Bhojpuri: रहस्य से भरल बाउल आ बाउल गीत के परंपरा, जानीं एकरा बारे में...

पंद्रहवीं शताब्दी के किताबन में एह समुदाय के उल्लेख मिलल बा. वृंदावन दास ठाकुर लिखित “चैतन्य भागवत” आ कृष्णदास कविराज के लिखल “चैतन्य चरितामृत” में एकर चर्चा आइल बा. त आमतौर पर दू तरह के बाउल होला लोग- वैरागी आ परिवारी.

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बाउल बंगाल, बिहार, असम, त्रिपुरा आ बांग्लादेश के एगो अइसन समुदाय ह जे हिंदू में बाउल आ मुसलमान में सूफी कहल जाला. ठेहुना का नीचे तक लंबा गेरुआ रंग के चोंगा नियर कुर्ता आ धोती बाउल परंपरा के पहिनावा ह. हाथ में एकतारा भा दू तारा. रउवां बांग्ला नइखीं जानत तबो बाउल लोगन के गीत आ नृत्य सुनि आ देखि के मुग्ध हो जाइब. संस्कृत के “व्याकुल” शब्द से “बाउल” शब्द के उत्पत्ति मानल जाला. कौना चीज खातिर व्याकुल? त अमूर्त ईश्वर खातिर व्याकुल. कई बार ईश्वर के बाउल लोग मनेर मानुष (मन का प्रिय व्यक्ति) कहेला. हालांकि बाउल लोगन के संख्या अपना देश में बहुत नइखे बाकिर ई समुदाय बंगाल के संस्कृति के अटूट हिस्सा बा, प्रिय आ जरूरी हिस्सा बा.

श्रुति परंपरा के कौनो जीवंत उदाहरण देखे के होखे त एकर सबसे बड़ उदाहरण बाउल बा. परंपरा से सुनत आइल गीत पीढ़ी दर पीढ़ी चलत आइल बा. पंद्रहवीं शताब्दी के किताबन में एह समुदाय के उल्लेख मिलल बा. वृंदावन दास ठाकुर लिखित “चैतन्य भागवत” आ कृष्णदास कविराज के लिखल “चैतन्य चरितामृत” में एकर चर्चा आइल बा. त आमतौर पर दू तरह के बाउल होला लोग- वैरागी आ परिवारी. वैरागी बाउल सफेद लुंगी आ कुर्ता पहिरेला लोग आ उनका सेवा खातिर एगो महिला बाउल संगे रहेली, ऊहो सफेद साड़ी पहिरेली. एह लोगन के सेवादासी कहल जाला. वैरागी बाउल के कंधा पर झोला रहेला आ भीख मांग के जीवन चलेला. परिवारी बाउल शादी- बियाह क के परिवार में रहेला लोग. बाउल लोगन में कई गो उप बाउल बा लोग. जइसे- दरवेशी, नेरा, कर्ताभजा, औल आ साईं.

त बाउल गीत- संगीत अध्यात्मिक गीत- संगीत ह. परमहंस योगानंद के अनुसार संगीत के अविष्कार ईश्वर के स्तुति करे खातिर भइल रहे. एही से भगवान कृष्ण के हाथ में बांसुरी, शिव जी के हाथ में डमरू, सरस्वती जी के हाथ में वीणा आदि देखावल गइल बा. त बाउल लोगन में सबसे प्राचीन आ प्रसिद्ध रहले लालन फकीर (1774 -1890). व फकीर से पूछल गइल कि एह संसार में धर्म का ह? त ऊ प्रश्न के उत्तर में प्रश्न कइले- धर्म देखे में कइसन होला? ए विषय पर हम ध्याने नइखीं देले. केहू माला पहिरेला (हिंदू) त केहू ताबीज (मुसलमान). एही से लोग कहेला कि ई लोग अलग- अलग बा. बाकिर जब जनम होला भा मृत्यु होला त केहू अपना संगे धर्म लेके जाला? एपर लोग चुप लगा गइले.

