भोजपुरी में पढ़ें: शोध बतावेला भोजपुरी केतना पुरान भाषा ह

डॉ. एस.पी. बनर्जी, पृथ्वी सिंह मेहता,  राहुल सांकृत्यान, रघुबंश नारायण सिंह आदि भोजपुरी के 1000 ई. से और प्राचीन बतावल. पाली, कोसली आ अवधि से भाषिक संरचना आ बैदिक, पौराणिक सहित एतिहासिक संदर्भन से जोड़ के तुलनात्मक आधार पर अध्यन करत बहुते प्राचीन आ जनभाषा प्रमाणित कइलेन.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 11:06 AM IST
  • Share this:
भोजपुरी साहित्य में अइसन जुगीन साहित्य के रखल जाला जवन भोजपुरी भाषा में रचल गइल बाटे. गोरखनाथ आ कबीरदास नियर सन्त लोगन के बानी से सुरुआत हो के भिखारी ठाकुर आ राहुल सांकृत्यायन के रचना से होत भोजपुरी साहित्य के बिकास आज कबिता, कहानी, उपन्यास आ ब्लॉग लेखन ले पहुँच गइल बाटे. आधुनिक काल के सुरुआत में वर्तमान साहित्य के रीढ़ ससक्त भइल बा.

इक्कीसवीं सदी की सुरुआत के समय स्वतन्त्र भारत के भोजपुरी लेखन आ कविताई का अर्थ बीसवीं सदी क दूसर पचासे की भोजपुरी कविताई से अधिक बा. ई कालखण्ड लम्बा बा, प्रतिनिधि साहित्य के चयनो कठिन बा. सम्पूर्ण चयन तो कठिन बटबै करी, सम्भवो नइखे. लगभग पचास हजार वर्गमील से अधिक के भारतीय भूभाग में बसेवाली जनता के मातृभाषा के अतिरिक्त नेपाल, मारिशस, फिजी, सूरीनाम, गयाना, जमैका आदि  अनेक देसन में बोले लिखे आ पढ़े जाए के कारण भोजपुरी क अन्तर्राष्ट्रीय भाषा कहाए के  स्वाभाविक अधिकार प्राप्त बा.

भोजपुरी स्पेशल- गायक बन गइले नायक, भोजपुरी सिनेमा अपना समाजे से कटि गइल



प्राचीनता के प्रश्नौ में भोजपुरी पीछे नाहीं बा. एकर पंजीकृत औपचारिक तारीख त १७८९ ईo में बतावल जाला. एकर मतलब ई नइखे कि भाषा के अर्थ में भोजपुरी की उत्पत्ति १७८९ ई० में भइल भा अथवा ओकरा पहिले एकर अस्तित्व ना रहे. भोजपुरी बोली, भाषा, लोकसाहित्य आ संस्कृति के अध्यन के ओरी ध्यान १७८९ में भईल बा. डॉ ग्रियर्सन आदि अंग्रेज बिद्वान लोगन क नाम एमन प्रमुख बा लेकिन सन् १९३९-४० में आवत आवत भारतीय बिद्वान लोग भोजपुरी भाषा के अध्यन–अनुसन्धान आ ओकरा शब्द साहित्य सम्पदा के संकलन सम्पादन के ओर चरण बढ़ावल.
भारतीय बिद्वानन में डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी, डॉ. उदय नारायण तिवारी, डॉ. भोलानाथ तिवारी, डॉ. विश्वनाथ प्रसाद, डॉ. कृष्णदेव उपाध्याय, पं. गणेश चौबे, दुर्गा शंकर प्रसाद सिंह नाथ, रघुवंश नारायण सिंह, आचार्य महेन्द्र शास्त्री, राहुल सांकृत्यान आदि के नाम प्रमुख बा. एकरा बाद कुछ भारतीय भाषाविद  बिद्वान आइरिश भाषाविद डॉ. ग्रियर्सन के विचार से प्रभावित होके भोजपुरी के मगधी अथवा अर्ध मागधी अपभ्रंश से विकसित बतावल सन् 1000 ई. के बाद के बोली आ भाषा साबित करत आइल बा. आजुओ अधिकांश बिद्वान भाषाविद एही मत के आग्रही बाड़ें.

भोजपुरी में पढ़िए: खांटी माटी के तीन परधानमंतरी अइसन जिनकर भौकाल से पस्त हो गइल पाकिस्तान

पीछे भोजपुरी भाषा के भोज आ भोजपुर से जोड़ के अध्यन करेवाला बिद्वान जइसे डॉ. एस.पी. बनर्जी, पृथ्वी सिंह मेहता, डॉ. राहुल सांकृत्यान, रघुबंश नारायण सिंह आदि भोजपुरी के 1000 ई. से और प्राचीन बतावल. ओकरा बोली के बैदिक भाषा से विकसित भाषा बतवलें, पाली, कोसली आ अवधि से भाषिक संरचना आ बैदिक, पौराणिक सहित एतिहासिक संदर्भन से जोड़ के तुलनात्मक आधार पर अध्यन करत बहुते प्राचीन आ जनभाषा प्रमाणित कइलेन. भोजपुरी भाषा के प्राचीनता के अध्ययन खातिर डॉ. जयकांत सिंह “जय” की भारतीय आर्य भाषा आ भोजपुरी देखल जा सकत बा.

भोजपुरी में काव्य साहित्यौ बा. इहां देखल जाला कि इक्कीसवीं सदी के आरम्भ में भोजपुरी कविताई पर बीसवीं सदी के दूसरे पचासे की कविताई क प्रभाव शेष बा. गद्य अउर पद्य खातिर भोजपुरी भाषा अपनावल जा सकेला; वइसे पद्य में अधिक प्रचलन बाड़न. गद्यो में भोजपुरी क बिकास भईल लेकिन गद्य परम्परा म जेतना विस्तार भईले बाड़न, ओकरा ध्यान म रख रचनात्मक काम आ वर्तमान के विकासोन्मुख लेखन, प्रकाशन, बहुत कुछ कइल शेष बा. पद्य भाषा त दोहा चौपाई क रूप में मिल सकेला. किन्तु भाषा क बिकास त गद्य में जईसन सम्भव बा, वईसन पद्य में नाहीं. साहित्यकार, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद्, कलाकार, पत्रकार आदि भाषा के विकास में लागल संस्थन व लोगन के योजनाबद्ध आ चरणबद्ध ढंग से काम करे के चाही.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज