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    भोजपुरी जंक्‍शन: परब त्योहार के सीजन में मिठाई जतरा

    पुराणन में देवी देवता के नवैद्यम् माने मीठा क भोग लगावे क बात कथावाचक अउर पुजारी लोग कथा कहे समय बार बार दोहरावे लं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 27, 2020, 1:03 PM IST
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    रब त्योहार के सीजन में मीठा माने मिठाई मान अउर मांग दुनों बढ़ जाला. कौउनो परब होखे या पूजा पाठ देवी देवता लोगन के मीठा क भोग त लगौले जाला, भाई बंधु लोग भी खूबे चाव से खाला अउर ए दिना घरे आवे वाला मेहमानन के परेम से खिआवेला. परब अउर मीठा क नाता बहुते पुरान ह. पुराणन में देवी देवता के नवैद्यम् माने मीठा क भोग लगावे क बात कथावाचक अउर पुजारी लोग कथा कहे समय बार बार दोहरावे लं. ई सीजन में मीठा क बढ़ल मान के ही ध्यान में ऱख के पाठकन के आगे एकर जतरा पर ले जाए के मन बा.

    परब त्योहारन में सबसे पहिला नंबर नवरात्र क आवेला. ई हम देस के उत्तरी अउर पूरबी हिस्सा क बात करत हईं. दक्षिन अउर पसचिम में त ई मौसम गनेस उत्सव से ही सुरू हो जाला जौन भादो महीना में पड़ेला. उहां बिसेसकर पसचिम के परदेस महाराष्ट्र में गनेस जी के परसाद में मोदक चढ़ावल जाला. एकरा बाद के कुआर महीना में पितरपख के बाद नवरात्र क बारी आवेला. यूपी के पूर्वांचल बिसेसकर बनारस अउर पास पड़ोस के जनपद में नवरात्र में देवी दुर्गा के बतासा चढावे क बहुते पुरान रिवाज ह जउन आजो चलल आवत ह. नवरात्र क मूल परसाद बतासे ह जेके सबे चढावे ला एकरा बाद आपन श्रद्धा से जौन चढ़ा दे चाहे लड्डू पेड़ा होखे बा बरफी.

    पूर्वांचले जैइसने रिवाज बिहार अउर झारखंडों में ह. लेकिन एकरा पड़ोसी परदेस बंगाल अउर ओडिसा में देवी के मीठा चढावे वाला रिवाज तनी अलगे ह.. बिसेस कर बंगाल में. बंगाल में एगो खास मीठा संदेस, भक्त लोग देवी दुर्गा के चढावे ला. संदेस छेना से बने वाला अपना तरह के अलगे मीठा ह जउन बंगाल बा दोसरा जगह बंगाली मिठाई क दोकाने में बने ला. देखे में त ई बरफी बा पेड़ा जइसन लगेला लेकिन सवाद में एकदमे अलग होला छेना से बनल होला के चलते. जबकि बरफी पेड़ा खोआ से बनेला.



    अइसे त गरी  (नरियल) लौकी अउर काजू क बरफी भी अब सगरो बने लागल ह लेकिन ओकरो में खोआ जरूर पड़ेला. पहिलवां गरमी क मौसम में कानपुर से लगा के यूपी के दोसर पसचिम के जनपदन में दूध के कमी होवे के चलते गरी और लौकी क बरफी ही मिठाई के दोकनन में मिले. हां तब इहवां खोआ क मीठा के नाम पर खाली गुलाब जामुन मिलत रहल. अब त देस भर में श्वेत क्रांति के चलते गरमियों में उपर वाला क किरपा से दूध दही क कउनो कमी ना होला.
    अब गरी बा नरियल क बरफी क बात चरचा में आइल ह अउर परब त्योहार क मौसम चलत ह त इहां ई बतावल जरूरी हो गइल ह कि बंगाल में बिजयदसमी बा दसहरा के पांचवा दिन शरद पूरनिमा के दिन उहे पंडाल में देवी लछमी क मूरती बइठा के पूजल जाला, जहवां देवी दुर्गा क पूजा लछमी, सुरसती, गनेस अउर कार्तिक क मूरती बइठा क होइल रहल. अउर ए दिन देवी लछमी के भोग के तौर पे नरियल का लड्डू चढ़ावे क रिवाज ह. काच नरियल से गुड़ बा चीनी में पागल ई लड्डू के बंगाल क बोली में नाड़ू कहल जाला.

    जेके खाए खातिर बंगाल क बिहारी भाई लोगन क भी लार चूएला. काहे से कि नाड़ू होइबे करेला एतना स्वादिस्ट. बंगाल के अलावे बिहार अउर पूर्वांचल समेत समूचा देस में शरद पूरनिमा के नारायण माने भगवान बिसनू का पूजा होला अउर मानल जाला कि ए दिन रात में आसमान से अमरित बरसेला ... एकरा चलते लोग पहिले दूध चाउर चीनी से बनल खीर लोटा बा कउनो अउरो पात्र में रख के लकड़ी बा बांस में बान्ह के रात के खुलल आसमान में लटका दे अउर दोसरा दिन सवेरे खाए... शहरन में त ई रिवाज समय के साथ खतमे हो गइल लेकिन गांव देहात आजो बहुत लोग ऐइसन करेला.

