भोजपुरी जंक्‍शन: अश्लील गायकी आ भोजपुरिया अस्मिता, सांस्कृतिक चेतना जगावे-जोगावे के दरकार

कहल जाला कि एकही मूअल मछरी सउँसे ताल के गन्हा देले आ इहां त होड़ लागल बा सस्ता शोहरत पावे के, अपसंस्कृति पसरावे-फइलावे के.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 30, 2020, 1:09 AM IST
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ने संगीत नाटक अकादमी का ओरि से चंदन तिवारी के युवा पुरस्कार-सम्मान देबे के ऐलान के खबर पाके दिली खुशी भइल रहे. चंदन के गायकी एह विकृत सोच से बजबजात माहौल में एगो सुखद हवा के झोंका-अस खुशनुमा एहसास से भरि देला. विंध्यवासिनी देवी, शारदा सिन्हा के गौरवशाली परिपाटी के आगा बढ़ावे में ई युवा गायिका अगहर भूमिका निबाहे में कवनो कोर-कसर नइखी छोड़त. मैथिली ठाकुर, मनीषा श्रीवास्तव नियर किछु अउर हुनरमंद नवही पीढ़ी के कलाकार एह जरूरी जिम्मेवारी के सम्हरले बाड़न आ अइसने गायक-गायिका के बदउलत गायकी के मान-मरजाद बांचल बा. कहल जाला कि एकही मूअल मछरी सउँसे ताल के गन्हा देले आ इहां त होड़ लागल बा सस्ता शोहरत पावे के, अपसंस्कृति पसरावे-फइलावे के.

भोजपुरी में लोकगायकी के एगो लमहर, निठाह आ बड़ा सुघर परम्परा रहल बा. खाली तीस करोड़ भोजपुरी बोलेवाला लोगने में ना, बलुक देश-विदेश के अउर दीगर भाषा बोलनिहारनो के बीच में भोजपुरी गायन के धूम शुरुए से मचत रहल बा. अब त एकर शोहरत रोज नया-नया ऊंचाई छू रहल बा. भोजपुरी फिलिम आ लोकगीतन के बाढ़ एकर जीयत-जागत आ तरोताजा गवाह बा. ना खाली उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के सीमा आ कोलकाता, मुंबई, दिल्ली जइसन महानगरन में, बलुक मॉरीशस, फीजी, सूरीनाम, ट्रिनिडाड, ब्रिटिश गियाना, हालैंड, नीदरलैंड, नेपाल वगैरह कई देशनो में भोजपुरी गीतन के सरसता आ सुर-ताल नित नया रेकाड बना रहल बा. कोठा से क्रांति ले आ घर-अंगना, खेत-खरिहान से लड़ाई के मैदान ले---सभ जगहा समान रूप से एकर शोहरत बा.

चाहे आजादी के लड़ाई में क्रांतिकारी लोगन का बीचे मशहूर रघुवीर नारायण के 'बटोहिया ' गीत होखे, तमाम कोठन पर गूंजत महेंदर मिसिर के पूरबी के मनमोहक धुन होखे भा नाचमंडली आउर मंचन पर भिखारी ठाकुर के, बिदेसिया ' के मरमभेदी सुरलहरी---भोजपुरिया माटी के सोन्ह-सोन्ह गमक से रचल-बसल ई गीत जन-जन के कंठहार बनि गइल बाड़न स. बाकिर ई भइल सिक्का के एगो पहलू.दोसर पच्छ ई बा कि आजुकाल्ह भोजपुरी गायकी अश्लीलता आ भोंडापन के पर्याय बनिके रहि गइल बा. एह से भोजपुरी के इज्जत, मान-सम्मान आउर अस्मिता दांव पर लागल बा. पइसा बनावे का होड़ में भोजपुरी फिलिम आ कैसेट-सीडी कंपनी एह फूहरपन के हवा दे रहल बाड़ी स.



