भोजपुरी में पढ़ें: देवार क संत देवरहवा बाबा

एगो जानकारी इहो बा कि जार्ज पंचम भारत क साधु संतन क समझे क खातिर 1911 म यहा आकर बाबा से  मुलाकात कईलन.

एगो जानकारी इहो बा कि जार्ज पंचम भारत क साधु संतन क समझे क खातिर 1911 म यहा आकर बाबा से मुलाकात कईलन.

देवरहवा बाबा हिंदी पट्टी में बहुत पूज्य रहनी हां. बारहो महीने बिना कउनो कपड़ा मचान पर रहे वाला बाबा के दरशन करे वाला लोगन में बाबू राजेदर परसाद से लेकर मदन मोहन मालवीय. लाल बहादुर शास्त्री. इंदिरा गांधी सब रहल हा. लेखक बाबा के सादा जीवन के याद करत बाने.

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  • Last Updated: September 15, 2020, 12:15 PM IST
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लेखक: चंद्र प्रकाश सिंह

ईकाई गाँव म गुजरल. देवरिया जिले क मईल नामक जगह वही पासे में आपन गाँव देवसिया. गाँव से सटल घाघरा नदी बहत रहल. जिनकर एगो दूसर नाम सरयू हउए. नदियन क लागल जगह देवार के नाम से जानल जाला. ई जगह साल के आधा त पानी म डूबल रहल. यही छोटे पर एगो संत देखनी. देवार में रहले के कारण लोग उनका के देवरहवा बाबा के नाम से जानत रहलस. बहुते सादा जीवन. पूरे देह पर खाली एगो मृगछाला. खाये क फल. दूध बस.घासफूस के झोपड़ी उचे मचान पर. बाबा राम और किशन दोनो लोगन क उपासक रहनी. उ दुनो क एके मानत रहनी उ कहत रहनी.

"एक लकड़ी हृदय को मानो दूसर राम नाम पहिचानो
राम नाम नित उर पर पे मारो ब्रह्म दिखे संशय न जानो।"
उनकर कृष्णमन्त्र बहुते प्रसिद्ध रहल जेकराके उ आपन सब भक्तन क देत रहन.



"ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतः क्लेशनाशाय . गोविन्दाय नमो नमः."

उ सभन के जीवन म ईमानदारी भगवान के भक्ति क जानकारी देत रहन. उनकाके खेचरी मुद्रा क सिध्दि रहल जौने से उनका अपने भूख प्यास और आयु पर अधिकार रहल. उनके पास कौनो गाड़ी घोड़ा नाही. आशीर्वाद देले क अलग ढंग कोउ भी रहे आपन पैर मचान से लटका देत रहन और लोगबाग ओकरा के अपने माथ से सटा लेत रहनल. बाबू राजेन्द्र प्रसाद. जवाहरलाल नेहरू. लालबहादुए शास्त्री. इंदिरा गांधी. मदन मोहन मालवीय. पुरुषोत्तमदास टंडन जी. सब बड़का नेता वहा आवत रहन लेकिन कौनो पद क लालसा नाही. कौनो जेड प्लस नाही. कौनो हुड़दंगई नाही. सबकर विषय मे सोचत रहन.

बाबू राजेन्द्र प्रसाद क गाँव उहा से कुछ ही दूरी पड़ बिहार क जीरादेई म था. उ उनकर दर्शन करत रहन. उ बाबा क विषय मे लिखने हउन की उ उनके हमेशा ऐके जइसन देखले हउअन. उ त उनकर उमर सैकड़न बरस बतावले हउअन. कही सैकड़न बरस आजकल क संत जी जइतन त का होई. कई पीढ़ी क लोग त ताकते रह जाइतन. प्रयाग हाईकोर्ट के एगो वकील साहब ई बतावत रहन की उनकर सात पीढ़ीयन क लोग बाबा क आशीर्वाद लेत रहनस. एतना नेता मिलन केहू के साथ उनकर फ़ोटो नाही. कौनो एगो पार्टी क बात नाही. सबकर भला चाहे क विचार. बाबू राजेन्द्र प्रसाद जब लड़िकाई में अपना माई क साथ से बाबा से मिलनह बाबा बताईन ई लईका बड़वन होकर ऊँच कुरसी पर बइठि.

