Bhojpuri: फिल्म कलाकार बापी दा के भूत फोबिया, जानीं का बा पूरा मामला

भुतहा फिलिम “कंकाल” में बापी दा एगो छोट भूमिका में रहले. फिल्म त बनि के रिलीज हो गइल. बाकिर एगो अद्भुत घटना घटल. बापी दा के भूत- प्रेत के सपना आवे लागल. उनुकर घर के पीछे एगो फुलवारी रहे. जब हवा चले त सांय- सांय के आवाज आवे. बापी दा के लागे कि कौनो भूत उनुका घर में आ गइल बा.

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  • Last Updated: April 27, 2021, 8:03 PM IST
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बांग्ला सिनेमा के इतिहास में पहिली हॉरर फिल्म “कंकाल” के मानल जाला. ओही में काम करे वाला एगो कलाकार के मन के ऊपर भूत के डर कइसे समाइल रहे, ईहे रोचक किस्सा रउवां सब के सुनावे जा रहल बानी. एह कलाकार के परनाती (Great Grand Child) हमरा के ई घटना सुनवले. हम उनुका से पुछनीं कि एह घटना के बारे में हम कहीं लिखि सकेनीं? त ऊ कहले कि लिखि सकेनी बाकिर हमरा परदादा के नांव बदल देब. त एही से परदादा के नांव एइजा बापी दा बा.

अब आईं घटना पर. सन 1950 में फिल्म डायरेक्टर नरेश मित्र एगो बांग्ला भाषा में फिल्म बनवले “कंकाल”. ई फिल्म बहुत लोकप्रिय भइल रहे. एह फिल्म के कहानी रहे कि एगो बहुत सुंदर लड़की रहे- तरला. तरला के एगो धनी आदमी रतन संगे बियाह भइल. बियाह त हो गइल बाकिर तरला अपना पुराना प्रेमी अभय के भुला ना सकली. अभय के याद में ऊ दिन- रात तड़पत रहसु. अभय तरला के कमजोरी जानत रहले. जानत रहले कि तरला उनुका पर फिदा बाड़ी. दोसरा के पत्नी के रूप में ऊ तरला के देखि के ईर्ष्या में जरत रहले. एक दिन शराब का नशा में अभय, तरला के अपना फार्म हाउस पर बोलवले आ तरला के हत्या क दिहले. एइजे कहानी एगो रोचक मोड़ पर आ गइल. अब तरला भूत बनि गइली. भूत के रूप में अपना परिचित लोगन से तरला बदला लेबे शुरु कइली. दर्शक एह फिल्म के खूब पसंद कइले सन. एह फिल्म में बापी दा एगो छोट भूमिका में रहले. फिल्म त बनि के रिलीज हो गइल. बाकिर एगो अद्भुत घटना घटल. बापी दा के भूत- प्रेत के सपना आवे लागल. उनुकर घर के पीछे एगो फुलवारी रहे. जब हवा चले त सांय- सांय के आवाज आवे. बापी दा के लागे कि कौनो भूत उनुका घर में आ गइल बा. आपन सामान खुदे कहीं राखि के भुला जासु. आ जब सामान मिले त कहसु कि हम त ई सामान आलमारी में रखले रहनीं हं. ई फलाना जगह कइसे चलि गइल? घर के लोग परेशान रहे. बापी दा के पत्नी ढेर परेशान रहली.

एक बार कौनो कउवा भा कौनो चिरई घर के पीछे वाला फुलवारी में कौनो छोट जानवर, शायद बकरी वगैरह के पैर के हड्डी गिरा देले रहे. बापी दा के ओह दिन से मन में बइठि गइल कि हो ना हो, उनुका घर में भूत रहे लागल बा. खैर घर के लोग कतनो कहे, बापी दा के डर बढ़ते जाउ. एही बीच में घर में एगो घटना घटि गइल. बापी दा के एगो बहिन उनुका घरे 10 दिन रहे खातिर अइली. दुइए दिन का बाद ऊ बेमार परि गइली. बोखार चढ़ल त उतरे के नांव ना ले. बापी दा के लागल कि ईहो भूते के खेला बा. भला होखे डाक्टर के कि ऊ बतवलसि कि बापी दा के बहिन के टाइफाइड भइल बा. अब बापी दा के सपना आवे लागल कि एगो भूत आवता आ कहता कि चल हमरा संगे. हम तोहरा के नीमन जगह पर ले जाइब. तोहरा के सिद्धि मिल जाई. एह सपना का बाद बापी दा के नींद गायब हो गइल. उनुका डर का मारे नींदे ना आवे. अब घर के लोग परेशान. हर आदमी के सूतल जरूरी बा. ना सुतला से त आदमी बेमार परि जाई. सुतला से नया ऊर्जा मिलेला. शरीर आ दिमाग के बहुते आराम मिलेला. बाकिर बापी दा त सुतबे ना करसु. कई रात बीति गइल बापी दा सुतबे ना कइले. तले एगो साधु का बारे में पता चलल. ओह साधु का बारे में प्रसिद्ध रहे कि ऊ हनुमान जी के परम भक्त ह. ऊ हनुमान जी के सिद्ध क लेले बा. बापी दा के घर के लोग ओह साधु का लगे गइल. साधु कहले कि पूरा मामला डिटेल में बताईं सभे.

