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Bhojpuri में पढ़ें- सिकुड़ गइल बा बंगाल में 'घटक' परंपरा

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“घटक” माने ऊ समुदाय जेकर पेशा बियाह- सादी करवावे के बा. हमनी का ओकरा के अगुआ भा बीचवान कहेनीजा. मान लीं बंगाली समुदाय में कौनो लइका भा लइकी के बियाह नइखे होखत. मन लायक योग्य वर भा वधू नइखे मिलत त ऊ “घटक” से संपर्क करी. “घटक” का लगे पहिलहीं से सैकड़न गो लइका- लइकी के बायोडाटा नोट बा.

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“घटक” बियाह करवला पर कमीशन के रूप में एगो तय धनराशि लीहें आ ज हाली लइका भा लइकी का घरे बातचीत करे जइहें परम स्वादिष्ट भोजन करिहें. आ साधारण भोजन ना- ओमें नाना प्रकार के व्यंजन रही, अचार, चटनी, पापड़ रही. मिठाई रही आ अंत में बहुत बढ़िया पान रही. कतनो मैट्रीमनी वाला वेबसाइट आ गइल बाड़े सन त का ह, “घटक” परंपरा बांचल रही. बंगाल में “घटक” आ “घटकी” दूनो होला लोग. “घटक” पुरुष लोगन के कहल जाला आ “घटकी” स्त्री लोगन के. कई जगह त “घटकी” समुदाय बहुते जबर्दस्त होला. चूंकि “घटकी” के पहुंच घर के भीतर तक माने जनाना लोगन तक रहेला, एसे ढेर लोग “घटकी” से संपर्क करेला ताकि बियाह जल्दी से तय हो जाउ. हं अब पहिले नियर एकर विस्तार नइखे. तबो एगो घटक के दोसरका घटक से दोस्ती बा.

पूरा बंगाल के घटक लोग एक दूसरा के जानता. सबकरा लगे सबकर फोन नंबर बा. हमनिए के समाज में पहिले अगुआ लोग बियाह करववला खातिर रुपया ना लेत रहल ह. बाकिर अब रुपया लेता. पहिले अगुआ गांव- नगर के बुजुरुग लोग रहले ह भा हीत- नात अगुआ होत रहल ह. एसे ऊ लोग रुपया ना ली. ओह लोगन के परोपकार करे में आनंद आवत रहल ह. सुख मिलत रहल ह. बाकिर आधुनिक अगुआ लोग अब बिजनेसमैन हो गइल बा. लइका के बियाह तय कराइ लोग त एक रेट आ लइकी के बियाह कराई लोग त एक रेट. बहुत लोग अइसनो बा जे मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर लइका भा लइकी के प्रोफाइल पर बिसवास नइखे करत. अनजान आदमी का जाने कइसन होई. एही से ऊ अगुआ भा “घटक” के शरण में चल जाता. “घटक” भा “घटकी”  लोग राउर बियाह ओही जगह के आसपास के गांव, शहर भा कस्बा में करा सकेला, जहां राउर घर बा. एही पेशा से कतने “घटक” लोग आपन परिवार के पालन- पोषण करता, घर बनवावता, जमीन खरीदता आ लइकन के बढ़िया स्कूल में पढ़ावता.

पुराना जमाना में जब जमींदारी के प्रथा रहल तब त बंगाल में धनी- मानी लोग “घटक” लोगन के जमीन दान क देत रहल ह लोग. पर्याप्त धन, गहना आ कपड़ा देत रहल ह लोग. बाकिर अब ऊ जमाना नइखे. बाकिर हं, आजुओ “घटक” लोगन में बहुत प्राणी अइसन बाड़े जे खाए के शौकीन बाड़े. भोजन में खास मिठाई आ व्यंजन जरूर रहे के चाहीं. जतने स्वादिष्ट भोजन रही, ओतने लच्छेदार बातचीत होई. लड़की का घरे बढ़िया भोजन आ आदर मिलल त लड़का वाला के बतावल जाई कि संभावित बहू पढ़े में खूब तेज, अति गुणवान, स्वादिष्ट भोजन बनावे वाली, अति सुंदरी कन्या बिया. बांग्ला भाषा के कुल विशेषण ओह लड़की खातिर इस्तेमाल कइल जाई. जदि उत्सुकता से रउरा पूछ दिहनीं कि “घटक” लोग अतिश्योक्ति अलंकार के प्रयोग करेला कि ना? त सरकार, एकर जबाब ईहे बा कि- हं, बढ़ा- चढ़ा के त तनी बोलहीं के परेला. बियाह- सादी में झूठ ना रही त केहू मोहित होई. त देखीं बियाहो- सादी में विज्ञापनवाद/बाजारवाद ढुक गइल बा. कौनो प्राडक्ट के रउरा प्रचार करे के बा त ओकरा बारे में रउरा बढ़ा- चढ़ा के ना बोलब त केहू आकर्षित ना होई. “घटक” लोगन के ई गुण ह कि ऊ लोग वाक्पटु होला लोग आ बातचीत के शैली एतना आकर्षक होला कि रउरा मुग्ध हो जाइब. लागी कि अइसन लइका भा लइकी मिलल त दुर्लभ बा. त कौनो लइका भा लइकी के चारो तरफ एगो सम्मोहन के रचना क देला “घटक” लोग.

अब रउरा मन में सवाल उठत होई कि महराज, रउरा त हेडिंग देले बानी कि सिकुड़ता “घटक” लोगन के व्यापार. त ई काहें? त सरकार, अब प्रेम विवाह के परंपरा तेज हो गइल बा. लड़का- लड़की खुदे आपन शादी तय क लेतारे सन. बापो- महतारी मुंह ताकत रहि जाता. कौनो- कौनो केस में त बाप- महतारी जानतो नइखे आ बेटा भा बेटी बियाह क लेतारे सन. अब गार्जियन लोग लिबरल हो गइल बा. पहिलहीं कहि देता कि बेटा तोर जहां पसंद होखे शादी क ले, बाकिर हमनी के बता दे. हमनी का राजी बानी जा. छिपा के शादी मत करिहे. त प्रेम विवाह के कारन आ कुछ- कुछ मैट्रिमोनियल वेबसाइट के कारन “घटक” लोगन के बाजार ओतना गरम नइखे जतना एगो जमाना में रहत रहे. अइसनो घटना होता कि खूब सुंदर लइका, इंजीनियर- ओवरसियर पद पर अच्छा तनखाह वाला के बियाह में देरी हो जाता. अब त कतने लोगन के चालीस साल के उमिर में बियाह होता. लइका- लइकी अपना कैरियर के पीछे पागल होके बियाह में देरी करतारे सन आ ओकरा बाद ढेर उमिर के कारन योग्य वर- वधू के मिलल मुश्किल हो जाता. अइसने कुल केस में “घटक”/ “घटकी” लोग बहुते मदद करेला.

त रउरा जदि अद्भुत वार्ताकार देखे के होखे त कौनो “घटक” भा “घटकी” से भेंट करीं. मजाक में लोग कहेला कि कौनो चीज के उत्कृष्ट वर्णन कइल सीखे के होखे त कौनो “घटक” के संगे रहीं. रउरा वाक्य विन्यास में अद्भुत आकर्षण वाला शब्द आ जइसन स. बोले के लहजा अइसन कि रउरा मंत्रमुग्ध होके ओकर बात सुने लागब आ समय के होश ना रही. अइसन लच्छेदार भाषा आ मनोरंजक कहानी कि रउरा लगातार सुनि के भी मन ना भरी. वाणी से धन कमाए के कला एह लोगन में साफे देखल जा सकेला.

“घटक” लोग जौन बियाह करावेला ऊ टिक जाला. वर- वधू के जीवन सुखमय रहेला. त भले फीस का रूप में “घटक” लोग रुपया लेता, लेकिन ई कहल अतिश्योक्ति ना होई कि ऊ लोग एक हद तक समाजसेवा भी करता.

(विनय बिहारी सिंह भोजपुरी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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