Choose Municipal Ward
    CLICK HERE FOR DETAILED RESULTS

    भोजपुरिया माटी के लाल रहन लालबहादुर: ना अइसन नेता ओह घरी रहन, ना अबहीं बाड़न

    शास्त्री जी के सादगी के अनगिनत कहानी बा.
    शास्त्री जी के सादगी के अनगिनत कहानी बा.

    शास्त्री जी भोजपुरिया माटी के लाल रहीं. उहां के जनम मोगलसराय में भइल रहे अउर पढ़ाई बनारस में. एक दिन उहां के भारत के परधानमंतरी बननी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 2, 2020, 6:23 PM IST
    • Share this:
    लाल बहादुर शास्त्री जइसन नेक अउर निक नेता देश में ना भइले. नामी गिरामी पतरकार कुलदीप नैयर जी शास्त्री जी के प्रेस सलाहकार रहीं. कुलदीप जी के शास्त्री जी के परछाहीं कहल जातs रहे. जब शास्त्री जी के ताशकंद में प्राण छूटल रहे तs कुलदीपो जी उनके संगे रहीं. कुलदीप जी उनका बारे में बहुत कुछ लिखले बानी. कुलदीप जी कहनाम रहे कि शास्त्री जी जइसन सादगी वला नेता ना ओह घरी रहन ना आज बाड़न. गोविंद वल्लभ पंत के बाद शास्त्री जी गृहमंतरी बनल रहीं. शास्त्री जी के गृहमंत्रालय के भार मिलल तs उहां के पंतजी के टाइम के कुल्ह औफिसरन के बदल दिहनी. लेकिन प्रेस सलाहकार अउर डराइभर उहे रखनी. एह से कुलदीप जी हरमेसा शास्त्री जी के अदब मानत रहीं. शास्त्री जी भोजपुरिया माटी के लाल रहीं. उहां के जनम मोगलसराय में भइल रहे अउर पढ़ाई बनारस में. एक दिन उहां के भारत के परधानमंतरी बननी.

    रोड के किनारा जब शास्त्री जी पियले ऊख के रस
    एक बेर कुलदीप जी शास्त्री जी संगे कार में बइठ के कुतुबमिनार गइल रहीं. उहवां से लौटत घरी रास्ता में शास्त्री जी एक जगे ऊख के रस बेचात देखले. खांटी भोजपुरिया शास्त्री जी लइकाईं में केल्हुआडी के खूब आनंद उठवले रहन. शास्त्री जी, कुलदीप जी से पूछले,  ऊख के रस पीयेके बा ? कुलदीप जी जब हुकांरी भरले तs शास्त्री जी कार रोकवा के उतर गइले. इशारा से कुलदीपो जी के उतरे के कहले. दूनो अदमी ऊख के ठेला भीरी पहुंचले. तीन गिलास रस के मंगाहट भइल. शास्त्री जी पहिला गिलास कुलदीप जी के देले, फेन अपने लेले. एकरा बाद शास्त्री जी ठेला वला के कह के एक गिलास कार डराइभर के भेजवा देले.  ई देख के कुलदीप जी चिहाइल रह गइले. देश के गृहमंत्री रोड के किनारा खाड़ा होके के ऊख के रस पीयता अउर डराइभर कार में बइठ से माजा से रसविभेर भइल बा. कुलदीप जी, लिखले बाड़े, शास्त्री जी ओह घरी गृहमंत्री रहीं. उ चहिते तs कतना अफसर लोग ऊख के रस ले हाजिर हो जाइत. ना कुछुओ तs एक बोली पs ठेले वला रस लेके दउरल आइत. लेकिन शास्त्री जी अइसन कुछुओ ना कइले. उ खुदे ठेला भिरी चल गइले. आज के समय में का अइसन हो सकेला ?

    गांधी जयंती पर विशेष: जानीं भोजपुरी से गांधी जी के केतना नजदीक के संबंध बा
    जब बेटा चढ़ले सरकारी कार पs तs देवे के परल किराया


    शास्त्री जी सरकारी सुविधा के निजी फैदा उठावे के खिलाफ रहीं. जब उहां के प्रधानमंतरी रहीं तs चढ़े खातिर एम्पाला शेवरले कार मिलल रहे. ओह घरी अइसन नामी कार पs चढ़ल बहुत शान के बात मानल जात रहे. लेकिन शास्त्री जी सरकारी काम के अलावे एह कार के इस्तेमाल ना करत रहीं. एक दिन शास्त्री घरे रहीं. कार हाता में खाड़ा रहे. ई देख के उनकर लइका सुनील शास्त्री जी कार लेके कहीं चल गइले. जब उ लौवटले तs शास्त्री जी अनराज हो गइले. डराइभर के बोला के कहले, रजिस्ट में लिखs कि कार अतना से अतना किलोमीटर निजी काम खातिर चलल. फेन अपना मेहरारू ललिता जी के बलवले अउर कहले कि जतना किलोमीटर कार चलल बा ओकर सरकारी किराया जोड़ के पइसा सरकारी खाता में जमा करा देस. जब ले पइसा जामा ना भइल शास्त्री जी उहां से उठले ना.

    जब शास्त्री जी मरले तs बैंक में ना रहे रोपेया
    कुलदीप जी लिखले बाड़े. शास्त्री जी के गुजरला के बाद जब ऊ ताशकंद से भारत आइले तs कांग्रेस अधयछ कामराज उनका के बोलवले. कामराज बड़हन नेता रहन अउर शास्त्री जी के हाल जनत रहन. उ कुलदीप जी से पूछले, का कुछ रोपेया कौड़ी बा कि जवना से शास्त्री जी के परिवार के खर्ची चल जाव ? कांग्रेस में ई बात मशहूर रहे कि अगर शास्त्री जी के कवनो बात जाने के होखे तs कुलदीप जी से बात करs. कुलदीज जी कहले, बैंक में जवन पइसा बा उ नामे मातर के बा. ओह से घर के खार्चा ना चली. ओह घरी कामराज के चलती रहे. कामराज सरकार के कहले कि अइसन कानून बने जेकरा से पहिले के परधानमंतरी के रहे के घर अउर कुछ पइसा मिल जाए. एकरा बाद कानून बनल तs शास्त्री जी परिवार के कुछ सहारा मिल गइल.

    मजरूह सुल्तानपुरी जयंती विशेष: चिरई का जालवा में फँसल बहेलिया गोहार करेला

    जब शास्त्री पइसा कमावे खातिर अखबार में लिखले लेख
    कांग्रेस अधयछ कामराज के कहला पर कांग्रेस के सभ उमिरदार मंतरी लोग पद छोड़ देले रहन. शास्त्री जी के भी मंतरी पद से हटे के पड़ल रहे. एक दिन कुलदीप जी शास्त्री जी के घरे पहुंचले तs देखले कि सब कोठरी अन्हारे बा. कुलदीप जी खोजत खाजत शास्त्री जी भी पहुंचले तs पूछले की ई अन्हार काहे कइले बानी. तs शास्त्री जी कहले, अब मंत्री नइखीं तs कइसे बिजली के बिल जमा कर पाइब. एह से बत्ती बोता के रखले बानी. कुलदीप जी के मोताबिक, एह घरी सांसद के रूप में शास्त्री जी के 500 रोपेया महीना मिलत रहे. कुलदीप जी शास्त्री जी के सलाह देले कि अगर रउआ अखबार में लेख लिखब तs कुछ पइसा भेंटा जाई. शास्त्री भले संस्कृत में डिगरी लेले रहीं लेकिव उहां के अंगरेजियो बहुत बेजोड़ रहे. एकरा बाद शास्त्री जी, हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू, अमृत बाजार पत्रिका में लेख लिखे लगनी. जवना से उनकर कुछ आमदनी बढ़ गइल. शास्त्री जी के सादगी के अनगिनत कहानी बा. उहां के भले आज दुनिया में नइखीं लेकिन उहां के नाम हरमेसा अमर रही.
    अगली ख़बर

    फोटो

    टॉप स्टोरीज