भोजपुरी में पढ़ें: का पांड़े जी के धोखा दे देले नीतीश जी?

के जानत बा कि गुपतेसर पांड़े जी एमएलसी बनिइये जाइहें, जइसे अबहीं टिकट ना मिलल वइसहीं ओहू घरी कवनो लाफड़ा लाग सकेला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 6:16 PM IST
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मंगरू चौरसिया के पान दोकान पs सिपाही बाच्चा जादो से भेंट हो गइल. हमारा के देखले तs बाच्चा जादो कहले, पांव लागीं माट साहेब, आईं पान खायीं. बच्चा जादो बनारस में सिपाही रहन. बाबूजी बेराम रहन एह से देखे खातिर गांवे आइल रहन. बनारस में रहे से पान के सौखिन हो गइल रहन. इसारा से मंगरू के दू जोड़ी पान बनावे के कहले. दोकान से फरके नीम के छांहा में बेंच धइल रहे. दूनो अदमी ओहिजे बइठ गइनी जा. बाच्चा जादो तनी खिसिया के कहले, देखनी माट साहेब, गुपतेसर पांडे संगे नीतीश जी केतना बड़ धोखा कइले. अब बताईं, जब टिकटे ना देवे के रहे तs नीतीश जी पांडे जी के दोसाला ओढ़ा के अपना पाटी में काहे के भरती कइले ? हम कहनी, अइसन बात नइखे, नीतीश जी जब बोलइले बाड़े तो कुछुओ ना कुछुओ जरूर करिहें. ऊ कतना औफिसरन के विधायक, सांसद बना चुकल बाड़े. अब टिकट बंटवारा में सीट गड़बड़ा गइल तs नीतीश का करस. अभी बतकही होते रहे कि किसोरी लाल पहुंच गइले. किसोरी लाल ओहिजे दवाई के दोकान चलावत रहन. किसोरी लाल के राजनीत में बाड़ा मन लागत रहे.

माया मिलल न राम
किसोरी लाल कहले, दुविधा में दोऊ गये, माया मिली न राम. बिहार के डीजपी रहीं गुपतेसर पांड़े जी के इहे हाल हो गइल. बाड़ा आसरा से उहां के डीजीपी पोस्ट ने इसतीफा देले रहीं कि अबकी बेर तs अलेक्शन में टिकट मिलिए जाई. लेकिन मन के सरधा पूरा ना भइल. जदयू के 115 कंडिडेट के लिस्ट में उनकर नांव नदारत रहे. बक्सर सीट भाजपा के भेंटा गइल. बाल्मीकि नगर लोकसभा उपचुनावो के टिकट ना मिलल. मतलब उनकर चुनाव लड़े के सभ रस्ता बंद हो गइल. टिकट बंटाइला के पहिले पांड़े जी केतना बड़-बड़ बात बोलत रहन. लेकिन जब बेटिकट होखला से करेजा कचोटे लागल तs अब उहां के कहत बानी कि अबकी बेर अलेक्शन ना लड़ब. एह बीच इहो बात कहल जा रहल बा कि जदयू उनका के एमएसली बना के बिधान परिषद में भेजे के भरोसा देले बा.

अब पांड़े जी एमएलसी बनिहें !
बच्चा जादो कहले, गुपतेसर पांडे सकल समाज के अदिमी रहन. उनका साथे निमन ना भइल. अब आगा का होई, के जानत बा ?  के जानत बा कि उ एमएलसी बनिइये जाइहें, जइसे अबहीं टिकट ना मिलल वइसहीं ओहू घरी कवनो लाफड़ा लाग सकेला. भादो में भूख लागल अ कातिक में कोदो मिली, एह भरोसे के जिही ? जवन देवे के बा तवन अबहीं दs, काल्ह के देखले बा ? 2009 में भाजपा के लोग पांडे जी के धोखा देले, अबकी नीतीश जी. राजद छोड़ के अइले चनरिका जादो, जयबरधन जादो के नीतीश जी टिकट दे दिहले लेकिन पांडे जी खातिर उ नाकुर नुकुर करे लगले. जदयू के पांच सीट भाजपा के कोटा में चल गइल. नीतीश जी, पांडे जी खातिर एक्को सीट ना ले सकत रहन ? बक्सर ना तs कम से कम बरहंपुर सीट तs उ मैनेज करिये सकत रहन. लेकिन लागता कि नीतीशो जी के मन नाहिंए रहे. बरहंपुर सीट मुकेश सहनी के बदले पांडे जी के दिहल जा सकत रहे. एकरा बदले मुकेश सहनी के कवनो दोसर सीट दिहल जा सकत रहे. अइसन तs ना रहे कि मुकेश सहनी बरहंपुर खातिर किरिया खा के एनडीए में आइल रहन. उनका के तs जवन सीट दिहल जाइत उहे लेवे के परित. उ तs गाड़ी छूटत रहे कि टेशन पs पहुंचल रहन. उनका के 11 सीट देके किस्मते चमका देलस लोग. मुकेश सहनी के मलाई मिलल अ पांडे जी मुंह ताकते रह गइले. बाह रे भाजपा अउर नीतीश जी !



कतना अफसर के नेता बनवले नीतीश
हम कहनी, देखs बाच्चा अनराज होखे के जरूरत नइखे. नीतीश जी एकरा पहिले कतना आइएएस अउर आइपीएस के विधायक-सांसद बना चुकल बाड़े. 2010 के चुनाव में आइपीएस रहल मनोहर सिंह के मनिहारी से विधायक बनवले रहन. मनोहर जी आइजी रैंक के अफसर रहन. नीतीश जी के सबसे बिसवासी अदमी आरसीपी सिंह जी पहिले आइएएस अफसर रहन. नीतीश जी के कहला पs उ नौकरी से भीआरएस ले के जदयू में शामिल हो गइले. देखs कि आज उ सांसद बाड़े. अइसहीं एनक सिंह आइएएस रहन. नीतीश जी उनका के राजसभा सांसद बनवले. पवन बरमा आइएफएस रहन. उनको के नीतीश जी राजसभा में भेजले. पांडे जी के बिधानसभा चुनाव में भांज ना बइठल तs ई ना कहल जा सकेला कि नीतीश जी धोखा दे देले. नीतीश जी के अगर कुछओ ना करे के रहित तs उ पहिलहीं पांडे जी को भीआरएस लेवे से माना कर दिते.

भीआरएस तs राज सरकार के मंजूरिये से नू हो सकेला. नीतीश जी जब उनकर भीरएश मंजूर कइले बाड़े तs कवनो रास्ता जरूर निकलिहें. हम कहनी, अच्छा बाच्चा जादो ई बतावs कि अगर नीतीश जी के धोखा देवे के रहित तs पांडे जी के 2009 में फेन नौकरी पs रखिते ? उ तs 2009 में भी भीआरएस लेले रहन. नीतीश जी जब उनका के फेन नौकरी पs बहाल कइले तs केतना सवाल उठल रहे. ओह घरी नीतीश सरकार पs आरोप मढ़ल गइल रहे कि नियम-कैदा तूर के पांडे जी के नौकरी दिहल गइल रहे. लेकिन नीतीश जी एकर तनिको परवाह ना कइले. टिकट ना भेंटाइला से पांडे जी तकलीफ जरूर लागल होई लेकिन उचित इहे बा कि उ अभी धीरज धइले रहस.
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