एगो बाउल गीत देखीं-
हमार परान आदमी पराने में बा (आमार प्रानेर मानुष आछे प्राने)

एही से सब खोजता चारो ओर ( ताई हेरे ताए सोकोल खाने)

ऊ पुतरी में बा हमरा आंख के ( आछे से नोयोन तारे), प्रकाश के तीर पर (आलोक धारे)



एही से ऊ ना भुलाला (ताई ना हाराए)

भगवान के वर्णन बाउल समुदाय एतना प्रेम से आ रहस्यमय ढंग से करेला कि सुनि के बड़ा नीक लागेला. एह गीतन में एगो गजब के चुंबकीय शक्ति बा. कहल जाला कि बाउल लोग अपना गीतन में पूरा प्रेम उड़ेल देला लोग बाकिर लिखेला ना कबो. एह गीतन में भगवान से मिलन के गजब के रहस्यमय तड़प रहेला. गीतकार जरूरे गहिर डुबकी लगा के लिखत होई. बाउल लोगन के मान्यता ह कि गीत- संगीत के माध्यम से ईश्वर के भक्ति में डूबे में सहायता मिलेला. एह गीतन में सेक्स के इच्छा पर कंट्रोल करेके हिदायत भी मिलेला. इंद्रिय निग्रह पर जोर रहेला. एकरा बिना भगवान से मिलन ना होई. ठीक भगवद्गीता वाला संदेश. बाकिर एह घरी के लिखल कुछ बाउल गीतन पर कुछ लोग सवाल उठवले बा कि एमें सांसारिकता वाली चीज आ गइल बाड़ी सन. एसे एकर प्योरिटी भा पवित्रता पर आंच आइल बा. बाकिर अबो अधिकतर बाउल लोग पवित्र आ मोहक गीत गावेला. बाजा के रूप में एकतारा भा दूतारा रहेला. एकतारा बांस आ बकरी के चमड़ा से बनेला, अब एकतारा लकड़ियों के देखल जाता. दूतारा कटहर भा नीम के लकड़ी से बनेला. ओमें दू गो तार रहेला. एकतारा में एकही तार रहेला. एक छोटहन ढोलक जौना के दुग्गी कहल जाला ऊ रहेला. ढोलक नियर एगो बाजा रहेला जौना के खोल कहल जाला. एकरा अलावा खड़ताल, मजीरा, बांसुरी त रहबे करेला. बाकिर सबसे बड़ आ जरूरी चीज रहेला गोड़ में खूब गझिन घुंघरू. ऊ घुंघरुए ताल में लयबद्ध झंकार पैदा करेला कि मन मुग्ध हो जाला. कई गो प्रसिद्ध बाउल लोग लंदन के हाइड पार्क अन्य देशन में आपन प्रदर्शन क चुकल बा लोग.

कहल जाला कि कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर भी बाउल गीत परंपरा से प्रभावित रहले. एकरा अलावा काजी नजरुल इस्लाम आ अउरी कुछ प्रसिद्ध लोग एकरा से प्रभावित रहे लोग. एकर रहस्यमता सबसे बड़ आकर्षण के केंद्र ह. एलेन जिंसबर्ग त बाउल गीत के दीवाना रहलन ह. बांग्लादेश के कुस्टिया जिला में हर साल फागुन के महीना में लालन फकीर के स्मरण में लालन उत्सव मनावल जाला. एही तरे सूफी बाउल लोग भी रहस्यमय गीत रचना के माध्यम से ईश्वर से मिलन के तड़प वाला गीत प्रस्तुत करेला. शाह अब्दुल करीम, सूफी बाउल लोगन में बड़ा प्रसिद्ध नांव ह. पश्चिम बंगाल में शांतिनिकेतन में जब पौष मेला लागेला त बाउल गीत परंपरा के सौंदर्य देखे- सुने के मिलेला. कोलकाता में भी कुछ साल से बाउल फकीर उत्सव मनावल जा रहल बा. एगो बाउल समुदाय भवा पगला नामक संत के आपन पूज्य मानेला. पश्चिम बंगाल में सबसे प्रसिद्ध बाउल रहले पूर्णदास बाउल. उनुका के देश के पहिला राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सन 1967 में पूर्णदास बाउल सम्राट के पदबी दिहले. उनुकर जनम 18 मार्च 1933 में भइल रहे. पूर्णदास बाउल कई गो फिल्मन में काम कइले बाड़े. इंग्लैंड के माइक जैगर आ बॉब डिल्लन उनुका के बड़ा मानसु लोग. (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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