Bhojpuri Spl: बंगाल चुनाव से पहिले उहवां होता राम क महातम, ममता दीदी क आवत बाs गोस्सा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) जब बोले लगली त कुछ लोग जय श्रीराम (Jai Shree Ram) क नारा लगा देलें. एपर ममता दीदी नाराज होकर इ बोलि के कार्यक्रम छोड़ कर चल गइलि कि न्योता देके अइसे केहू के बेइज्जत ना कइल जाला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 4:05 PM IST
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बंगाल में चुनाव (Bengal Election) क बिगुल बजेही वाला है. अइसे त बंगाल क सत्ता में बइठल तृणमूल कांग्रेस (TMC) से लेला सब दल चुनाव क बिगुल पहिले से ही फूंक चुकल बा लेकिन चुनाव क असली बिगुल फूंकाइल तबै कहाइ जब चुनाव आयोग की से एकर दिन क घोषना होई. ओही दिन से चुनाव क आचार ब्याबहार क संहिता माने नियम कानून लागू हो जाई कि राजनीतिक दल के का करल मान्य होई चाहे अमान्य. ओकरा पहिले से ही जौन रस्साकसी बा बोलीबाजी चल रहा बा ओमे सबसे ज्यादा चरचा में ह जय श्रीराम का नारा.

भाजपा क कार्यकर्ता नेता एके बंगाल में भी लगा रहल बाड़न. लेकिन इ नारा के ममता दीदी के आगे लगवते उ भड़क जात हईं. अभी हाल ही में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जनम दिन पर एगो सरकारी कार्यक्रम में, जेमे परधानमंतरी मोदी जी भी बइठल रहलें, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब बोले लगली त कुछ लोग जय श्रीराम क नारा लगा देलें. एपर ममता दीदी नाराज होकर इ बोलि के कार्यक्रम छोड़ कर चल गइलि कि न्योता देके अइसे केहू के बेइज्जत ना कइल जाला. उ इहो बोललीं कि इ सरकारी कार्यक्रम ह उहो नेताजी जी क जनमदिन क, ऐमे ई नारा लगावल ठीक नाही ह.

खैर ममता के गोस्सा होइला पर मीडिया में चरचा भी होइल कि उनकर अइसे गोस्सा के चल गइल ठीक रहे कि ना. केहू एके सही बताउलस त केहू गलत. अब सवाल ह कि ममता जय श्रीराम बोलला से काहे नाराज हो जालीं. पाठक लोगन के याद होई कि जब 2019 लोकसभा चुनाव होत रहे त प्रचार खातिर जब उ कौउनो इलाका में घुमत रहिलीं त कुछ लोग उनकरा के देखि के जय श्रीराम बोले लागल त उ रुक गइलीं अउर नारा लगावें वाले लोगन पर आपन गोस्सा भी उतरलीं. ममता के सुभाव के जाने वाला जानेलं कि जउन बात उनके ना पसंद आवे ला त चुप ना रह के उ तुरते आपन भावना जता देहिलीं. शायद उनकर सुभाव के जान के भी उनका के चिढ़ावे खातिर ही भाजपा क कार्यकर्ता उनकरा देखते ई नारा लगावे लागे ला. भाजपा के जय श्रीराम क नारा बंगाल में केतना फायदा पहुंचाई ई त चुनाव के समय ही पता चलीं लेकिन साच त ई ह कि बंगाल क जनमानस में भगवान राम बहुत ज्यादा रसल बसल ना हउअन.

