Bhojpuri: अपार शब्द संपदा वाली भाव के भाषा ह भोजपुरी, मिठास एतना कि बस सुनत रह जाइब!

भोजपुरी में भाव के प्रवाह ह. इही से कतहीं आ कबहूं भोजपुरी बोले लागे त ओकरा आ सुने वाला दुनो के आनंद आ जाला. भाव से चलला के कारण भोजपुरी में कबो शब्द के कमी ना पड़ेला.

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भोजपुरी भाव के भाषा (भाखा) ह. ये भाषा के सरजना पाणिनी महराज ना कइले रहला हां, बाकिर एकर आपन एगो तरतीब बा. बोले वाला अपना हिसाब से बोलेला आ समझे वाला ओही भाव में समझ लेला. रस के संचार पूरा होला. भोजपुरी के दूसरा बोली भाषा से आवे वाला शब्द, मुहावरा आ कथा-कहानी से कवनो परहेज नइखे. संस्कृत आ अवधी से त सोझे रिसदारी बा. अंगरेजी जइसन दूसरा जाति के भाषा के शब्दन से भी ये बोली के कवनो दिक्कत परेशानी नइखे. हां भोजपुरी में शामिल कइला के एगो शर्त बा- दूसरा भाषा से अइला प भी नियम भोजपुरिये के चलेला.

समझे के होखे त कहल जा सकेला कि जेलर के भोजपुरी बनावे खातिर ओकरा के जेलरवा क दिहल गइल. स्कूल, स्कूलवा हो गइल. मास्टर, माहटर हो गइने. स्टेशन के ले आ के टेसन, टिसन या टिसनवा कह दिहल गइल. अउरी बहुत उदाहरण बा. हाल तक पुरान लोग डॉक्टर के बहुत शान से सिबिल सरजन कहत रहल हां. इहे ना केहू खाली खड़िए बोली बोले त ओकरो से मोकाबला करे के भोजपुरी बोले वाला लोग एगो अलग तरीका के भोजपुरी तइयार क लेले बा. याद करीं ‘खदेरन के मदर’ वाला. याद आ गया नू. लोहा सिंह के रेडियो नाटक. बंगाल में नौकरी करे गइल लोग त उहां के बंगाली भद्रलोक से भी मुचेहटा ले लिहल आ एगो अलग भोजपुरी गढि दिहलस. “तुम केने जाता है. ड्यूटी केतना बजे से है.”

कहे के मतलब इ बा कि भोजपुरी लोक के बोली भाषा ह, अउरी एकरा में गजब के एडॉप्टीबिल्टी, माने कवनो परिस्थिति के स्वीकार करे के, ताकत बा. इहे एकर जीवन रेखा भी ह. भोजपुरी के इ एडाप्टीबिल्टी के बहुत बारीकी से समझने कवि कैलाश गौतम जी. काशी के लगही जन्मल कैलाश जी इलाहाबाद रेडियो में नौकरी कइने लेहाजा उहां के इलाहाबादी अउरी अवधी के समझने. ओकरा से कैलाश जी एगो अइसन भोजपुरी के रचना कइने जवन सबका समझ में आ जाई. एही कारण उनकर कविता लोक के कविता, जन के रचना होखला के बाद भी हिंदी के कविता लागेला. आ सब लोगन के समझ में आवेला. तनी देखीं –
आजी रँगावत रही गोड़ देखऽ,
हँसत हँउवे बब्बा, तनी जोड़ देखऽ.
घुंघटवे से पूछे पतोहिया कि, अईया,
गठरिया में अब का रषाई बतईहा

एमें आजी के प्रयोग बा. आजी भोजपुरी आ अवधी दूनों में दादी के कहल जाला. जेकरा ना समझ में आवे ओकरा खातिर अइया लिख देले बाने. इ अलग बात ह कि भोजपुरी में इआ भी कहल जाला. वइसे सही बात त इ बा कि भोजपुरी के बहुत आदर आ प्रेम से केहू प्रयोग कइले बा त उ हवें बाबा तुलसीदास जी. बाबा रामचरित मानस में भोजपुरी के शब्दन से अइसन चमत्कार कइले बाने जवन केहू ना कई सकल. बाबा लिखत हवें –
जोगवहिं प्रभु सिय लखनहि कैसें. पलक बिलोचन गोलक जैसे॥
सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहिं. जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहिं॥

एकरा में जोगवहि आ सेवहिं के अर्थ में बहुत ढेर अंतर नइखे. कवनो चीज के लोग से के धरेला. कवनो चीज के बहुत जोगा के धरे ला. जोगवला में एगो भाव बा कि कवनो चीज के सुरक्षित रखे खातिर जेतना उपाई हो सकेला उ सब कइल जाला. जइसे आजी-दादी अपना नाती-पोता के जोगा के राखेला. अपना तीसरा पीढ़ी के खाली खिया पिया के फिट भर ना राखेला. करिआ टीका लगा के, चनरमा, ताबीज पहिना के नजर से भी बचावेला. येहीके जोगावल कहल जाला. जोगवला में भौतिक सुरक्षा से आगा बढ़ि के देवता-भूत-पितर जवना के दुनियाववी शक्ति से ऊपर कहल जा सकेला ओहू से रखवारी करे के भाव होला. जबकि सेवला में दुनिया भर के चीज से हिफाजत करे के अर्थ आवेला. सोझ समझल जाउ त मुर्गी आपन अंडा से के रखले रहे आ कवनो जानवर ओकरा के आ के खा लिही.

बाबा जेतना आसानी से येही दू शब्द से आपना चौपाई के सिद्ध क देले बाने उ दुनिया भर के दूसरा भाषा में मिलल आसान नइखे. धार्मिक लोग मानला कि भगवान चाहस त भक्त के जोगा सकेने. ओकरा के कवनो दिक्कत से बचा सकेने लेकिन अगर भक्त कतनो चाहे त उ ओही तरे कवनो वस्तु के ना बचा सकेला जइसे कवन सामान्य व्यक्ति बहुत ढेर उपइ कइके भी अपना शरीर के हमेशा षातिर ना बचा सकेला. जमराज भइसा प चढ़ल अइहें आ एक ना एक दिन लेई जइहें.

भोजपुरी में जवन नरमी आ एकर जवन लहजा बा उ एकरा के विशेष बना देला. सख्ती से भी केहू असली भोजपुरी वाला आपन बात कही त ओकरा में तहजीब ना छोड़ी. देखी – “आजी रउआ अब बहुत बोलि लिहनी. अब रहे दिहीं ना त हमरा कुछ अउरी सोचे के पड़ी.” शब्द संपदा आ तहजीब के कारण अगर कहल जाउ कि हिंदी से जुड़ल तमाम भाषा- बोली में भोजपुरी के उहे जगह बा, जवन स्थान उर्दू में रेख्ता के बा त गलती ना होई.
उर्दू के शायर अनवर जलालपुरी साहेब कहले बाने –
न बामो दर न कोई सायबान छोड़ गए, मेरे बुजुर्ग खुला आसमान छोड़ गए
वो जिसको पढ़ते नहीं, बोलते सब है, जनाबे मीर भी कैसी जबान छोड़ गए.

भोजपुरी के स्थिति भी अइसने बा. एकरा में अब लिखा-पढ़ी नइखे होत लेकिन जब केहू बोलेला त सही में लागेला कि भाव के खुलल आकाश में आदमी पवरता.

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