साथ अन्याय करी. हर गली क आपन अलग-अलग नाम अउर पहिचान हौ. हर गली क आपन खासियत अउर इतिहास हौ. असली बनारस गली में ही बसयला, खांटी बनारसिन क गली में ही दर्शन होला. केतना बजार गली में हयन त केतना गली बजार में हइन. बनारसिन क पूरा संसार गली में, त बाकी संसार भी बनारस के गली में हौ. बनारसी बदे गली संसार से ऊपर हौ. गली वाले बनारसी जल्दी सड़क पर नाहीं आवय चहतन. सड़क वालन के बनारस के गली के पार पाइब कठिन हौ. बनारस क गली स्वर्ग भी पहुंचावयलिन त जीवन के भूल-भूलइया में भी उलाझवयलिन. एक गली से तमाम गली क रस्ता खुलयला त एक गली अंधी भी होला, जहां से वापस लौटय के अलावा दूसर रस्ता नाहीं रहत.

काशी खंड के अनुसार, विश्वनाथ खंड-केदार खंड की नाहीं मौजूदा बनारस भी दुइ हिस्सा में बसल हौ -भीतरी महाल (पक्का महाल) अउर बहरी महाल. बनारसी साड़ी क चमक, बनारसी पान, बनारसी कचैड़ी, बनारसी लस्सी, बनारसी मिठाई क महक, बनारसी बोली, बनारसी साहित्य अउर बनारसी संस्कृति क गंगोत्री गंगा किनारे बसल बनारस के भीतरी महाल यानी पक्का महाल के गलिन से ही प्राचीन काल से अविरल बहत हौ. बनारस के जानय के होय त गलिन में टहरान मारा. इहां क सड़क त समझि ल काली क गदेली हइन, छुई-मुई. हमेशा घायल रहयलिन. कवनो सरकार होय, कवनो मौसम होय, जवने भी सड़क पर निकलब, खोदल मिली. जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस क प्रतिनिधित्व करत हयन, कोशिश खूब होत हौ कि सड़क साफ-सुथरा रहय, ओेकर खाज-खुजली, एक्जिमा ठीक रहय, लेकिन बिना खुजली वाली सड़क बनारस के गरिमा के खिलाफ हौ. बनारसी लोग गरमी में नटई अउर चेहरा पर पाउडर नाहीं लगउतन. नटई तक ठंढई भिड़ाइके सड़क पर निकलतय फिरी फंड में काम होइ जाला.

बनारस में महत्व खाली गली क हौ, एह के नाते बनारसी सड़क क परवाह भी नाहीं करतन. बनारसिन बदे सड़क क जरूरत कभी-कभार जुलूस अउर बरात निकालय के समय पड़यला. बनारस क अधिकांश गली अइसन हइन जहां सूरज क रोशनी नाहीं पहुंचत. केतना गली अइसन हइन जहां से दुइ आदमी एक साथ नाहीं निकलि सकतन. अइसने गली क बनावट देखि के विदेशी इंजीनियरन क बुद्धी चकराइ जाला. जे बनारस के गलिन से अपरिचित हौ, अगर गलती से कवनो गली में घुसि गयल त समझि ल पूरा दिन चक्कर काटि के शाम तक ठेकाने पहुंचि जाय त धनभाग. इहां तक कि बनारस क लोग भी दावा नाहीं कइ पउतन कि कुल गली छानि चुकल हयन.

गली से गुजरत समय कब दूसरे गली में पहुंचि जाबा, पता न चली. गली के पहिचान के समर्थन में मोड़ पर न त साइनबोर्ड मिली, न निशान. काफी दूरे पहुंचले पर पता चली कि आगे त रस्तय बंद हौ. फिर उहां से वापस लौटा, जहां से गली में घुसल रहल. केतना गली अइसन हइन कि आगे बढ़ले पर लगी रस्ता बंद हौ, लेकिन गली के अंत में पहुंचले पर पता चली कि पतील क गली सड़क पर निकलि गइल हौ. अइसने गली में जादा दिक्कत राती के होला. भुलाइ गइला के बाद लगी जइसे कवनो पहाड़ी घाटी में भूलाइ गयल हउवा, जहां केव रस्ता बतावय वाला नाहीं होत. अइसन गलिन में लोग भी कम देखालन. जवन देखालन, उ भी रस्ता बतावय के स्थिति में नाही रहतन. कई गलिन क तिलिस्म अइसन हौ कि उहां से बहरे निकलय बदे कवनो दरवाजा या मेहराबदार फाटक के भीतर से गुजरय के पड़यला.
हर शहरन की नाहीं इहां भी सड़क में चार से अधिक रस्ता नाहीं हयन. लेकिन गलिन में चार से चैदह तक रस्ता मिलि जइहय. कवन गली जल्दी घरे पहुंचाई, बिना पूछले न पता चली. जवन गली घरे पहुंचावत हौ, पता चलल कि उहय शमशान भी पहुंचावत हौ. राक्षस के आंते की नाही पक्का महाल क इ भूल-भूलइया दुनिया क एक अनोखा स्थान हौ. इहय कारण हौ कि बनारस के गलिन में बनारसी भले टहरान मारत न देखइहय, लेकिन विदेशी जरूर मिलि जइहय. बंबई में तमाम लोगन के फुटपाथ अउर प्लेटफार्म पर रात बितावय क खबर अक्सर आवयला, लेकिन पुलिस डंडा भी बजावयला. बनारस क गली पुलिस के डंडा से मुक्त हइन. इहां पूरी आजादी हौ. चाहे नंगा घूमा, चाहे गमछा, निगोटा में घूमा. जहां मन करय बइठा, जहां मन करय सूता. जहां मन करय थूंका, जहां मन करय मूता. न त केव रोकी, न डाटी अउर न टोकी.

