भोजपुरी में पढ़ें: भोजपुरिया भदेसीपन के पहचान रघुवंश बाबू

भोजपुरी में पढ़ें: भोजपुरिया भदेसीपन के पहचान रघुवंश बाबू
रघुवंश प्रसाद सिंह के इ ठेस भदेसपन उनकर पहिचान बनि गइल रहल हा.

नरेगा के नाम से आज के मनरेगा कार्यक्रम शुरु करे वाला रघुवंश बाबू ही रहला हां. उन कर गांव आ गरीब से जुड़ाव के नतीजा रहल हा कि आज भी ये योजना के लाभ हर तरफ मजदूरन के मिलत बा. उनका ये सब गुन के पहचाने वाला में कांग्रेस के परधान मंत्री मनमोहन सिंह भी रहलन हा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2020, 5:40 PM IST
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घुवंश बाबू. राजनीति में इ नाम लेहते बिहार के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के चेहरा सामने आ जाला. अभी त दुइए दिन भईल, जब रघुवंश बाबू दुनिया छोड़ि के चलि गइले. बिहार में रघुवंश बाबू के मतलब अइसन चेहरा जेकरा के देखि के कवनो भदेस-ठेठ भोजपुरिया आदमी के कल्पना कईल जा सकेला. रघुवंश अइसे ते वैशाली के रहे वाला रहले. इ जिला के पैदाइश मुजफ्फरपुर से ह. दुनो जिलन में पश्चिमी मैथिली, वज्जिका अउर भोजपुरी इहां के भाषा ह.

रघुवंश बाबू के भोजपुरी से बड़ा लागाव रहल. बहुते राजनीति के चरचा पर कइले पर एहि लेख  के मतलब बदलि जाई, तबो कहल जरूरी बा कि रघुवंश बाबू के मुंह से कवनो झटका वाली बात भोजपुरिए में निकलत रहे. कोरोना के इलाज से ठीक होखला के बाद अउरि दिल्ली एम्स में भरती होखला के पहिले रघवंश बाबू आराम करे खातिर गांवे चलि गइल रहले. ओइजा पटना से आके एगो नवजवान नेता उनकरा से मिले के चाहत रहले. एह पर रघुवंश बाबू सुनते बोलि परले- ना अबहीं मति आउ, बाद में बताइब.

रघुवंश बाबू के इ सपाटबयानी उनकर ईमानदारी के कारन बनल रहि गइल. इ ईमानदारिए ह कि विपक्ष में रहि के सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमर के भी ऊ विपक्षी गठबंधन खातिर जरूरी जमझत रहले. अभी दुइ हजार उनइस के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के हारला के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह नीतीश कुमारो के महागठबंधन में शामिल होखे के नेवता दे दिहले.  इ बात लालू परसाद के बेटा अउर पहिले के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के ठीक ना लागलि. केहू के कवनो बात ठीक लागे चाहे ना लागे, रघुवंश बाबू के जवन ठीक लागल बोलले.



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सीनियर पत्रकार वीरेंद्र सेंगर एक जगह बतावत बाड़े कि रघुवंश बाबू जब मंत्री रहले उनकरि बेटी एगो अखबार में उप संपादक रहलि. उ लड़की दिल्ली में बस से ऑफिस आवे. सेंगर जी रघुवंश बाबू से पूछले कि आपन ईमानदारी में बेटी पर काहे अत्याचार करत बानी. एपर रघुवंश बाबू बोलि पड़ले कि जवन करि सकत बानी, उ करत बानी. राजद अइसन पार्टी में रहला के भी उ आपन मजबूरी मानत रहले. इ काम सेकूलर जगहि के तलाश में कइले रहले. एकरि तुलना ऊ अइसन ईमानदार पत्रकार से कइले, जे आपन बात राखे खातिर टैक्स बचावे वाला अखबार मालिक के इहां भी नौकरी करे ला. लागत बा कि ए हालि से रघुवंश बाबू उबिया गइल रहले हा. तब ऊ अपना निधन से कुछ दिन पहिलवे खुला खत में कहले कि अब पार्टी के पोस्टर पर पांचि गो महापुरुष के ना, घरे के पांचि आदमी के फोटो लागत बा.

रघुवंश प्रसाद सिंह के ईमानदारी केंद्रीय मंत्री के रूप में इ रहे कि बाकी मंत्री लोग आपना सचिव के माध्यम से मंत्रालय के रूप रेखा बनावत रहले, त रघुवंश बाबू खुदे बइठि के नोट बवानसि के कवनो मनका योजना खातिर पइसा कहां से आई. उनका ए गुन पर परधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह बहुते खुश होखसु. एहि कारन मनमोहन सिंह रघुवंश बाबू के विपक्षी नेता अइसन बोलला के भी पचावत रहि गइले. बहुत कम लोग जानते होई कि मनरेगा, जवन नरेगा के नाव से शुरू भइल रहे, ओकरा के रघुवंशे बाबू लेके आइल रहले. ओकर क्रेडिट लेबे के कोशिश राहुल गांधी खूब कइले. एहि बात के खुलासा परधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहल संजय बारू भी अपना किताब एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर में कइले बाड़े.

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रघुवंश बाबू क्रेडिट के ना, काम के चिंता कइले. सरकार जवन होखे, मनरेगा चलत बा. रघुवंश प्रसाद सिंह के इ ठेस भदेसपन उनकर पहिचान बनि गइल रहल हा. जे गणित के प्रोफेसर होखे, चारि हालि के सांसद अउर केंद्र में मंत्री भी, उ कान्हा पर चादरि रखि के कहीं चलि दे. इ रघुवंश बाबू के सादगी रहल. इ सादगी उ दिल्ली में रहसु, भा मुजफ्फरपुर में, हर जगहि कायम रखत रहले. भोजपुरिया क्षेत्र के खास त्योहार खींचड़ी माने मकर संक्रांति पर रघुवंश बाबू के निवास पर खिचड़ी भोज जरूर होखे. इ कुछ लाइन में बहुत कम कहल गइल बा. एगो लाइन अउरि कि रघुवंश बाबू के दिल्ली, पटना चाहे मुजफ्फरपुर, कहीं आपने मकान नइखे. गांव के मकान भे कवनो ग्रामीण से अलगा नइखे.
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