भोजपुरी जंक्‍शन: देश में अमन आ पेट में अन्न चाहीं

ब्रम्हांड के सर्वश्रेष्ठ जीव आत्मघाती हो गइल बा. आखिर ई कइसन समय आ गइल बा हे दुर्गा मइया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 12:36 AM IST
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गो त घर में तनाव बा. बाहर कुक्कुर बोलsतारs सन. इन्हनीं के टेंशन त देलहीं बाड़न स, तवना में कउवन के काँव-काँव अलगे चल रहल बा. एही में बिहार में चुनाव बा. नारा से बेसी भोजपुरी गाना गूँजsता. कोरोना के चलते जे बेरोजगार भइल बा ओकरा असहीं अंघी नइखे लागत. भोर के अखबार सुरुज भगवान से बेसी लाल बा. हत्या से बेसी आत्महत्या के खबर लउकsता. ब्रम्हांड के सर्वश्रेष्ठ जीव आत्मघाती हो गइल बा. आखिर ई कइसन समय आ गइल बा हे दुर्गा मइया.

कइसे गोहराईं तोहरा के? लइका लेखा फूट-फूट के रोईं? रोईं भोंकार पार के? सीना चीर के देखाईं? का करीं? कइसे बुझबू कि हम दुखी बानी. हमार दुख तोहरा काहे नइखे लउकत? आकि चनेसरा लेखां तुहूँ मजा ले तारू? चनेसरा त विपक्षी हs. हमरा अच्छाइयो में बुराइये देखेला. केतनो बड़का काम काँहें ना करीं, तारीफ़ के दू बोल ना बोली. हमरा जवना काम के उ निन्दा करता, ओकर आका भा गुरुजी लोग, ओही में डूबल बा. बाकिर उ ओह लोग के तलवा चाटsता. खैर, छोड़s, ई कुल्हि सियासी बात हs.



तू त माई हऊ. तू दिल के सब दरद बुझेलू. बस बहरिये बहरी भोकाल बा ए माई. भीतर खाली बा. कुछ बा ना. कइसे रही?  इहाँ भुँजवो खाये के बा, फँड़वो टोवे के बा. पेट खाली बा. खाली पेट में दिमगवो खाली हो जाला. दिमाग कामे नइखे करत. कुछ सूझते नइखे. पंडी जी से पूछनी हँ. उहाँ के कहनी हँ जे राहू-केतु ठीक नइखे चलत. खैर, उहाँ के त कुंडली के आधार पर ग्रह के बात कहनी हँ. हमरा त हई कुल्ही राहू-केतु लउकत बाड़न स. एगो जवन अपना देसवा के बाउंडरिया पर फँउकत बाड़न स ड्रैगनवा, ऊ.
दोसर देस के भीतरे दोस्त के रूप में दुश्मन बनल घूमsतारs सन, भितरघतिया, ऊ. तीसर ऊ, जेकरा हर काम में नुक्से लउकsता, निगेटिव आदमी, ऊ. ए सगरी के बुद्धि ठीक करs ए माई. तोहरा के छोड़ के दोसर केकरा पास जाई. तोहरा पास त रामो जी गइल रहलें. कादो तहरे वरदान से उ रावण के हरा पवलें. रावण के वध करे खातिर उ तोहरा नवो रुप के आराधना कइलें. तब तू प्रसन्न होके उनका के विजयी होखे के आशीर्वाद देलू. लोक के सबसे बड़ नायक रामजी जब तोहरा के पूजले त तोहरा से बड़ शक्तिशाली के बा ए दुर्गा माई.

तहरा वरदान से भगवान राम आततायी रावण के वध कर पवले आ माता सीता के अयोध्या वापस लंका से ले अइलें. रावण वध के एह घटना के कारण ही दशहरा पर्व के बुराई पर अच्छाई के जीत के रूप में मनावल जाला आ दुर्गा पूजा के अंतिम दिन रावण के पुतला जरावल जाला. बाकिर, रावण अभी मरल नइखे. आज के रावण के त कवनो चरित्रे नइखे. उ रावण त विद्वान रहे, चरित्रवान रहे आ महान रहे. बाकिर हई रावण ? दुर्गा पूजा में लइकी के पूजा होला, बेटी के पूजा होला, नारी शक्ति के पूजा होला.

बाकिर तोहरा त हाथरस से लेके दिल्ली तक के सब काण्ड मालूमे बा. मालूमे बा कि देश में बेटियन के हाल बा?  ..ई सब देख के हमरा बेचैनी भइल. हम कविता लिखनी. मरे हुए इक रावण को हर साल जलाते हैं हम लोग / जिंदा रावण-कंसों से तो आँख चुराते हैं हम लोग / खून हुआ है अपना पानी, इसमें आग लगाने दो / खिलने दो, खुशबू पहचानो, कलियों को मुसकाने दो चीर हरण का तांडव अब भी / चुप बैठे हैं पांडव अब भी / नारी अब भी दहशत में है / खेल रहे हैं कौरव अब भी /  हे केशव नारी को हीं अब चंडी बनकर आने दो / खिलने दो, खुशबू पहचानो, कलियों को मुसकाने दो त माई हो, सब रोग के तुहीं इलाज बाड़ू.

देश के अंदर उथल-पुथल बा. बाहर तनातनी बा. कोरोना के संकट माने मानवता पर संकट बा. अइसना में तोहरा नवो रूप के प्रणाम करत बानी. सब रूप देखावs आ एह दुनिया के बचावs. मानवता के बचावs. माई के नवो रूप माने - पहिला- मां शैलपुत्री (धन आ एश्वर्य के देवी), दूसरा- माता ब्रह्मचारिणी (संयम आ वैराग्य के देवी), तीसरा- माता चन्द्रघंटा -(कष्ट से मुक्ति दिआवे वाली देवी), चौथा- माता कूष्मांडा (दोष से मुक्ति दिआवे वाली देवी), पांचवां- माता स्कंदमाता (सुख-शांति के देवी), छठा- माता कात्यायनी (भय आ रोग से मुक्ति दिआवे वाली देवी), सातवां- माता कालरात्रि (शत्रु के नाश करे वाली देवी), आठवां- माता महागौरी (अलौकिक शक्ति के देवी), नवां- माता सिद्धिदात्री (सिद्धि देवे वाली देवी).

त माई हो राम जी के समय ओतना दिक्कत ना रहे जेतना अभी बा. कुछ करs. करs माई कुछ करs. दुनिया में अमन आ पेट में अन्न चाहीं. अतना त करs. करs, सबके निरोग करs. देशे के ना, सउँसे दुनिया के कोरोना मुक्त करs. आम आदमी भूखे मूअता. सबका थाली में रोटी होखे आ आँखि में नींन, एह नवरात्रि में बस अतने प्रार्थना बा ए दुर्गा माई.

अब एह अबोध के पीठ ठोकs . तोहरा पास त कमाल के शेर बा. हमहूँ आपन एगो शेर रखत बानी दुनिया के सामने - काँट चारो तरफ उगावे के फूल के अस्मिता बचावे केएह दशहरा में कवनो पुतला ना मन के रावण चलीं जरावे के. (लेखक मनोज भावुक सुप्रसिद्ध भोजपुरी कवि और फिल्म समीक्षक हैं.)
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