गावटी गमछा या सिलिक क कुरता पहिनले छाता लगउले बनारसी रईस गलिन में टहरान करत मिलि जालन. केहू भी अनजान आदमी देखी त अचरज होई कि जवने गली में सूरज क रोशनी तक नाहीं नीचे आवत हौ, बरसात क मौसम भी नाही हौ, उहां छाता लगावय क का मतलब भाई? दरअसल, बारिश में भी एह गलिन में भीजय क गुंजाइश कमय रहयला. लेकिन कूड़ा-कचरा के बारिश से भीजय क खतरा इहां हर मौसम में बनल रहयला. बनारसी लोग तीन-चार मंजिले से बिना नीचे झंकले थूंकि सकयलन, पानी फेंकि सकयलन, कूड़ा गिराइ सकयलन. दुकान झारि-बटोरि के पूरा गर्दा-गुबार तोहरे चेहरा पर फेंकि सकयलन. बनारस के लोगन क इ जनमसिद्ध अधिकार हौ. एह सत्कार्य से सम्मानित आदमी जब गली में गरियाई, तब भाई लोग गारी सुनि के मस्त होइ जालन. तह-ए-दिल से ओके साधुवाद देलन. अगर सम्मानित आदमी चुपचाप निकलि गयल त ओनके बहुत दुख होला. दुखी मन से बस एतना कहिअय -मुर्दार निकसल हो.

केतना गलिन में रईसन क पनारा अइसन नफासत से गिरयला कि फुहारा क मजा देला. गरमी के मौसम में राती के समय अइसने गली से टहरान जादा खरतरनाक होला. बनारसी राती के सूतत के समय शंका समाधान में जादा जोखिम नाहीं उठउतन. छत के पनारा से शुद्ध गंगा जल तोहरे ऊपर बरसि सकयला. गुस्सा उतारय बदे तोहार मुंह हौ, चाहे जेतना गरियाइ ल. गली में भोलेनाथ के वाहन से भेंट होइ गयल त नई आफत. अगर गली क एक मुंह बंद हौ त काशी-लाभ निश्चित. अमेरिका क राष्ट्रपति जनरल ग्रांट एक दइया भारत आयल रहलन. अपने महरारू के साथ उ बनारस भी अइलन. जनरल ग्रांट बनारस के ’अ सिटी आॅफ लेंस’ यानी गली क शहर बतउले रहलन. बतावल जाला कि सांड़ महराज ओनके महरारू क स्वागत ओन्हय अपने सींग पर उठाइके कइले रहलन. बनारस में एह तरीके से कुछ लोगन के हर साल काशी लाभ मिलि जाला.



बनारस क गली हनुमान जी के वंशजन क भी बहुत पसंदीदा जगह हौ. ओन्हय इहां हमेशा खेलत-कूदत पइबा. गली से गुजरत समय कभी भी कपारे पर भड़भड़ाइ के पाथर या कवनों समान गिरि सकयला. अइसन घटना अकसर सुनय के मिलि जाला कि बानरी सेना के कृपा से बनारस के फला गली में फला आदमी क स्वर्ग में सीट सुरक्षित होइ गइल.

नगरपालिक अउर राजनीति के कारण आजकल गली क नामकरण होत हौ. लेकिन बनारसी लोगन के एहसे कवनो फरक नाही पड़त. उ अपने अनुसार ही गली क नाम बोलावयलन. केतना गली क पहचान उहां रहयवाली गंदगी से भी हौ. अगर गली में इमली क बीया छिटकल मिलि जाय त समझि ल मद्रासिन क गली हौ. गली में मछरी क गंध आवत हौ त मानि ल बंगालिन क महल्ला हौ. अगर गली में हड्डी पड़ल मिलि जाय त समझि ल महल्ला मुसलमानन क हौ.

मदनपुरा, पांडे हवेली, सोनारपुरा आदि महल्लन में साड़ी बनयलिन अउर रानी कुंआ, कुंजगली आदि महल्लन में बिचालिन. गोविंदपुरा, राजा दरवज्जा, रानीकुंआ, कोदई चैकी में सोना-चांदी क कारोबार होला. कचैड़ी गली क कचैड़ी, ठठेरी बजार क पीतरी क बरतन, विश्वनाथ गली क चूड़ी अउर लकड़ी क खेलौना देश में परसिद्ध हयन. मिसिरपोखरा में जरदा क कारखाना, लोहटिया अउर नखास में लोहा-लकड़ी क कारोबार होला. कुल त कुल बनारस में बाईजी लोगन क धंधा भी गली में ही होला. दालमंडी-छत्तातले, मड़ुआडीह में संझा के आशिकन क जुटान होत रहल हौ. हलांकि अब तस्वीर बदलि गयल हौ. (लेखक सरोज कुमार जी वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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