भोजपुरी में पढ़ें: भोजपुरी सिनेमा के राजनीति से नाता

कला के सहारे लोगन के दिल जीते वाला कलाकार हमेशा से राजनीति में सफल भइल बा लोग. बात चाहे अब के होखे चाहे पहिले के. बिहार में अबकियो  कई लोग चुनावी मैदान में उतरे खातिर रियाज करत बा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 9:05 AM IST
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बिहार विधानसभा चुनाव के डुगडुगी बाजते राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गइल बा. कोरोना के कारण भलहीं एह पारी चुनाव प्रचार अपना परंपरागत रूप में नइखे लउकत बाकिर कुछ गैर पारंपरिक चुनावी चकलस त लउके के शुरू होइये गइल बा. चुनाव प्रचार में भोजपुरी गीत एगो जहां बड़ फैक्टर रहत रहल ह आ बाटे ओहिजे चुनाव में फिल्मी हस्ती के इस्तेमाल चाहे बतौर उम्मीदवार सहभागिता भी आम बात हो गइल बा. भोजपुरी सिनेमा के राजनीति से नाता बहुत पुरान त नइखे बाकिर जब से भइल बा, अलबत्त नू भइल बा. ना लहर टूटता, ना लड़ी. लगातार दू बार से विधायक बनत आ रहल गीतकार विनय बिहारी एहू बार लौरिया सीट से ताल ठोक देले बाड़न. जहां एक ओर अबकी  हैट्रिक लगावे के मौका बा, उहवें  बदलल राजनीतिक परिस्थितियन में महागठबंधन के दावेदारी से रोमांचक चुनाव के आसार भी नजर आ रहल बा.

वाल्मिकी नगर लोकसभा क्षेत्र के महत्वपूर्ण विधान सभा में से एक लौरिया सीट कांग्रेस खातिर  अजेय सीट मानल जात रहल बा. 2000 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशी विश्वमोहन शर्मा इहाँ से विधायक बनल रहलें. लेकिन ओकरा बाद 2005 के चुनाव से ई सिलसिला टूट गइल  2005 में जेडीयू के तरफ से प्रदीप सिंह इहां से विधायक बनलें. ओकरा 5 साल बाद 2010 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी विनय बिहारी प्रदीप सिंह के हरा देलें. 2015 में भइल  चुनाव से पहिले विनय बिहारी भाजपा में शामिल हो गइलें आ एही पार्टी के तरफ से उ प्रत्याशी घोषित कइल गइलें. विनय बिहारी के जीत से ही बीजेपी लौरिया से आपन खाता खोललस. अब एह सीट पर महागठबंधन के घटक दल सब के भी निगाह जमल बा. देखे के बा कि विनय बिहारी कइसन सियासी 'सुर' लगावत बाड़न. साथ हीं विनय बिहारी के बहाने सिनेमा अउर सियासी सुर के सम्बन्ध के कहानी जानल भी रोचक आ प्रासंगिक बुझाता.

ई बात त जहजाहिर बा कि सिनेमा अउर राजनीति के रिश्ता बहुते पुरान बा. साऊथ के सिनेमा इंडस्ट्री से राजनीति में जाए के शुरू भइल प्रचलन, अब देश के सब फिलिम इंडस्ट्री में आ गइल बा. एम जी रामचंद्रन यानि एमजीआर पहिला फिलिम स्टार रहलें जे राजनीति ज्वाइन कइले अउर 10 साल (1977-1987) तक तमिलनाडू के मुख्यमंत्री भी रहलें. जयललिता, एनटीआर, रजनीकांत, कमल हासन समेत कई गो अइसन नाम बा जे भारतीय राजनीति में स्टार बनले या अभियो बनल बाड़ें. हिंदी फिलिम के बड़-बड़ अभिनेता राजनीति में गइलें. अमिताभ बच्चन अउर सुनील दत्त 1984 में कांग्रेस के ओर से चुनाव लड़लें अउर  दूनों जाना जीत भी गइलें. लेकिन, बोफोर्स मामला में नाम उछलला पर अमिताभ राजनीति से कन्नी काट लिहले, जबकि सुनील दत्त कांग्रेस सरकार में मंत्री रहलें. गोविंदा, परेश रावल, जया बच्चन, शबाना आज़मी, जया प्रदा जइसन नाम भी राजनीति में आइल बा. एह में से कई लोग अभियो सक्रिय बा.