    अब मीठा जतरा के आगे बढ़ावते हुए तनी मनी बिसय से भटकल जाओ. जब मीठा क बात आवे ला त सबसे पहिले बंगाले क नाम दिमाग में आवे ला. रसगुल्ला, संदेस से लेकर चमचम, खीरकदम अउर रसमलाई जइसन मुंह से लार चुआ देवे वाला मिठाई तक क जनक बंगाले के मानल जाला . ई अलग बात ह कि कुछ दिना पहिले तक रसगुल्ला पर आपन पूरा हक ओड़िसो जतावत रहल. वइसे अब ई विवाद शांत हो गइल ह अउर तमाम सबूतन के चलते मान लेयल गयल ह कि रसगुल्ला क जनक बंगाल ह. संदेस के बारे में त कौउनो सके सुबाह न रहे, काहे से कि छेना बने वाला ई मीठा त बंगाल अउर बंगाली मीठा क दोकान में बनेला.

    चमचम रसमलाई ले लगा के छेना से बने वाला कौउनो प्रचलित मीठा क जनक बंगाले के मानल जाला. जबकि खोआ क मीठा क खातिर बनारस परसिध है. चाहे गुलाब जामुन होखे चाहे बरफी, लौंगलत्ता और मालपुआ… ई सब मीठा में बनारस क कउनो जवाब नइखे . वइसे मालपुआ अउर लौंगलत्ता बंगाल क भी पुरान मिठाई ह. अब ई सोध क बिसय हो सकेला कि इ दुनों मीठा बंगाल से बनारस आईल कि बनारस से बंगाल गइल रहे. मोटामोटी एगो बात जरूर कहल जा सकेला ला कि छेना क मीठा बंगाल से बनारस आइल होई. एही तरह खोआ क मिठाई बनारस से बंगाल गइल होई.

    काहे से कि बंगाल अउर बनारस क पुरान संबंध ह. मोक्ष पावे क चाह में बंगाल से तमाम बुढ़ पुरनिया लोग भगवान शिव क नगरी कासी में बास कर आवत रहे. अब इ रिवाज पर बहुते हद तक बिराम लग गइल ह लेकिन आजहूं बंगाल के लोगन के मन में बनारस के लेके एगो बिसेस लगाव ह. एकरे अलावा पढ़े लिखे में आगे होवे के चलते बंगाल से तमाम लोग नौकरी चाकरी खातिर बनारस और प्रयागराज आइल अउर उनका सबके उहां क दाना पानी देहे लाग गइला से उहें बस गइल लोग. अउर जब दू जगहन में ए तरह क संबंध हो जाला त खान- पान, लुग्गा - लत्ता क अदान परदान होइल कौउनों बड़ बात ना हव.

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    आज मारवाड़ी लोगन के चलते बंगाल बिसेसकर कोलकाता में खोआ क मीठा क एक से बढ़ के एक दोकान हव. एइसने हाल बनारस क भी ह जहां छेना क मीठा भी बेजोड़ मिलेला. बलुक खोआ क मीठा खातिर परसिध बनारस क छेना क मीठा कउनों माने में बंगाल से उनइस ना बीसे होई. इहां कथा साहित्य जगत में परसिध लेखक बेढब बनारसी क एगो बात याद आवत ह. ऊ अपना एगो लेख में लिखले रहलें कि जौन चीज के आगे बनारसी सब्द लग गइल समझ ला कि ओकरा बराबर क चीज ई धरती पर त नाहीं सवर्गे में मिलत होई. उनका लेखनी के लिहाज से त छेना क मीठा में भी बनारस बंगाल से बीसे पड़ी.

    हां दुनों जगहन क एकक गो मीठा अइसन ह कि बंगाल वाला बंगाले के दुकान में मिली अउर बनारस वाला दोसरा जगह त खूबे मिलेला लेकिन उ बंगाली मिठाई क दुकान में त नइहे मिल सकत हव. जबकि दुनों मीठा देखला में एके जइसन लगेगा. बंगाल क मीठा पांतुआ देखे में एकदम गुलाबे जामुन जइसन लगेगा लेकिन सवाद एकदमे अलग होला. पांतुआ छेना से बनेला जबकि गुलाब जामुन खोआ से. अउर त अउर दुनों के बनावे क ढंगो एके ह. छेना अउर खोआ क छोट छोट गोल लोइया बना के घीउ में छान के चीनी क पातर चासनी में डालल जाला. फिर चाहे गरमा गरम खाएल जाओ बा ठंडा करिके. बंगाल में दुर्गापूजा क मौका पे माटी क हंड़िया बा भरूका भरल पांतुआ अउर रसगुल्ला देख के सुगर वाला रोगियों अपना के रोक ना पावेला. परब क सीजन क मीठा जतरा में फिलहाल एतने. अइसे ई जतरा आगे भी जारी रही कउनो दोसरा परसंग के साथे.
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