भोजपुरी में पढ़ें: प्राइमरी स्कूल के पढ़ाई प अभी सोचे के बहुत जरूरत बा

स्कूल क बात सुने के ह, लेकिन लईका ना माने त ओकरा से कवनो काम जबरी ना करावे के चाही. तबे सब ठीक हो सकेला.
स्कूल क बात सुने के ह, लेकिन लईका ना माने त ओकरा से कवनो काम जबरी ना करावे के चाही. तबे सब ठीक हो सकेला.

पहिले भभके वाली ललटेन पोंछ-पोंछ के लोग पढ़त रहल ह, लेकिन पूरा परिवार से बहुत कुछ सीखत रहल ह. अब तक खाली स्कूल के भरोसा बा, जवने के व्यवस्था पर कई गो सवाल उठता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 6:18 PM IST
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ज जेसे पूछब, उहे कही की मशीन क जमाना बा. सब काम मशीन से हो जाय, इहे सब केहू  सोचत आउर कहत बाटे. लेकिन अब राउर सोची की जब मशीन आईल रहे त इ कहल गयल रहे कि एकरा से हाथ के अराम मिली. कम मेहनत में अदमी ढेर काम क लेई. लेकिन एकर अनुमान ना रहे कि अदमी क ‘व्यवहार मशीनी’ हो जाई. मेहनत करेवाला मनई रोग-बियाद से दूर रहलन आउर मन से मजबूत रहलन जा. आज मशीन सब बदलत बाड़े. जईसे की पहिले क लईका मेहनत क के, दिमाग पर जोर देके पढ़त रहलन जा. ओकर फयदा इ रहे कि जब जीवन में कुछ नीक-जबुन होखे त लोग ओकर सामना करे, डरे नाही.

भागे नाही. घबराय त तनिको नाही. लेकिन आज जब सब काम मशीन से जल्दी-जल्दी होत बा, जईसे कि एक मिनट में नहाइल, दुई मिनट में बना के खाईल. त लोग अइसाही दू मिनट में अपनी समस्या क समाधानों खोजत हवें जा. जब उ ना मिलत बा त लोग ओकर कवनो दूसर तरीका खोजले की बदले आपन गरदन दबा देत बड़न जा. अब आपे सोची की अईसन मशीन आउर पढ़ाई-लिखाई क कवन फयदा बा. भारत की लईकन की दिल पर शोध कईले से पता चलल ह इनकर दिल दुनिया भर की लईकन से कमजोर ह. एसे कमजोर बा की लोग बढ़िया खाना खईले की नाव से खाली चटर-पटर  खात हवन जा. एकरा से शारीर में शक्ति कम बनत ह त खून क दवरा धीरे होत ह और दिल कमजोर हो जात ह. एकर नतीजा इ ह कि जरुरत परले पर लोग जुझले की बदले खुद क गरदन दबा लेत बाड़ें.

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आज त बहुत सुविधा बा. रोशनी से लेके खईले-पढ़ले तक ले बढ़िया इन्तिजाम बा. तनी पीछे जाईब त देखब की लोग लालटेन जरा के पढ़त रहें. बहुत कम रोशनी में काम चलावे के परे. केहू की घरे ललटेन ना रहे त उ ढिबरी में पढ़े. ढिबरी में दिकत रहे की तनिको हवा बहे त बुता जाय. भभके वाली ललटेन में पढ़ल एतना कठिन रहे कि जईसे एक-दुई पेज पढ़ल जाव, उ भभके लागे. तनीके देरी में शीशा कजरवटा मतीन हो जाय. लेकिन तबो घरे क अदमी इ ना कहें की ललटेन ख़राब बा त मत पढ़ा. एगो मोटहर कपड़ा दे के कहें कि शीशा पोछा आउर पढ़ा. पढ़े वालन क हिमत अईसन रहे कि केहू मना ना करे. दुई तीन घंटा पोछ्त-पढ़त निकाल दें. लेकिन काम बंद ना होखे. इ बात छोट ह लेकिन संघर्ष आउर संतोष करे इहवें से सिख गईलीं जा. बाद में इ बहुत काम आईल.
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सांझी-सबेरे खेती बारी क काम आउर दिन में पढ़ाई. राती क स्कूले क काम. पेड़ की नीचे बईठ के पढ़े के परे. कमरा ना रहे. बुन्नी-पानी आवे त कुल लईका कमरा में भर जाय आउर पढ़ाई बंद. जईसे पानी बंद होखे, बोरिया लेके फिर से ओही पेड़ के नीचे सभ पहुँच जाय. पढ़ाई शुरू. इ हाल रहे परइमरी क. जब छ क पढ़ाई खातिन बड़हर स्कूल में गइलीं जा त लकड़ी क बेंच मिलल. मन में अईसन लागे लागल जईसे की स्तर ऊपर हो गईल बा. ओकरा बाद कालेज में एसे ढेर सुविधा मिलल. समय बदलल त गाँव में बिजुली, फोन आउर टीवी आईल. अब आप देखत बानी की हर आदमी हाथे में एगो छोटहन टीबी ले के घुमत बा. लेकिन येह टीबी आउर पढ़ाई क कवन फयदा बा, जब जीवने बिगरल जात बा?