सिनेमा- “कंकाल” के शूटिंग से लेके बापी दा के सपना तक के कुल कहानी साधु के सुनावल गइल. साधु कहले कि रउरा घर में कौनो भूत- प्रेत नइखे. बापी दा के मन में भूत बा. घर के भूत त भगावलो जा सकेला, मन के भूत भगावे में मेहनत लागी. मन बड़ा बलवान होला. जौन चीज मन में बइठि जाला ओकरा के निकाले खातिर बहुते बलवान इच्छा शक्ति के जरूरत परेला. बाकिर हम उनुका मन से भूत निकालि देब. बाकिर एगो शर्त बा. हम एगो हनुमान मंदिर बनावतानी ओकरा निर्माण में जौन शक्ति होखे दान क देब सभे. घर के लोग दान खातिर तेयार हो गइल. साधु बापी दा के घरे अइले. कहले कि घर के हवन वेदी पर लकड़ी राखीं सभे. ओमें हम मंत्र से आग पैदा क देब. सामने बापी दा के बइठा दीं सभे. हवन वेदी अस्थायी रहे. एगो तांबा के चौकोर हवन वेदी पूजा का बेर रखा जाउ. ओही वेदी के राखि के लकड़ी जोराइल. बापी दा हवन वेदी के एक ओर आ साधु बाबा दोसरा ओर बइठले. साधु बाबा दिव्य मंत्रोच्चार करे लगले. पांच मिनट बीति गइल. लकड़ी में आग ना जरल. घर के लोग बेचैन होखे लागल. बाकिर साधु बाबा मंत्रोच्चार करत चलि गइले. सात मिनट बीतत- बीतत लकड़ी में अपने आप आग जरि गइल. छोटे- छोटे लपट निकले लगली सन. बापी दा चिहुंकि गइले. साधु बाबा जोर से कहले कि आग जरते एह घर से भूत हमेशा खातिर भागि गइल. अब एह घर में हनुमान जी के वास हो गइल. एह घर के केहू ना केहू रोज हनुमान चालीसा के पाठ करी. आ बापी दा के सपना में अब भूत ना आई. ई पूरा प्रक्रिया एक घंटा में संपन्न हो गइल.
बापी दा के घर के लोग साधु बाबा से निहोरा कइल कि काल्हुओ आईं. साधु बाबा तेयार हो गइले. त सचहूं चमत्कार भइल. रात खान ढेर दिन बाद बापी दा के गहिर नींद आइल आ सपना में भूत का बदला महाबीर जी के दर्शन भइल. बापी दा के नाती ई कहानी सुना के कहले कि हमनी के त बंगाली घर में काली जी के पूजा होला. हनुमान जी के त पूजा होत ना रहे. बाकिर तबे से हमरो घर में हनुमान जी के पूजा होला आ हनुमान चालीसा के पाठ होला. अगिला दिने साधु बाबा अइले आ घर के लोगन से कहले कि देखीं सभे, मन जौना चीज पर केंद्रित हो जाई ऊहे चीज बाहर संसारो में देखाई दी. मन अगर घटिहाई में फंसि जाई त हर स्त्री के चरित्र पर संदेह होखे लागी. बाकिर मन अगर पवित्र बा, त हर स्त्री सामान्य आ केहू के मां- बहिन नियर लागी. ठीक ओही तरे मन अगर भूत पर केंद्रित हो जाई त चारो तरफ भूते के कारस्तानी नजर आई. एही से हमनी के पुरनिया कहले बा लोग- मन के हारे हार है, मन के जीते जीत. त जब केहू के मन में कौनो बात के लेके डर पैदा हो जाउ, शंका पैदा हो जाउ त भगवान के शरण में जाईं. आ जब भगवान के शरण में जाईं त पूरा- पूरा उनकर शरणागत होईं. ई ना कि आधा- अधूरा शरणागत बानी आ डेरातो बानी. भगवान पर पूर्ण विश्वास करीं आ निडर रहीं. आजु ई कहानी एसे प्रासंगिक बा कि कोरोना के भयानक लहर चलि रहल बा. आ चारो तरफ भय के वातावरण लउकता. त सावधानी त कुल बरतहीं के बा, भगवान के शरण में भी गइल जरूरी बा. एह घटना का बाद बापी दा एकदम बदलि गइले. अब ऊ हमेशा हनुमान जी के फोटो वाला माला पहिरसु आ निडर रहसु. कहसु कि अब त हम अकेले रातियो खान श्मशान घाट पर चलि जाइब. मन के हारे हार है, मन के जीते जीत. (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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