गांधी जयंती पर विशेष: जानीं भोजपुरी से गांधी जी के केतना नजदीक के संबंध बा

भोजपुरी लोकगीत में बापू के जिक्र घर परिवार के लोगन जइसन बा.
भोजपुरी लोकगीत में बापू के जिक्र घर परिवार के लोगन जइसन बा.

चंपारण इलाका में नील के खेती के विरोध में गांधी जी के आंदोलन भोजपुरी के माटी से जुड़ल बा. गांधी जी के एह माटी से जुड़ाव के कारण भोजपुरी लोकगीत में उनकर बहुत जिक्र बा. इहां तक कि शादी  - बिआह के गीत में भी गांधी जी के खूब आनंद से जिक्र कइल जाला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 2:57 PM IST
  • Share this:
गांधी जी के जब-जब आपन खासियत बतावे के जरूरत पड़ल, तब-तब ऊ आपाना के गुजराती आ बनिया-दूनों बतवले. एह में का सक आउर का सुबहा. बाकिर हकीकत ई बा कि उनुका के गांधी से महात्मा ठेठ भोजपुरी इलाका में कइल उनुकर काम बनवलसि. 15 अप्रैल 1917 के गांधी जी बिहार के चंपारण ना पहुंचिते. आ ना ऊ उहां नीलहा किसानन के अतियाचार आउर तीन कठिया प्रथा के विरोध में खाड़ा होइते. त सायद इतिहास कुछु अउरे रहित.

चंपारण में ओह घरि नीलहा मालिकन के जुलुम से किसान लोग परेसान रहे. अंगरेज सरकार ओह घरी एगो प्राविधान कइ देले रहे कि हर किसान के बीघा पीछे तीन कट्ठा में नील के खेती करहिं के परी. एह से किसानन के कवनो फायदा ना रहे. आउर ता आउर. अंगरेज सरकार किसानन पर 46 तरह के टैक्स लादि देले रहे. एह जुलुम के वर्णन मनोरंजन प्रसाद सिंह आपाना ‘फिरंगिया’ गीत में अइसे कइले बाड़े.
जहवां थोड़े ही दिन पहिले ही होत रहे
लाखो मन गल्ला और धान रे फिरंगिया
उहें आज हाय रामा मथवा पर हाथ धरि
विलखि के रोवेला किसान रे फिरंगिया.



एह से विचलित चंपारण के राजकुमार सुकुल परेसान रहत रहले.  कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में ऊ गांधी जी से निहोरा कइले कि चंपारण पहुंचीं आ उहां के लोगनि के दुख-दरदि देखीं. संजोग देखीं कि गांधी जी सुकुल जी के निहोरा के पहिले अनदेखी कइले. उनुका के जाताना टारि सकत रहले, टरकवले. लेकिन सुकुल जी गांधी जी के पीछा ना छोड़ले. हारि से गांधी जी के चंपारण जाए के परल.

ऊहां पहुंचला के बाद गांधी जी के आंखि खुलि गइल. चंपारण के भीतिहरवा में आश्रम बनाके आंदोलन जे सुरू कइले. त ई आंदोलन छह महीना चलल. अंगरेज सरकार के झुके के परल. चंपारण सत्याग्रह के कामयाबिए के बाद गांधी जी महात्मा के तौर पर मसहूर हो गइले. एह हिसाब से देखल जाउ त गांधी जी के महात्मा बनवलसि भोजपुरी माटी पर कइल उनुकर संघर्ष.

ओइसे एगो अउरी बात इहां बतावल जरूरी बा. भोजपुरी लोग गांधी जी के गान्ही जी कहत रहल. हामार मइया यानी दादी ताजिनगी उनुका के गान्हीए जी कहत रहली. गान्ही जी के चूंकि भोजपुरी इलाका से देस में नाया रूप में चिन्हइले. जाहिर बा कि भोजपुरी कवि लोगन के रचना के केंद्र में भी आ गइले.

भोजपुरी में करीब सौ साल  पहिले गांवें-गावें एगो गीत बाड़ा मसहूर हो गइल रहे. भोजपुरी इलाका में सादी-बियाह में समधी, तिलकहरू, दूलहा के खूब गारि दियाला. ओह घरी गांधी जी के सोहरत के आलम ई रहे कि सादी-तिलक में मेहरारू लोग ई गारी खूब गावति रहे लोग.
बान्हि के खद्दर के पगरिया, गांधी ससुररिया चलले ना..
गांधी बाबा दुलहा बनले, नेहरू बनले सहबलिया,
भारतवासी बनले बाराती, लन्दन के नगरिया ना,
गांधी ससुररिया चलले ना..