राउर अब देखब त स्कूल इ दावा करत बाड़न स कि हमहन क गियान लईकन के घोर के पिया देवे के. लेकिन आपे सोची की पढ़ाई घोर के पियावे वाली चीज बा का ? अब क पढ़ाई चामक-चुमक ढेर ह, ज्ञान क बात ओमे बहुत कम बा. जईसे की छोटहन लईकन के पढ़ावे वाला स्कूल लोगन के बड़हर सपना देखावत बाड़न स. सीखवले की नाव पर धंधा चलत बा. पांच-छह साल की लईका-लईकिन से हाथी-घोड़ा बनवावेलन स. एह उमर में बचवन के त बनावे आवत नाहीं. उनकर माई-बाबू बना के देलन जा आउर लईका की नाव पर थपरी बजेले. अईसन सिखले से का होई. बचवन के एतरे सीखवले क मतलब ह खुद के मुरुख बनावल. सोझ बात ह कि ‘लईका बनावे, तब न सीखल भईल’.

आज काल्ह क पढ़ाई अईसने ह. लईकन की सोच-समझ की अनुसार कुछऊ नईखे होत. बजार में बेचे वाला मनई मतीन शिक्षा बिकात बा. अब हालत इ बा की एक्को लईका-लईकी अपनी समझ से काम ना करत बाड़ें. सब भीड़ में भागल जात बा. दस-पांच बरिस मेहनत कईले की बाद जब कुछऊ ना मिलत ह त लईका अपनिये जान क दुशमन बन जात बड़न स.

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शिक्षा क काम मनई के समझदार बनावल ह. पढ़ल-लिखल मनई आपन समझ से काम करेला. सही गलत जाने ला. केहू गलत करे ला त ओकरा के समझावेला. लेकिन अबकर शिक्षा बदल गईल बा. ओकरा में अईसन कुछऊ देखात नईखे. स्कूल वाला लईकन के बड़हर सपना देखा देत बाड़न स आउर लईका लोग ओही सपना क गठरी बान्ह के घूमत बाड़े. जब थक जात हवन त गलत सही कवनो काम क के अपना के साबित करे क कोशिश करत हवें. यह कुल में एतना दबाव हो जात बा की सपना क गठरी कहीं गिर-पर जात बा. लईका क चमक ओराय जात बा. ओहर माई-बाबू सपना देखत रहलन की लईका कुछ बन जाई त सहारा होई. लेकिन सब उलट जात बा. लईका खुदे सहारा खोजे लागत बा.

देखि इ ठीक ह की मनई के समय की संगे चलल जरुरी ह. इहो ठीक ह की ना चली त समाज से बहरियावल जा सकेला. लेकिन एकर मतलब इ ना ह की जवन काम कईले में तनिको रूचि ना ह, उहो कयल जाव. आप सब एतना त जनबे करीला की पसंद क काम कईले में ढेर मन लगेला आउर सफलतो खूब मिलेले. अब अईसन काम करब जवन पसंद ना होखे, त ओकरा में केतनो गुड़ डालब, गोबर होत देर ना लागी. सपना देखल आउर आगे बढ़ल बहुत जरुरी ह. लेकिन लईका खाय-पी के स्वस्थ रहे, इहो जरुरी ह. लईका कवनो चीज कईले से पाहिले ओकरा के समझे. अपनी उमर आउर समझ क अनुसार आगे बढ़े. तबे उ कुछ बढ़िया क सकेला. जीवन में सफलता आउर संतुष्टि दूनो बरब्बर होखे के चाही.एगो काम क लेब आउर दूसरका ना भईल त दिक्कत बनल रही. एहिसे भीड़ में भागल ठीक ना ह. लईका-लईकी के ओकरा समझ आउर प्रतिभा की अनुसार आगे बढ़ावल ठीक ह. स्कूल क बात सुने के ह, लेकिन लईका ना माने त ओकरा से कवनो काम जबरी ना करावे के चाही. तबे सब ठीक हो सकेला.
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