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राष्ट्रपति बनला के बाद राजेन्द्र बाबू एगो पाती लिखाकर उनकरा क धन्यवाद करनह. बाबा अष्टांग योग म माहिर रहनी ह. लेकिन कौनो प्रचार प्रसार और ब्रांड नाही. कई सौ करोड़ क मालिक नाही. कौनो नात रिश्तेदार नाही जेके आश्रम क मालिक बनाकर दे गईल होखे. 1977 क चुनाव हरले क बाद इंदिरा जी बाबा से मिले की खातिर आईल रहली. बाबा आशीर्वाद देलन और हाथ के पंजा देखइलन. कहल जाला की वही के बाद ई कांग्रेस क निशान बनल. आज त ई सिम्बल की खातिर मुकदमा हो जाइत. बाबा भक्तन के प्रसाद हाथ घुमा लावत रहन. भक्तन के चकचोनी आवत रहल. जैसे आजकल चुनाव म ई वी एम क वोट देख कर होला.

कहल जाला की उ पनिवो पर चलत रहन. मन क बात जान लेत रहन. कही आवे जावे की खातिर कौनो वाहन नाही प्रयोग कईलन. जइसे नेता  जी लोग कौनो पार्टी म भोर से रात म आवत जात रहत बानी. और कहल बानी की ई त लोगन क मन रहल ह. मईल में बाबा साल क 8 महीना गुजारत रहन. बाकी समय अलग अलग जगहन पर साधना करत रहन. कब्बो उ कौनो चमत्कार क दावा नाही कईनन. चाहे गरीबन क धनी बनावेके होखे. चाहे स्मार्ट सिटी बनावेके होखे. चाहे कौनो नालायक क लायक पद पर बैठावेके होखे. कहल त इहो जाला की उ एक साथ दू जगह पर रहत रहन. जईसे नेता लोग कई ठो दल में रहत बान.

जौने समय बाबा ई जगह पर अइले न ई जगह बहुत पिछड़ल रहल लेकिन उनकर केहू से कौनो शिकायत नाही. जीवन कठिन रहल. जंगली जन्तु आपराधिक लोग भी रहल लेकिन उ यहा रहकर आपन काम करत रहनअ.  उनकर आश्रम क लग्गे बबूल का बहुत पेड़ रहनल लेकिन कौनो पेड़ म काटा नाही. उ बबुल भी शरीफ हो गईल. लोग कब आपन स्वभाव सुधारी. मथुरा म 1987 जून क महीना बाबा उहा दर्शन देत रहन. उस समय उहा राजीव गांधी आवेके रहन उ वो समय प्रधानमंत्री रहन. अफसर लोग वहा हेलीपैड बनावे के खातिर एगो बबूल क पेड़ काटे के कहन. बाबा अफसर के बुलाके पुछन्ह पेड़ काहे काटे के बा अफसर बतइलस ई हेलीकाप्टर क उतरे के खतिर जरूरी बा ये पर बाबा कहन तू लोग प्रधानमंत्री क लाइब लेकिन वोकर नुकसान त पेड़ उठाई उ पेड़ हमार साथी ह उ हमसे पूछी त हम का जबाब देइम. नाही ई पेड़ नाही कटी. अफसर बहुत ही परेशान हों गए त बाबा कहलन घबरा लोगन मत प्रधानमंत्री नाही आईहन और उहे भईल.

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कहल जाला की उ सब कुछ याद रखत रहन कई साल पुराना लोग उनकर के याद रहत रहल. नेतावन जइसन ना कि चुनाव बाद भूल गइलन. एगो जानकारी इहो बा कि जार्ज पंचम भारत क साधु संतन क समझे क खातिर 1911 म यहा आकर बाबा से  मुलाकात कईलन. कहल जाला की आपन देह त्यागले क बात उ पांच साल पहले ही बता देले रहनल. एक हफ्ते पहले से उ लोगन क दर्शन दिहल बंद कर देन. 19 जून 1990 मंगलवार को मथुरा में उ आपन शरीर छोड़ देन. इनकर समाधि स्थल वृन्दावन म यमुना नदी के वो पार तट पर बनल बा. कहल जाला कि इनकर दर्शन से जीवन बन जाला. अइसन दिव्य आत्मा के नमन.
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