भोजपुरी जंक्‍शन: मौलाना लोग बोलत नइखे, पत्ता आपन खोलत नइखे

कहे के मतलब ई कि वोट भले 17 फीसदी होखे, ई लोग कब का करी पता ना चले ला. पिछला बेरि त लागते रहे कि उ लोग भाजपा के खिलाफ अउर लालू-नीतीश के गठजोड़ के संगे बा. एहि बेरि बिलकुले चुप बा लोग.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 26, 2020, 5:30 PM IST
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बिहार में विधानसभा के चुनाव होत बा. विधानसभा मतलब एमएलए लोगन के मामला. कहल जाता कि एह राज्य में मुसलमान लोगन के वोट सइ में 17, मतलब 17 फीसदी बा. ई वोट बहुते होला. एसे कमे दलित अउर महादलित लोग मानल जाला. चलीं, अभी त सवाल मौलाना लोगनि के बा. हालि ई बा कि एह लोगन के ख्याल कुल्हि पार्टी करेले. भारतीय जनता पार्टी से भी 2010 में अमौर से सबा जफर एमएलए भईल रहले. बाकिर 2015 में एसे हारि गइले कि नीतीश कुमार अउर लालू के गठबंधन के आगे मौलाना लोग जफर के भी वोट ना दिहले. जफर एहि बेरी फेरू से लड़त बाड़े, बाकिर भाजपा के ना-नीतीश के जेडीयू के टिकट पर खड़ा बाड़े. कहे के मतलब ई कि वोट भले 17 फीसदी होखे, ई लोग कब का करी पता ना चले ला. पिछला बेरि त लागते रहे कि उ लोग भाजपा के खिलाफ अउर लालू-नीतीश के गठजोड़ के संगे बा. एहि बेरि बिलकुले चुप बा लोग.


सवाल ई बा कि मौलाना लोगनि के वोट के बात काहे होत बा. सचाई त ई बा कि अब एह लोगनि के बिना भी कवनो पार्टी सरकार में आ सकेले, शर्त ई बा कि इनकरा लोगनि के छोड़ि के गोलबंदी हो जाउ. इ होत लउकत नइखे. कारन साफ साफ बा कि वोट के घालमेल बहुते होई. एहि बेरी एगो बड़ बदलाव ई भइल बा कि नीतिश-लालू के जोड़ी पहिलहि बिछुड़ि गईल बा, मैदान में चिराग पासवान के अलावा असदउद्दीन ओवैसी भी मोरचा बना के आ गईल बाड़े. एहि तस्वीर में मुसलमान लोगनि के वोट समझे खातिर सीमांचल के क्षेत्र में चले के पड़ी.


 सीमांचल में 23 गो एमएलए अउर चार गो एमपी के सीट बा. बाकिर देखीं ना कि 23 गो सीट पर दसे गो मुसलमान एमएलए चुनाईल रहले. ओह घरी त राष्ट्रीय जनता दल, जेडीयू अउर कांग्रेस में गठबंधन रहे. इहे हालि 2019 के लोकसभा चुनाव में भईल. तब खाली किशनगंज से एगो मुस्लिम एमपी बनि पवले. 2015 के एमएलए चुनाव में ओवैसी के एकहू सीट ना मिल पावल. उनकर पार्टी 2019 में किशनगंज से एमपी के भी चुनाव लड़ल रहलि, बाकिर दालि ना गलल. जवन बात होखे, सीमांचल के एह क्षेत्रन में भी चुप्पी बा.


 अइसे त मुसलमान लोग पहिले खुलि के एके ओरि वोट देत रहले. इ लोग लंबा समय तक कांग्रेस के साथ रहे. फेरू भागलपुर में दंगा के बाद लालू परसाद के संगे हो गईले. उनकरा बाद नीतीशो के संगे रहल लोग. इ सफाई एहि बेरी नइखे. लालू परसाद के साथी शिवानंद तिवारी त कहत बाड़े कि मुसलमान हमेशा भाजपा के खिलाफे रहिहें. नीतीश कुमार भाजपा के संगे बाड़े, एसे ई वोट उनकरो पार्टी के ना मिली. तिवारी जी त चाहते बाड़े कि इ लोग उनकरा पार्टी के संगे रहो, बाकिर ई लोग बा कि बोलत नइखे. ओवैसी के हैदराबाद शहर से लवटि के बहुत लोग सीमांचल में बिरयानी के रोजगार करे ला. पहिले इहां चिकन भात अउर मटन भात के काम खूब होत रहे. अब भात में बहुते कम मीट मिलाइ के बिरयानी बनि जाला, लोग पसंदो खूब करत बाड़े.


 त का हैदराबादी बिरयानी ओवैसी से लगाव जोड़ी. इहो ना कहल जा सके. वोटर बड़ा चाल्हाक बाड़े. एगो बात धियान में राखे के चाहीं कि लोग चुप्प भले होखे, वोट खूब देला. सीमांचल में पिछला बेरि 64.8 फीसदी वोट परल रहे, जबकि पूरा बिहार में खाली 58.6 फीसदी वोट डाले वाला लोग रहे. खराब बाति ई बा कि सीमांचल से एमजे अकबर, शाहनवाज़ हुसैन, तारिक़ अनवर, तसलीमुद्दीन अउर पप्पू यादव नियर लोग भी एहिजा के गरीबी दूर ना कई पावल. सीमांचले के ना, पूरा बिहार के मुसलमान लोगनि के ई मलाल बा कि कबो अब्दुल गफूर अइसन मुख्यमंत्री जहां रहल होखे, ओहि बिहार में मुसलमान लोग बाड़ा बदहाल बा. (यह लेख लेखक के न‍िजी विचार हैं)

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