गांधी जी जइसे-जइसे भारत के धड़कन बनत चलि गइले. भारतीय साहित्यकारन के प्रेरणा पुरूष बनत चलिए गइले. जइसे-जइसे आजादी के आंदोलन बढ़त चलि गइल. ओइसे-ओइसे देस के साहित्यकारो लोग आंदोलन में जुटत गइल. भोजपुरियो के भी कई गो साहित्यकार लोग भी गांधी जी के आंदोलन में सामिल भइल रहे. भोजपुर के सरदार हरिहर सिंह, बलिया (उ.प्र.) के प्रसिद्ध नारायण सिंह, बबुरा (शाहाबाद) के रघुवंश नारायण सिंह, गोरखपुर के चंद्रसेन 'चंचरीक'  जइसन ना जाने काताना भोजपुरी साहित्यकार-कवि लोग भी स्वाधीनता आंदोलन में सामिल भइल रहे लोग. ऊ लोग गांधी जी आ स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ल रचना खूबे लिखले बा लोग.

हरिहर सिंह के एगो भोजपुरी गीत देखिं. जवना में ऊ गांधी जी के अहमियत के बतावत बाड़े. एके संगे स्वाधीनता खातिर जागरूकतो फइलावे के कोसिस करत बाड़े.

चलु भईया चलु आजु सभे जन हिलिमिलि
सूतल जे भारत के भाई के जगाईं जा
गांधी जइसन जोगी भईया जेहल में पड़ल बाटे
मिलि जुलि चलु आजु गांधी के छोड़ाईं जा
दुनिया में केकर जोर गांधी के जेहल राखे
तीस कोटि चलु अगिया लगाईं जा
गांधी के चरनवा के मनवा में ध्यान धरीं
असहयोग चलु आजु सफल बनाईं जा।

गांधी जी के हत्या को लेकर हमारा नजरि के सामने से दूगो कवि लोगन के रचना गुजरल बा. पहलिका बा कुबेर नाथ मिश्र ‘विचित्र’ के . ओहके देखि सभें.

एगो रहले गांधी / चलवले एगो आंधी
सुराज गान गवले / देश के जगवले
सभे लोगवा जागल / अंग्रेज इहां से भागल
सन रहे सैंतालिस / आइल अड़तालिस
नाथू हतियारा / तीनि गोली मारा
राम नाम गवलें / स्वर्ग लोक पवलें
बापू के कहानी / इयाद बा जबानी

भोजपुरी में एगो लोककथा बा. जवना के हर भोजपुरीभाषी जे गांव में रहत होई. अपना लरिकाईं में जरूर सुनले होई.  ऊ कथा कुछु अइसे बा.

एगो रहले राजा.
खइले खाझा.
पीपर के पात पर कइले लाझा.
कुबेर मिश्र जी के रचना ओही तर्ज पर बा.

गांधी जी के हत्या के केंद्र में रखि के लिखल रसूल मियां के गीत हालि के दिनन में ढेरे मसहूर भइल बा. रसूल मियां गोपालगंज के रहले.

के हमरा गांधीजी के गोली मारल हो, धमाधम तीन गो.
कल्हिये मिलल आजादी, आजु चलल गोली.
गांधी बाबा मारल गइले देहली के गली हो. धमाधम तीन गो
पूजा में जात रहले बिरला भवन में.
दुश्मनवा बइठल रहे पाप लिए मन में.
गोलिया चला के बनल बली हो. धमाधम तीन गो.

गांधी जी ना सिर्फ देश के आजादी के नायक रहले. बल्कि आपना जिनगी आउर करम के चलते लोक आउर जीवन मूल्य के प्रतीको बनि गइल रहले. आजुओ केहू के तोखा दियाला. त गांधी के उद्धरण जरूर दियाला. लोग आपन बात सही साबित करे खातिर गांधी जी काम आ वचन के उदाहरण देला. एही वजह से आजु के जमाना के दुर्गुणन पर व्यंग करे खातिर कैलाश गौतम जी गांधी जी के गजबे इस्तेमाल कइले बाड़े. तनि उनुकर सबद चमत्कार देखीं.

सिर फूटत हौ, गला कटत हौ, लहू बहत हौ, गान्ही जी
देस बंटत हौ, जइसे हरदी धान बंटत हौ, गान्ही जी
बेर बिसवतै ररूवा चिरई रोज ररत हौ, गान्ही जी
तोहरे घर क' रामै मालिक सबै कहत हौ, गान्ही जी
कैलाश गौतम जी के ई रचना बहुत लमहर बा. .

आजु गांधीजी के जयंती ह. गांधी जी अब खाली भारते के नइखे रहि गइल बाड़े. बल्कि अब ऊ समूचा मानवता के थाती बाड़े. एह में कवनो सक-सुबहा नइखे कि उहां के जिनिगी में बदलाव दक्षिण अफ्रीका से शुरू भइल. लेकिन उहां के महात्मा वाली ताकत भोजपुरी माटी में आके उजागर भइल. इहे वजहि बा. कि उहां पर भोजपुरियो समाज बहुते लहालोट भइल आ उहां के आपाना लोकगीत आ रचना के विषय बनावे से पीछे ना रहल.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज