भोजपुरी में पढ़ें: नौकरशाही में ना, असली ‘सेवा’ त राजनीतिए में आके होला

गुप्तेश्वर पांडे के सेवा त उनुका चुनाव जितला पर पता चली. तले रउवो सब आपन नजर गड़वले रहीं.
गुप्तेश्वर पांडे के सेवा त उनुका चुनाव जितला पर पता चली. तले रउवो सब आपन नजर गड़वले रहीं.

बिहार पुलिस के डीजीपी रहि चुकल गुप्तेश्वर पांडे के राजनीति के मैदान में उतरले के घोषणा के बाद से समाजसेवा खातिर बड़की सरकारी अफसरी छोड़ला पर कुछ सवाल जरूर खड़ा होत बाने स. समाजसेवा खातिर केतना जरूरी बा खादी पहिनल अउरी राजनीति में उतरल.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 12:41 PM IST
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प्रशासनिक सेवा (आईएएस आ आईपीएस) के सब अफसर ना, लेकिन एह समुदाय के कुछ अइसन प्राणी के दर्शन रउवां जरूर भइल होखी जे रिटायर भइला का पहिलहीं एतना आकुल- ब्याकुल हो जाला लोग कि रिटायर भइला के साल- डेढ़ साल पहिलहीं वालंटरी रिटायरमेंट (वीआरएस) ले लेला लोग. कारण? ‘सेवा’ करेके चाहता लोग. प्रशासनिक सेवा के लोगन के नौकरशाह भी कहल जाला. एह पांति में नवका नाम बा बिहार के दू- चार दिन पहिले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद से वीआरएस लेबे वाला गुप्तेश्वर पांडे के. उनुकर इच्छा बा कि राजनीति में आके खूब जनसेवा करीं. त जब डीजीपी रहले ह त ऊहो  त जनसेवे ह. पुलिस के सबसे बड़का अफसर रहिके गरीब- दुखिया, पीड़ित- वंचित लोगन के ढेर सेवा कइल जा सकेला.

बलुक ओह सेवा से बढ़िके राजनीतियो में कौनो सेवा नइखे. बाकिर बिहार में विधानसभा चुनाव आके खड़ा हो गइल बा. हर विधानसभा सीट खातिर का जाने केतना लोग लाइन में लागल बा. एही बीच जदि गुप्तेश्वर बाबू के कौनो बड़हन पार्टी, टिकट के गारंटी दे तिया त अफसरी के सेवा के लात मारि के राजनीति के सेवा में आवे में का दिक्कत बा. अफसर बनिके सेवा कइला में कौनो हरज नइखे. बाकिर तबो विधायक बनिके सेवा कइला के बातिए कुछु अउरी बा. हो सकेला कि चुनाव जीत जासु आ गुप्तेश्वर बाबू मंत्रियो बनि जासु. त सेवा के अनंत अवसर पा जइहें. कुछु लोग कहता कि गुप्तेश्वर बाबू नोकरियो में रहले ह त राजनीतिक लोगन के खुस करेके हाल जानत रहले ह. एक हाली नोकरी से इस्तीफा देके चुनाव लड़िए चुकल बाड़े. आ फेर पुलिस के नोकरी में आ चुकल बाड़े.

सब केहू इस्तीफा देके वापिस ओही पद पर आ ओही बिभाग में आ सकेला का? ई त तबे संभव बा जब अफसर राजनीतिक बिरादरी में आपन साख मजबूत कइले होखे. आ साख एहीतरे मजबूत ना होला, ओकरा खातिर कई गो आवश्यक गुण होखे के चाहीं. ईहे गुण राउर योग्यता के पैमाना बनी. राजनीतिक व्यक्ति का चाहता, ओकरा बोले के पहिले रउवां भांपि लिहनी कि ना?, आ भांपि लिहनी त तुरंते पूरा क के देखा दिहनी कि ना? एह कसौटी पर खरा ना उतरबि त रउवां चाहे कतनो बड़ अफसर होखीं, राजनीतिक लोगन के दुलरुआ ना होखबि. निष्ठा के ई नया परिभाषा ह.