भोजपुरी भाषा-भाषियन के भावना का संगें खेलवाड़ करेवाला आजु कई गो गायक-गायिका अइसन बाड़न, जे फूहर, अश्लील आ दुअर्थी गीत गा-बजाके माहौल के लगातार प्रदूषित कऽ रहल बाड़न. नतीजतन, अइसने चंद घिनावन सोचवाला लोगन का चलते गंगा नियर पाक-साफ भोजपुरी के बदनाम कइल जा रहल बा. सभसे पहिले गीतकार मोती बी ए फिलिम 'नदिया के पार ' में सात गो भोजपुरी गीत 1944 में ओह हिन्दी फिलिम में लिखनीं आ भोजपुरी गीतन के फिलिम में दाखिला दियववनीं.ओह गीतन के लोकप्रियता भोजपुरी सिनेमा के निरमान के दिसाईं फिल्मकारन के धेयान खिंचलस.फेरु त 'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो ','लागी नाहीं छूटे राम' फिलिमन के गीत जनमानस पर छा गइल.
भोजपुरी गीतन के शोहरत के भुनावे खातिर कैसेट कंपनी आगा अइली स आ पारंपरिक आउर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलत आइल लोकगीतन के आपन मधुर आ मनमोहक आवाज देके गायक-गायिका सुननिहारन के झूमे खातिर अलचार कऽ दिहल. मोहम्मद खलील जइसन रेडियो गायक भोलानाथ गहमरी के 'सुमिरींले सारदा भवानी, पत राखीं महरानी', 'कवना खोंतवा में लुकइलू आहि रे बालम चिरई 'नियर गीतन के गाके अमर कऽ दिहलन. बाकिर आजु बेगर इलिम के सस्ता शोहरत का पाछा भागेवालन के भीड़ ठकचल बा.किछु लोग त अश्लीलता आ फूहरपन के मए सीमा लांघि घलले बा. स्थिति ई बा कि भोजपुरी में दूगो माने राखेवाला गीतन के भरमार बा आ अइसने गीत होटल, बस, ट्रक, चाह-पान के गुमटी आ दोकानन में धड़ल्ले से बाजत बाड़न स.

कैसेट, सीडी कंपनी के मालिक अइसने अश्लील आ छेड़खानी से भरल गीतन के फरमाइश गायक-गायिका से करेलन आ उहो लोग सस्ता शोहरत पावे के लालसा में अइसन फूहर -पातर आ दूगो अरथ वाला गीत चुनेला. भोजपुरी गीत के सीडी में कई किसिम के घपलो हो रहल बा.एह लोकभाषा के बढ़त लोकप्रियता के लखिके दोसरो भाषा के गीत भोजपुरी गीत का नांव पर जारी कऽ दिहल जाता आ मगही, मैथिली, अंगिका, बज्जिका के गीतो भोजपुरिए गीत कहा रहल बा. ओइसे त लोकगीत आ पारंपरिक गीत के केहू व्यक्तिगत रचनिहार ना होला. एकरा के कबो समूह रचले होई, खास तौर से महिला समूह, इहे गीत कमोबेश एके लेखा हरेक हलका में गवात आइल बा. बाकिर सदियन से गवात आइल पारंपरिक गीतन के किछु भाई-बहिन लोग आपन मौलिक गीत घोषित कऽ देले बाड़न.

हकीकत इहो बा कि कवनो दिवंगत गीतकार के गीत कवनो नया गीतकार के नांव से सीडी में डालि दिहल जात बा.अधिकतर म्यूजिक कंपनी गायक-गायिका से अनुबंध करेली स आ एकमुश्त रकम गायके के दे देली स, जवना में साजिन्दा आ गीतकारो के हिस्सा होला. गायक साज-बाजवालन के बखरा त दे देलन, बाकिर गीतकार के रकम खुदे हजम कऽ जालन.हंस,चंद गायक एकर अपवाद जरूर होइहन.एलबम में पहिले गीत के मुखड़ा आ गीतकार के नांवों प्रमुखता से छपत रहे, बाकिर अब अधिकतर जगहा नांवों नदारद.फेरु त गीतकार के ना नांवें जस मिलऽता, ना पइसे. तब ई बदनामी आ अपजस काहें खातिर?

आजु जरूरत एह बात के बा कि अश्लील-फूहर गायन करेवाला गायक-गायिका के सामाजिक बहिष्कार कइल जाउ आ पत्रिका, सोशल मीडिया आउर गोष्ठी-महोत्सव, सम्मेलनन में अइसना लोगन का प्रति निन्दा-प्रस्ताव पारित कइल जाउ. अश्लीलता, फूहर-पातर गायकी के खिलाफ रचनात्मक आन्दोलन चलावे के सख्त जरूरत बा. समाज में अइसन जहर घोरिके प्रदूषण फइलावे वाला गायक, गीतकार आ म्यूजिक कंपनी के खिलाफ जब ले कमर कसि के कड़क आन्दोलनात्मक रुख ना अपनावल जाई, जब ले भोजपुरी के सांस्कृतिक चेतना जगावे-जोगावे के अभियान ना चली आ जब ले सेहतमंद-स्तरीय आ भावप्रणव गीत-गायकी के पुरस्कृत-सम्मानित ना कइल जाई, तब ले भोजपुरी साहित्य-संस्कृति के मान-मरजाद-अस्मिता दांव पर लागले रही.
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