बंगाल क अधिकतर सनातन हिंदू जनमानस में देबी दुर्गा अउर देबी काली रचल बसल हईं. कहे क माने इ कि बंगाल क लोग शक्ति क उपासक हउअन. उहवां शक्ति क परतीक देबी के साथे भगवान शिब भी पूजल जालें. शिब शक्ति के बाद बंगाल क ग्रामीण अंचल में वैष्णव संप्रदाय के माने वालन लोग आवें लं. 15 वीं सती में महान वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु क जनम के बाद बंगाल में वैष्णव संप्रदाय के माने वालन लोगन क संख्या बहुत बढ़ल. बंगाल में इ संप्रदाय क लोगन में भी कृष्ण भकत ही ज्यादा हउअन. बंगाल क मूल निवासी या त देबी दुर्गा ,काली अउर भगवान शिब क उपासक हउअन या फिर वैष्णव संप्रदाय में भगवान कृष्ण क उपासना करे वालन लोग.
मजे क बात इ ह कि पिछला हफ्ता जय श्रीराम क नारा लगावे वाली भाजपा क बंगाल में चुनावी रथ यात्रा क शुरुआत भी वैष्णव संप्रदाय के महान संत व कृष्ण भक्त चैतन्य महाप्रभु क जन्मस्थली नदिया जिला क नबद्वीप से होइल. चैतन्य महाप्रभु के अलावा नबद्वीप के आसे पास वैष्णव संप्रदाय क अउर भी कई संतन क जनमस्थली ह. कृष्ण भक्ति क अंतरराष्ट्रीय संगठन इस्कॉन क भव्य मंदिर भी नबद्वीप में ह. अइसे त देसी बिदेसी भक्तन वाला संगठन इस्कॉन क श्रद्धालु जन क प्रिय भजन ... हरे रामा, हरे कृष्णा... ही इस्कॉन क सब मंदिरन में चैतन्य महाप्रभु अउर भगवान कृष्ण ही पूजल जालें.

वइसे त बंगाल क हिंदू जनमानस में रामानंद सागर क टीवी सीरियल रामायण क बंगला भाषा में प्रसारण से राम क नाम जरूर तनी मनी रचल बसल होई लेकिन बाल्मिकी रामायण अउर तुसलीदास क रामचरित मानस से अलग बंगला में कृतिबासी रामायण ही पढ़ल जाला. कृतिबासी रामायण में रामचरित मानस अउर बाल्मिकी रामायण अलगे कथ्य ह. बंगला में लिखल इ रामायण में सीता क उ अग्निपरीक्षा क उल्लेख न जेमें उ धरती में समा जालीं. कृतिबासी रामायण में लंका विजय से लौटला के बाद राजा राम सीता के साथे अयोध्या क राजकाज चलावें क उल्लेख हव. एकरा अलावा एमे रावण के विद्वान बतावे के साथे रावण क पुत मेघनाद क बीरता के भी खूबे बढ़ा चढ़ा के बतावल गइल ह. एकरा अलावा जइसे देस क दूसरा हिस्सा बिशेषकर उत्तर भारत में रामचरित मानस पढ़ल सुनल जाला वइसन बंगाल क बंगालाभाषियन में इ चलन ना हव. अउर त अउर बंगाल में कृतिबासी रामायण पढ़े वाला बा ओकरा बारे में जाने वाला भी बहुते कम लोग ह.

बंगाल में रामलीला क मंचन बा रामायण पाठ क आयोजन भी नहीं क बराबर ही होला. जौन थोड़ बहुत होला भी त उ उहां रहे वालन गैर बंगाली मारवाड़ी, बिहारी अउर पूर्वांचली समाज के बीचे होला. दशहरा के दिन भी कोलकाता में रावण क पुतला दहन का आयोजन भी पंजाबी समाज ( गैर सिख ) क लोग करेला. अइसन में बंगाल के होवे वाला चुनाव में जय श्रीराम का नारा भाजपा के केतना फायदा पहुंचाई ई देखे वाली बात होई. देखे वाली बात त इ इहो होई कि ममता दीदी क जय श्रीराम क नारा पर गोस्सा के बंगाल क अबंगाली मतदाता उहो बिहारी- पूर्वांचली समाज क लोग कइसे पचा पावत ह. (सुशील कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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