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करीब 60 साल पुरान भोजपुरी फिलिम जगत भी एकरा से अछूता नइखे. शुरूआती भोजपुरी फिलिम स्टार जइसे असीम कुमार, सुजीत कुमार अउर राकेश पांडेय  त राजनीति में आवे के बारे में ना सोचले  लेकिन उनका बाद के पीढ़ी राजनीति में बढ़-चढ़ के हिस्सा लिहलस. कुणाल सिंह अस्सी-नब्बे के दशक के फिल्मन के सुपरस्टार रहलें. ऊ कांग्रेस अउर राजद के गठबंधन के सीट पर साल 2014 में पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा के टक्कर देले रहलें, हालाँकि ऊ शॉटगन से चुनाव हार गइल रहलें. ऊ 2,20,100 वोट के साथे दुसरा स्थान पर रहलें. कुणाल सिंह के बाबूजी बुद्धदेव सिंह भी कांग्रेस के लोकप्रिय नेता अउर 80 के दशक में जगन्नाथ मिश्र के सरकार में मंत्री रहलें.

एगो इंटरव्यू के दौरान लोकसभा चुनाव 2019 ना लड़ला के सवाल पर कुणाल सिंह बतवलें कि, उनका के कांग्रेस पार्टी के गठबंधन  खातिर क़ुर्बानी देबे के पड़ल. एही खातिर ऊ लोकसभा चुनाव ना लड़लें.

भोजपुरी फिलिम के राजनीति से नाता पहिला बार मनोज तिवारी जोड़लें
भोजपुरी फिलिमन के राजनीति से नाता पहिला बार मनोज तिवारी जोड़ले. हालाँकि विनय बिहारी त जोड़िये देले रहलें लेकिन अब बात एमएलए से एमपी के ओर बढ़ गइल रहे. साल 2009 में मनोज समाजवादी पार्टी के ओर से गोरखपुर सीट पर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लड़लें अउर योगी से हार के 83,059 वोट के साथे तीसरा स्थान पर रहलें. फेर साल 2014 में भाजपा के ओर से उत्तर-पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार बनले. मोदी लहर अउर ओह क्षेत्र में पूरबियन के बहुलता के कारण जीत गइलें. मनोज तिवारी साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के स्टार-प्रचारक रहलें. आपन प्रभावशाली व्यक्तित्व के बदौलत उ जल्दिये दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष भी बन गइलें.

मनोज तिवारी साल 2019 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली से दुबारा चुनाव लड़लें. उनका सामने कांग्रेस के शीला दीक्षित अउर आप से दिलीप पाण्डेय खड़ा रहलें. दिलीप पाण्डेय भी भोजपुरी भाषी हवन. उनका के भी आप भाजपा के समीकरण के अनुकरण करत पुरबिया लोगन के बहुलता वाला क्षेत्र में भोजपुरिया वोटर के लुभावे खातिर उतरलस. जबकि मनोज तिवारी दुबारा भी आपन एह किला पर फतह पा लिहलें. मनोज तिवारी 7,87,799 वोट पाके जीत हासिल कइले, जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री रहल शीला दीक्षित 4,21,697 वोट के साथे दुसरा नम्बर पर रहली.

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नगमा के भोजपुरी फिल्मन में प्रवेश
नगमा जेकरा के अमूमन हिंदी फिलिम खातिर जानल जाला. ऊ भोजपुरी फिल्मन में भी काफी सक्रिय रहल बाड़ी, रविकिशन के साथे उनकर जोड़ी दर्शक लोग खूबे पसंद कइले. भोजपुरी के एगो गाना जे दूसरो इंडस्ट्री के लोगन के जुबान पर चढ़ल, “तोहार लहंगा उठा देब रिमोट से”, इनकरे फिलिम से रहल. लेकिन ई गाना अपना बोल के वजह से आलोचना के शिकार होत रहल. नगमा साल 2014 में कांग्रेस के ओर से मेरठ से चुनाव लड़ल रहली, लेकिन  भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल से हार के मात्र 13,222 वोट के साथे चौथा स्थान पर रहली.

गोरखपुर के सांसद रविकिशन
रविकिशन भी साल 2014 में कांग्रेस के ओर से  आपन गृह ज़िला जौनपुर से लोकसभा चुनाव लड़लें, लेकिन  मात्र 42,759 वोट ही पवले अउर बीजेपी के कृष्णप्रताप से हार गइल रहलें. फेर ऊ साल 2017 में मनोज तिवारी के उपस्थिति में भाजपा ज्वाइन कइ लिहले. साल 2019  में बीजेपी के पारंपरिक सीट गोरखपुर से चुनाव लड़ले. एह बार योगी आदित्यनाथ अउर रविकिशन के मेहनत  आपन असर देखवलस. परिणामस्वरुप रविकिशन 61 फीसदी वोट-शेयर के साथे 7,17,122 वोट पाके विजयी भइलें. रवि के विपक्ष में सपा के रामभुआल निषाद के 4,15,458 वोट ही मिलल.

दिनेशलाल यादव निरहुआ के राजनीति में पदार्पण
दिनेशलाल यादव निरहुआ भी 2019 के लोकसभा चुनाव  से राजनीति में पदार्पण कइलें. निरहुआ के आजमगढ़ से टिकट मिलल जहां उनका खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री अउर सपा चीफ अखिलेश यादव जइसन दिग्गज राजनेता मैदान में रहलें. आजमगढ़ आज़ादी से अबतक ले खाली एक्के बार भाजपा के हिस्सा में आइल बा. इहाँ अमूमन कांग्रेस, सपा आ बसपा के ही बोलबाला रहल बा. मोदी लहर होखे के बावजूद इहाँ से 2014 में सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव चुनाव जीतल रहलें. इहाँ मुस्लिम अउरयादव वोटरन के संख्या जादा बा अउर ई वोट जेकरा ओर रुख कइ दी उहे जीतेला. 2019 के चुनाव में भी इहे भइल.

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हालांकि निरहुआ अखिलेश के कांटा के टक्कर दिहले जेकरा में उनकर स्टारडम भी बहुते काम देलस लेकिन अल्पसंख्यक वोट के ध्रुवीकरण निरहुआ के शिकस्त दे गइल. इहाँ से अखिलेश 6,21,578 वोट से जीतलें अउर भाजपा से निरहुआ 3,61,704 वोट पा के दोसरा नम्बर पर रहलें. हालाँकि उनकर वोट 2014 में इहाँ से जीतल मुलायम सिंह यादव के 3,40,306 वोटन से भी करीब 20,000 अधिक बा. यानि ई फैक्ट एह बात के पुख्ता करsता कि निरहुआ आपन चुनावी ज़मीन बना लेले बाड़ें. हो सकेला कि जइसे  मनोज तिवारी अउर रविकिशन पहिला बार हार के दूसरा बार जीतलें, ओइसही इहो अगिला 2024 के चुनाव जीत जास.

पवन सिंह के प्रयास
पवन सिंह जे कि भोजपुरी के पांच सुपरस्टार में से एगो बाड़ें, ऊ भी 2017 में भाजपा ज्वाइन कइलें अउर आपन पार्टी खातिर वोट भी मंगले रहलें. हालाँकि पवन सिंह 2019 के भइल लोकसभा चुनावी के समर में ना उतरलें बाकिर स्टार कैम्पेनर रहलें आ भाजपा के जम के प्रचार कइलें. उम्मीद बा उनकर ई प्रयास उनका राजनीतिक करियर के उठान में कामे आई.

खेसारीलाल यादव अउर रानी चटर्जी
भोजपुरी के अगिला सुपरस्टार खेसारीलाल यादव से जब राजनीति से जुड़ला के सवाल कइनी तब ऊ आपन कवनो प्रतिकिया ना देलें. जबकि मनोज तिवारी के साथे आपन करियर शुरू करे वाली हीरोइल रानी चटर्जी राजनीति ज्वाइन कइला के सवाल पर आपन दिलचस्पी देखवली. एगो इंटरव्यू के दौरान रानी कहली कि, अगर उनका मौका मिली त ऊ ज़रूर राजनीति में अइहें. जनता उनका के जेतना प्यार देले बा, ओकरा बदला में ऊ पूरा ज़िन्दगी उनकर सेवा करिहें, ऊहो कमे होई.

कहे के मतलब ई बा कि पूर्वांचल के माटी में राजनीति बा. अभिनेता बनला के बादो नेता बने के चाह जब-तब आ जेकरा-तेकरा धाह मारत रहेला. (लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार हैं )
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