दोसरका बड़का अफसरन के ऊ टोली बा जवन बाकायदा रिटायर होके राजनीति में आवे खाति छपिटाता. उत्तर प्रदेश के रिटायर आईएएस सूर्य कुमार शुक्ला के बारे में एह बाति के चर्चा बा कि ऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चिठी लिखले रहले ह कि रउवां नेतृत्व में हम राजनीतिक सेवा करेके चाहतानीं. हुकुम दीं कि हम का करीं. भगवान करसु कि ई चर्चा झूठ होखो. बाकिर का जाने कहां से कुछु लोग उनुकर चिठी  लीक करेके दावा करता. एतरे त देखीं- राजीव गांधी पाइलट रहले बाकिर उनुकर महतारी इंदिरा गांधी उनुका के राजनीति में ले अइली. त राजीव गांधी कई गो सीनियर अफसरन के, जइसे- अजित जोगी, मणिशंकर अय्यर, अरुण नेहरू वगैरह- वगैरह के राजनीति में खींचि ले अइले.
यशवंत सिन्हा (आईएएस), जगजीवन राम के बेटी मीरा कुमार, नटवर सिंह, हरदीप सिंह पुरी (आईएफएस), अरविंद केजरीवाल, बिहार कैडर के राजकुमार सिंह, महाराष्ट्र कैडर के सत्यपाल सिंह आ अउरी कई लोग जे बड़का अफसरी के छोड़ि के राजनीति में आइल आ ‘सेवा’ के मौका पावल. बाकिर हमनी के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर (संक्षेप में एस. जयशंकर) विदेश सचिव से रिटायर भइला का बाद, भारतीय जनता पार्टी के सदस्य भइले आ विदेश मंत्री हो गइले. थोड़ ही दिन बाद राज्यसभा से चुना गइले. एस. जयशंकर त तेज तर्रार विदेश मंत्री साबित भइल बाड़े. बाकिर प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आके कुल्हि लोग आपन योग्यता साबित ना क पावल. जौना ‘सेवा’ के साध में राजनीति में आइल लोग, ऊ आपन सेवा ढेर आ दोसरा के सेवा कम हो गइल. सत्ता के सुख के कौनो जवाब नइखे.

ऊ सुख नौकरशाही में नइखे. सत्ता सुख में आदमी राजा नियर रहेला आ नौकरशाही में सत्तारूढ़ दल के आदेशपालक के रूप में. त जब पूरा जिनिगी आदेश पालन कइके  खपे लागे ला, कुछ नौकरशाह लोगन के ज्ञान जागेला कि एह नोकरी में दोसरा के आदेश बजावते जिनगी पार लागि जाई. त काहें ना एक हाली राजनीतिक सत्ता के सुख भोगल जाउ. अब ई बाति दोसर बा कि राजनीति में ढुके के चांस सबका के ना मिली. केहू- केहू भाग्यशाली नौकरशाह होला जवन ई सुख प्राप्त कइके आपन जीवन धन्य करेला. एस जयशंकर अपवाद बाड़न. ऊ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गरिमा के बढ़ावतारे. कौनो बड़हन मुद्दा पर जोरदार वक्तव्य दे तारे आ राष्ट्रीय हित के सर्वोपरि राख तारे. बाकिर अइसन समर्पण सबका में नइखे देखे के मिलल. त ढेर लोग त सर्वोच्च सत्ता सुख, सम्मान आ लोकप्रियता खातिर राजनीति में आवेला.

सत्ता सुख अइसन ह कि बड़े- बड़े लोगन के ओइजा से हटे के मन ना करे. केहू तरे सत्ता से जुड़े के जोड़- तोड़ के योग्यता रहेला अइसन लोगन में. बाकिर राजनीति में आइल सब नौकरशाह सत्ता सुख के मलाई में ना डूबे ला लोग. कुछुए लोग डूबेला. बाकिर जवना ‘सेवा’ के सरधा से ऊ लोग आवेला ऊ लउकेला ना. अब ई मति कहीं कि ना लउकेला त रउवे आन्हर बानी. त हम त वोटर हईं. का जाने कतने हाली आन्हर भइल बानी आ फेरु आपन इलाज खुदे क के ठीको हो गइल बानी. त ठीक बा. रउवे सभ बताईं कि नौकरशाह जब राजनीति में जाला त सेवा के कटगरी केतना बढ़ि जाले आ सेवा कइसे रूपांतरण होला. गुप्तेश्वर पांडे के सेवा त उनुका चुनाव जितला पर पता चली. तले रउवो सब आपन नजर गड़वले रहीं.
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